50 दिन में दो बार बदली SIT: भोपाल, ग्वालियर, चंबल अंचल में शुरू ही नहीं हो पाई जांच

Sanjay Sharma | May 11, 2026, 19:16 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. ग्वालियर HC के आदेश पर MP सरकार ने 12 मार्च 2026 को SIT बनाई। ACS श्रम अध्यक्ष थे। 2 अप्रैल को टीम बदल दी और संभागायुक्त को अध्यक्ष बनाया। 50 दिन में दो बार फेरबदल हो गया, लेकिन जांच शुरू नहीं हुई।

पॉइंट्स से समझें पूरा मामला...

  • 10 फरवरी 2026 को बनी SIT 2 अप्रैल को बदल गई।
  • पहले ACS श्रम कर रहे थे अध्यक्षता, अब संभागायुक्त हैं प्रमुख।
  • 50 दिन में दो टीम बदलने के कारण जांच शुरू ही नहीं हुई।
  • ग्वालियर, चंबल और भोपाल संभाग में बंधुआ मजदूरी की होनी है जांच।
  • हाईकोर्ट के आदेश पर किया गया है स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम।

मध्यप्रदेश में बंधुआ मजदूरी के मामलों पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के सख्त रुख के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी है। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच शुरू होने से पहले ही बदल दी गई।



50 दिन में टीम के स्वरूप और सदस्यों में बदलाव का असर भी जांच की रफ्तार पर हुआ है। छोटेलाल आदिवासी की याचिका पर हाईकोर्ट के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया है। छोटेलाल आदिवासी ने ग्वालियर, चंबल और भोपाल संभाग में बंधुआ मजदूरी के मामलों को लेकर नवम्बर 2025 में हाईकोर्ट में याचिका पेश की है।



पहली SIT में ACS को बनाया मुखिया

फरवरी 2026 के आदेश के जरिए सामान्य प्रशासन द्वारा 12 मार्च को SIT गठित की गई थी। इसमें एसीएस को प्रमुख बनाया गया था, जबकि एसीएस राजस्व, ग्वालियर, चंबल और भोपाल रेंज के डीआईजी के अलावा श्रम आयुक्त, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग के सचिव और संबंधित जिला कलेक्टरों को सदस्य बनाया गया था। वहीं 50 दिन बाद एसआईटी का स्वरूप बदल दिया गया।



पुनर्गठन के बाद एसआईटी का स्वरूप संभाग स्तरीय कर दिया गया। जिसमें एसआईटी प्रमुख के रूप में संभाग आयुक्त और सदस्यों के रूप में संबंधित पुलिस जोन के आईजी, उप संचालक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग को शामिल किया गया।



बदली टीम, नहीं हुई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन

मार्च 2026 को बनी एसआईटी को बंधुआ मजदूरी के मामलों की पड़ताल करनी थी। यह टीम तीन संभागों में बंधुआ मजदूरी के मामलों की परतें खंगालती इससे पहले ही 2 अप्रैल को उसे बदल दिया गया।



फरवरी 2026 में जिस आदेश के जरिए एसआईटी का गठन किया गया था जीएडी ने उसे 50 दिन बाद यानी 2 अप्रैल को बदल दिया। एसआईटी गठन के केवल 20 दिन में ही टीम को प्रदेश स्तर की जगह संभाग स्तर पर काम सौंप दिया गया।



एसआईटी का दायरा संभाग स्तर पर सीमित करने से टीम के अधिकार और प्रभाव भी सिमट गए हैं। वहीं टीम की कमान संभालने वाले चेहरे को बदलने जाने से जांच की अवधि और जवाबदेही ही तय नहीं हो सकी।



mp bonded labour


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बंधुआ मजदूरी पर हाईकोर्ट की नाराजगी

मध्य प्रदेश से अब भी बंधुआ मजदूरी का दाग नहीं धुल पाया है। छोटेलाल आदिवासी की याचिका ने भी इसे उजागर किया है। इसी वजह से हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठने भी बंधुआ मजदूरी पर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।



हाईकोर्ट के आदेश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने एसआईटी को गठित की थी, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में हाईकोर्ट के समक्ष जवाब पेश करना और बंधुआ मजदूरी के समाधान के लिए मांगे गए उपाय भी सरकार नहीं बता पा रही है।



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