एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला: अंक बढ़ने पर भी नहीं मिलेगी फीस वापसी

Manya Jain | May 19, 2026, 15:20 IST
MPBSE Retotalling 2026
एमपी बोर्ड के 10वीं-12वीं के रिजल्ट से नाराज करीब 30 हजार स्टूडेंट्स ने रिटोटलिंग के लिए फॉर्म भरा है। ध्यान रहे, जैसे सीबीएसई में होता है, यहां अंक बढ़ने पर फीस वापस नहीं मिलेगी। लेकिन जो टीचर्स गड़बड़ी करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगेगा।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला



  • एमपी बोर्ड के तीस हजार छात्रों ने रिटोटलिंग के लिए आवेदन किया है।
  • नंबर बढ़ने पर भी बोर्ड छात्रों की आवेदन फीस वापस नहीं करेगा।
  • लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर बीस हजार रुपए तक जुर्माना लगेगा।
  • सीबीएसई बोर्ड अंक बढ़ने पर छात्रों की पूरी फीस लौटा देता है।
  • एमपी बोर्ड ने सीबीएसई के इस नियम को अपनाने से इनकार किया।

एमपी बोर्ड परीक्षा के बाद रिटोटलिंग की भारी मांग

माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद हलचल बढ़ गई है। राज्य के करीब तीस हजार छात्र अपने प्राप्त अंकों से खुश नहीं हैं। इन बच्चों ने कॉपियों के नंबरों को दोबारा जोड़ने के लिए आवेदन किया है।



इस पूरी प्रक्रिया को रिटोटलिंग या पुनर्गणना कहा जाता है। छात्र अपनी मार्कशीट को सुधारने की उम्मीद में ऑनलाइन फॉर्म भर रहे हैं। लेकिन इस बार बोर्ड के नियमों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।



नंबर बढ़ने पर भी नहीं मिलेगी फीस वापस

सबसे बड़ी बात यह है कि एमपी बोर्ड छात्रों की फीस वापस नहीं करेगा। भले ही रिटोटलिंग के बाद छात्र के नंबरों में कितना भी सुधार हो जाए। बोर्ड अपने पुराने नियमों पर ही अड़ा हुआ है।



यह नियम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई से बिल्कुल अलग है। सीबीएसई ने हाल ही में प्रावधान किया है कि गड़बड़ी मिलने पर फीस लौटेगी। लेकिन मध्यप्रदेश का शिक्षा मंडल इस सिस्टम को लागू करने के मूड में नहीं है।



गलती करने वाले शिक्षकों पर लगेगा जुर्माना

भले ही छात्रों को राहत न मिले, लेकिन लापरवाह शिक्षकों की खैर नहीं है। कॉपियों को जांचने में गलती करने वाले शिक्षकों पर बोर्ड जुर्माना लगाएगा। यह जुर्माना सीधे उनकी सैलरी से काटा जा सकता है।



बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार इसके लिए सख्त गाइडलाइन बनाई गई है। पिछले साल भी पांच सौ से ज्यादा शिक्षकों पर ऐसी कार्रवाई हो चुकी है। इस बार भी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।



सीबीएसई और एमपी बोर्ड के नियमों में बड़ा अंतर

सीबीएसई के नए नियमों के तहत ऑनलाइन कॉपियों की जांच शुरू हुई है। इस डिजिटल सिस्टम के कारण कई बार अंकों में गड़बड़ी सामने आ रही है। इसलिए सीबीएसई ने अंक बढ़ने पर फीस लौटाने का फैसला किया।



सीबीएसई का मानना है कि शिक्षकों की गलती की सजा छात्र क्यों भुगतें। दूसरी तरफ एमपी बोर्ड के अधिकारी भूपेश गुप्ता ने साफ मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां फीस वापसी का कोई नियम नहीं है।



पिछले साल के आंकड़े खोल रहे पोल

पिछले साल के रिकॉर्ड बताते हैं कि कॉपियों की जांच में बड़ी लापरवाही होती है। 2025 में रिटोटलिंग के दौरान बच्चों के 15 से 30 नंबर तक बढ़ गए थे। नियमों के मुताबिक 5 नंबर से ज्यादा बढ़ना गंभीर माना जाता है।



इसके बाद प्रदेश के पांच सौ से ज्यादा शिक्षकों को नोटिस दिए गए थे। उन पर बीस हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगा था। जिन शिक्षकों ने जुर्माना नहीं भरा, उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट खराब की गई।



री-इवैल्यूएशन और दोबारा जांच का कोई प्रावधान नहीं

मंडल ने एक और बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। एमपी बोर्ड में कॉपियों की दोबारा जांच या पुनर्मूल्यांकन नियम नहीं है। छात्र केवल अपने अंकों की गिनती दोबारा करवा सकते हैं।



इसके लिए केवल ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। यदि अंकों के जोड़ में गड़बड़ी मिलती है, तो उसे सुधारा जाएगा। इसके अलावा कॉपियों के अंदर के उत्तरों को दोबारा नहीं देखा जाएगा।



अभिभावकों में नियमों को लेकर नाराजगी

बोर्ड के इस अड़ियल रवैये से छात्र और उनके माता-पिता परेशान हैं। उनका कहना है कि जब गलती शिक्षक की है तो फीस क्यों रखी जा रही है। एक तो बच्चों के नंबर कम आते हैं और ऊपर से जेब ढीली होती है।



अभिभावक संघ का कहना है कि एमपी बोर्ड को भी सीबीएसई की तरह आधुनिक होना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए नियमों में बदलाव बहुत जरूरी है। अब देखना होगा कि क्या बोर्ड भविष्य में इस पर विचार करेगा।



FAQ

  1. एमपी बोर्ड में रिटोटलिंग के बाद अंक बढ़ने पर क्या आवेदन फीस वापस मिलती है?
    नहीं, माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) के नियमों के अनुसार रिटोटलिंग के बाद अंक बढ़ने पर भी छात्रों को आवेदन फीस वापस नहीं की जाएगी।
  2. कॉपियों के मूल्यांकन में गलती करने वाले शिक्षकों पर क्या कार्रवाई होती है?
    कॉपियों की जांच में गड़बड़ी या नंबरों के जोड़ में गलती करने वाले शिक्षकों के खिलाफ एमपी बोर्ड सख्त कदम उठाता है।
  3. क्या एमपी बोर्ड में कॉपियों की दोबारा जांच (Re-checking) करवाई जा सकती है?
    नहीं, एमपी बोर्ड में कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन या दोबारा जांच का कोई नियम नहीं है। छात्र केवल 'रिटोटलिंग' यानी अंकों की पुनर्गणना के लिए ही आवेदन कर सकते हैं।

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