NFHS Survey: तेजी से गिर रहे हैं MP में ब्रेस्टफीडिंग के आंकड़े
MP Breastfeeding Drops: मध्य प्रदेश में नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की नई रिपोर्ट ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। राज्य में अब 100 में से करीब 44 बच्चे अपने जीवन के शुरुआती 6 महीनों में मां के दूध से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।
सिर्फ 4 सालों के भीतर ही एमपी में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग की दर 74% से भारी गिरावट के साथ घटकर 56.4% पर आ चुकी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मध्यप्रदेश में स्तनपान घटने की यह रफ्तार पूरे देश के मुकाबले दोगुनी तेजी से बढ़ रही है। आइए इस गंभीर समस्या की पूरी स्टोरी को समझते हैं।
घर और दफ्तर के बीच फंसी माताएं
मध्यप्रदेश में 6 माह तक सिर्फ मां का दूध पाने वाले बच्चों की संख्या तेजी से घट रही है। NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि 100 में से 44 बच्चे मां के दूध से वंचित हैं। 4 साल में यह दर 74% से घटकर 56.4% रह गई है। देश में गिरावट 7.9% रही, लेकिन MP में यह 17.6% है। काम का बोझ, थकान और जागरूकता की कमी इसकी मुख्य वजहें हैं।
सुबह 6 बजे अलार्म बजते ही नेहा की दौड़ शुरू हो जाती है। बड़े बच्चे को स्कूल भेजना है। टिफिन बनाना है और ऑफिस भी जाना है। इसी भागदौड़ में 4 महीने की बेटी को दूध पिलाना मुश्किल हो जाता है। नेहा अकेली नहीं हैं। प्रिया की सिजेरियन डिलीवरी हुई। कमजोरी के चलते दूध कम आता है। बच्चे का पेट नहीं भरता, तो पैकेट का दूध देना पड़ता है। वहीं रिद्धि घर में अकेली हैं।
रात-दिन जागने से तबीयत बिगड़ गई है, इसलिए बोतल से दूध देती हैं। ये तीनों कहानियां इमेजिनरी नामों वाली हैं, लेकिन हकीकत यही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS – National Family Health Survey) के ताजा आंकड़े इसी सच को सामने रखते हैं।
MP में गिरावट, देश से दोगुनी
NFHS-5 (2019-21) में MP में 6 माह तक सिर्फ मां का दूध पाने वाले बच्चों की दर 74% थी। NFHS-6 (2023-24) में यह घटकर 56.4% रह गई। यानी 4 साल में 17.6 प्रतिशत अंक की गिरावट। राष्ट्रीय स्तर पर यही दर 63.7% से घटकर 55.8% हुई। गिरावट केवल 7.9% रही। MP की गिरावट देश से करीब दोगुनी है। यह आंकड़ा बताता है कि मध्यप्रदेश में समस्या ज्यादा गंभीर है।
मां का दूध है पहला टीका
महिला एवं बाल रोग एक्सपर्ट के मुताबिक, मां का दूध बच्चे का पहला वैक्सीनेशन है। इसमें एंटीबॉडी और पोषक तत्व होते हैं। ये बच्चे को संक्रमण और बीमारियों से बचाते हैं। जन्म के पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध देना जरूरी है। इसे एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कहते हैं। पैकेट या बोतल का दूध इसकी जगह नहीं ले सकता।
दूध स्टोर करने का विकल्प भी है
एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर मां सीधे स्तनपान नहीं करा सकती तो दूध निकालकर स्टोर किया जा सकता है। सामान्य तापमान पर ब्रेस्ट मिल्क करीब 6 घंटे तक सुरक्षित रहता है। इसे साफ बर्तन या कप से बच्चे को पिलाया जा सकता है। यह विकल्प काम करने वाली माताओं के लिए खासतौर पर उपयोगी है। ऑफिस जाने से पहले दूध निकालकर रखें। घर में बच्चे की देखभाल करने वाला यह दूध पिला सकता है।
सही तरीके से स्तनपान कराएं
कई कामकाजी महिलाएं को स्तनपान के दौरान कमर, पीठ और कंधों में दर्द होता है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना इसकी वजह है। तकिए का सहारा लेने से शरीर पर दबाव कम पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चे को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान कराना बेहतर है। हर बार के बाद निप्पल को गुनगुने पानी से साफ करना जरूरी है। इससे संक्रमण का खतरा कम रहता है। बच्चे के रोते ही तुरंत दूध न पिलाएं। एक नियमित अंतराल बनाए रखें।
इससे मां और बच्चे दोनों को फायदा होता है। MP में यह गिरावट सिर्फ आंकड़ा नहीं है। लाखों बच्चों की सेहत का सवाल है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को काम करने वाली माताओं के लिए विशेष सुविधाएं देनी होंगी। अस्पतालों में स्तनपान परामर्श केंद्र और ऑफिस में ब्रेस्टफीडिंग रूम इस दिशा में जरूरी कदम हैं।
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