हाईस्कूल- हायर सेकेण्डरी परीक्षा के इंटरनल मार्क जमा करना भूले स्कूल
News in Short
- 225 स्कूलों द्वारा इंटरनल मार्क्स दर्ज न करने से बोर्ड परीक्षा के 15000 छात्रों के रिजल्ट पर पड़ेगा असर।
- प्रदेश के इन स्कूलों को 12 मार्च तक इंटरनल मार्क माशिमं के पोर्टल पर ऑनलाइन करने थे दर्ज।
- अब 29 मार्च तक इन स्कूलों को आंतरिक परीक्षा के अंक दर्ज करने माशिमं ने दी है हिदायत।
- इंटरनल अंक जमा नहीं कराए जाते हैं तो मार्कशीट पर आंतरिक भाग में दर्ज किया जाएगा अनुपस्थित।
- हाईस्कूल- हायर सेकेण्डरी परीक्षा का रिजल्ट 14 अप्रेल तक जारी करने की तैयारी में जुटा है माशिमं।
News in Detail
मध्य प्रदेश के सवा 200 से ज्यादा स्कूलों की लापरवाही 15 हजार छात्रों का रिजल्ट बिगाड़ सकती है। यह लापरवाही हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षा के इंटरनल मार्क्स जमा करने में बरती गई है।
स्कूलों को 12 मार्च तक इंटरनल मार्क्स जमा कराने थे लेकिन 12 दिन से ज्यादा बीतने के बाद भी सवा 200 स्कूलों ने ऐसा नहीं किया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अब ऐसे स्कूलों को 29 मार्च तक अंक जमा करने की चेतावनी दी है।
मूल्यांकन के लिए 31 मार्च की डेडलाइन
बोर्ड परीक्षा में रिजल्ट में इंटरनल मार्क्स भी शामिल किए जाते हैं। इन अंकों का असर छात्रों के रिजल्ट और प्रतिशत पर पड़ता है। मध्य प्रदेश में कक्षा 10 और कक्षा 12वी की वार्षिक परीक्षा का मूल्यांकन अंतिम चरण में है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा मूल्यांकन के लिए 31 मार्च की डेडलाइन रखी है। वहीं स्कूलों को इंटरनल अंक 12 मार्च तक जमा करने के निर्देश दिए गए थे। क्योंकि रिजल्ट में इन अंकों को भी जोड़ा जाता है। माध्यमिक शिक्षा मंडल की हिदायत के बाद भी प्रदेश के 225 से ज्यादा स्कूल ऐसा करना भूल गए हैं।
12 दिन बाद भी जारी अनदेखी
माध्यमिक शिक्षा मंडल ने प्रदेश के 225 से ज्यादा स्कूलों को बोर्ड परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों के इंटरनल मार्क्स जमा करने अंतिम चेतावनी दी है। इन सभी स्कूलों को 12 मार्च तक छात्रों के इंटरनल मार्क्स ऑनलाइन दर्ज कराने थे।
छात्रों को इंटरनल के रूप में 20 अंक निर्धारित हैं। इन अंकों के जरिए छात्रों के रिजल्ट का प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद स्कूल प्रबंधन द्वारा डेडलाइन बीतने के 12 दिन बाद भी अनदेखी की जा रही है।
15 हजार छात्रों पर पड़ सकता है असर
इंटरनल मार्क्स देने में चूके करीब 225 स्कूलों के 15 हजार से ज्यादा छात्र हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षा में शामिल हुए हैं। इन्हीं छात्रों के इंटरनल मार्क्स माध्यमिक शिक्षा मंडल को अब तक नहीं मिले हैं। वहीं मूल्यांकन का काम लगभग पूरा हो चुका है।
इंटरनल मार्क्स के लिए मंडल ने 29 मार्च तक का समय दिया है। स्कूल प्रबंधन तब तक मार्क्स दर्ज नहीं कराते तो छात्रों को 20 अंकों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रोजेक्ट वर्क से तय होते हैं इंटरनल मार्क
बोर्ड परीक्षा में बाकी परीक्षा तो सेंटर पर होती है जिनकी कॉपियों के आधार पर अंक दिए जाते हैं। वहीं इंटरनल मार्क छात्रों के प्रोजेक्ट वर्क के आधार पर तय होते हैं।
यह अंक छात्रों के प्रोजेक्ट के परीक्षण के बाद स्कूल स्तर पर तय होते हैं। इसके अलावा प्रायोगिक परीक्षा के लिए 25 अंक निर्धारित हैं। यदि स्कूलों द्वारा अंक दर्ज नहीं कराए गए तो छात्रों की अंकसूची के इंटरनल मार्क में उन्हें अनुपस्थित दर्शाया जा सकता है।
माशिम को रिजल्ट में देरी का अंदेशा
माध्यमिक शिक्षा मंडल 31 मार्च तक मूल्यांकन का काम पूरा कराने में जुटा है ताकि 14 अप्रेल के आसपास रिजल्ट जारी किया जा सके। वहीं इन तैयारियों के बीच स्कूलों की लापरवाही मंडल के शैड्यूल को बिगाड़ रही है।
एग्जाम कंट्रोलर बलवंत वर्मा का कहना है 7 मई से दूसरी मुख्य परीक्षा निर्धारित है। यदि रिजल्ट में देरी होती है तो इसका असर अगले शैड्यूल पर पड़ना तय है। सभी स्कूलों को इस संबंध में सूचना दे दी गई है ताकि छात्र इससे प्रभावित न हों।
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