एमपी बजट 2027-28: सड़क से उद्योग तक, अब हर खर्च का होगा ग्रीन हिसाब
समझें क्या है पूरा मामला
- एमपी सरकार ग्रीन बजट लाने की तैयारी में है।
- 2027-28 के बजट में बदलाव किया जाएगा।
- विभागों के पर्यावरणीय खर्च अलग चिन्हित होंगे।
- जल, ऊर्जा और प्रदूषण योजनाएं शामिल होंगी।
- बजट में अलग हेड या बुकलेट संभव है।
मध्यप्रदेश में बजट बनाने का तरीका अब थोड़ा बदलने की तैयारी है। 2027-28 के बजट में सरकार सिर्फ यह बताने तक सीमित नहीं रहना चाहती कि किस विभाग को कितना पैसा मिला। पहली बार यह भी सामने लाने की कवायद है कि सरकारी खर्च में पर्यावरण और जलवायु के लिए कितना पैसा जा रहा है। इसी सोच के साथ ग्रीन बजट का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
असली फोकस सिर्फ पर्यावरण विभाग नहीं
ग्रीन बजट का मतलब केवल पर्यावरण विभाग का खर्च अलग दिखाना नहीं होगा। सरकार दूसरे विभागों की उन योजनाओं को भी चिन्हित करने की तैयारी में है, जिनका सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध पर्यावरण संरक्षण से है।
इसमें जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, हरित ऊर्जा, टिकाऊ शहरी विकास और जलवायु अनुकूल अधोसंरचना जैसी योजनाएं शामिल हो सकती हैं।
यानी सड़क, भवन, उद्योग, ऊर्जा या शहरी विकास जैसी बड़ी योजनाओं को भी यह देखा जा सकता है कि उनका पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा।
विभागों से जुटाया जा रहा है खर्च का ब्योरा
सरकार अलग-अलग विभागों में चल रही पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी योजनाओं की जानकारी जुटा रही है। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस खर्च को ग्रीन बजट में शामिल किया जा सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था में मुख्य बजट के भीतर अलग ग्रीन हेड बनाने पर विचार है। इसके अलावा पर्यावरण और जलवायु से जुड़े खर्च की विभागवार जानकारी वाली अलग बुकलेट भी सामने आ सकती है।
MP अपना रास्ता तलाश रहा
ग्रीन बजट की व्यवस्था तैयार करने के लिए विकसित देशों में अपनाए जा रहे मॉडल का अध्ययन किया गया है। अब इन्हें मध्यप्रदेश की जरूरतों और मौजूदा बजट प्रक्रिया के हिसाब से ढालने की कवायद है। इसका मकसद सिर्फ आंकड़े अलग करना नहीं, बल्कि बजट आवंटन में पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को जगह देना है।
ग्रीन बजट से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी योजना का पर्यावरणीय असर क्या है और उसे कम करने के लिए कितने संसाधनों की जरूरत होगी।
बड़े बजट के साथ बढ़ेगी जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश का बजट 2025-26 में करीब 4.21 लाख करोड़ रुपए था, जो 2026-27 में बढ़कर 4.38 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। सरकार ने 2028 तक बजट का आकार 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने का लक्ष्य रखा है।
बजट का आकार बढ़ने के साथ पर्यावरण से जुड़े सरकारी खर्च का दायरा भी बढ़ेगा। ऐसे में ग्रीन बजट सरकार को यह बताने का मौका देगा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर कितना जोर दिया जा रहा है।
हिसाब बदलेगा तो प्राथमिकता भी
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा असर सिर्फ बजट की किताब पर नहीं, बल्कि योजनाओं की प्राथमिकता पर पड़ सकता है। अगर किसी परियोजना का पर्यावरणीय नुकसान ज्यादा है तो उसमें सुधार और शमन उपायों के लिए अतिरिक्त प्रावधान किया जा सकता है।
वहीं ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा मिल सकता है, जो विकास के साथ जल, ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों और जलवायु सुरक्षा को मजबूत करती हैं। यानी आने वाले समय में बजट का सवाल सिर्फ कितना पैसा खर्च हुआ? तक सीमित नहीं रहेगा। सवाल यह भी होगा कि उस खर्च से पर्यावरण को क्या मिला? यही बदलाव प्रस्तावित ग्रीन बजट को सामान्य बजट से अलग कर सकता है।
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