सप्लीमेंट्री परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, पास होने के बाद भी सुधार सकते हैं अंक, जानें कैसे
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) पूरक परीक्षा प्रणाली (Supplementary Examination System) में कुछ जरूरी बदलाव कर सकता है। इस नई व्यवस्था के तहत, अगर कोई छात्र मुख्य परीक्षा में सफल होता है लेकिन उसके अंक संतोषजनक नहीं होते, तो वो 4 महीने बाद आयोजित एक अतिरिक्त परीक्षा (additional examination) में शामिल हो सकता है।
खास बात ये है कि इस परीक्षा में उन छात्रों को भी शामिल होने का मौका मिलेगा जो सभी विषयों में फेल हो गए हैं। इस निर्णय को एमपी बोर्ड की कार्यपालिका समिति (executive committee) ने मंजूरी दे दी है। इस नए सिस्टम से छात्रों को बेहतर अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी कमियों को दूर कर सकेंगे और अपने साल को खराब होने से बचा सकेंगे। ये हैं कुछ जरूरी बातें...
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नई व्यवस्था की आवश्यकता और प्रभावी तिथि
समय सारणी में बदलाव
एमपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए मॉडर्न टाइम टेबल जारी किया है। 19 मार्च को होने वाली परीक्षा अब 21 मार्च को आयोजित होगी, क्योंकि 19 मार्च को रंगपंचमी का त्योहार है। इस दिन 10वीं कक्षा की विज्ञान (Science) और 12वीं कक्षा की एनएसक्यूएफ (NSQF) और शारीरिक शिक्षा (physical education) की परीक्षाएं होंगी। परीक्षा का समय सुबह 9 से 12 बजे तक रहेगा।
सप्लीमेंट्री परीक्षा में छात्र संख्या
हर साल लगभग 3 लाख छात्र 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा देते हैं। वहीं, 5 लाख छात्र पूरी तरह से फेल हो जाते हैं।
कम अंक आने पर फिर से परीक्षा देने का मौका
अगर किसी छात्र को किसी जरूरी विषय में कम अंक आते हैं, तो वो भी इस परीक्षा में शामिल हो सकता है। लेकिन इसके लिए उसे सभी विषयों की परीक्षा देनी होगी। केवल उन विषयों की परीक्षा दी जा सकेगी जिनमें छात्र की सप्लीमेंट्री आई हो।
अंक सुधारने का मौका
यदि कोई छात्र अंक सुधार के लिए दूसरी परीक्षा में शामिल होता है और उसमें फेल हो जाता है, तो दूसरी परीक्षा के अंक ही मान्य होंगे। परीक्षा में शामिल होने से पहले छात्र को ये लिखित में देना होगा कि वो अपनी श्रेणी सुधार के लिए परीक्षा में भाग ले रहा है।
फेल होने पर छात्रों के लिए परीक्षा के विकल्प
यदि किसी छात्र ने तीन या उससे अधिक विषयों में फेल होने के बाद परीक्षा दी है, तो उसे उन ही विषयों की परीक्षा देनी होगी जिनमें वो फेल हैं। छात्र किसी अन्य विषय में परीक्षा देने के लिए मान्य नहीं होंगे, जब तक कि वो उस विषय में फेल न हों।
फेल होने के बाद क्या करें
जो छात्र सप्लीमेंट्री परीक्षा में भी फेल हो जाते हैं, उनके लिए मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल द्वारा "रुक जाना नहीं" योजना चलाई जाती है। इसके तहत, छात्र साल में दो बार फेल हुए विषयों की परीक्षा देकर पास हो सकते हैं।
FAQ
- नई परीक्षा व्यवस्था कब से लागू होगी?
यह व्यवस्था इस शिक्षण सत्र से लागू होगी। - सप्लीमेंट्री परीक्षा में कितने छात्र शामिल होते हैं?
हर साल करीब 3 लाख छात्र सप्लीमेंट्री परीक्षा देते हैं। - क्या कम अंक आने पर छात्र इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं?
हां, कम अंक आने पर भी छात्र इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं, लेकिन सभी विषयों की परीक्षा देनी होगी। - अंक सुधार के लिए परीक्षा में फेल होने पर क्या परिणाम होगा?
यदि सुधार परीक्षा में फेल होते हैं, तो वही अंक मान्य होंगे जो दूसरी परीक्षा में प्राप्त होंगे। - फेल होने पर छात्र क्या कर सकते हैं?
फेल होने पर छात्र "रुक जाना नहीं" योजना के तहत ओपन स्कूल परीक्षा दे सकते हैं।
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