एमपी में बस किराया हो सकता है कम, यात्रियों के फीडबैक के बाद सरकार करेगी नए सिरे से समीक्षा
हालांकि अभी किराया कम करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
यात्रियों के फीडबैक के बाद सरकार सक्रिय
मध्य प्रदेश में करीब पांच साल बाद बस किराए (MP Bus Fare) में बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद अलग-अलग जिलों से यात्रियों की परेशानी और बढ़े खर्च को लेकर फीडबैक सामने आया।
जानकारी के मुताबिक जिलों के प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) तक भी बढ़े किराए से जुड़ी बातें पहुंचीं। इसके बाद परिवहन विभाग (MP Transport Department) को किराए की समीक्षा और उसे युक्तियुक्त बनाने की संभावनाओं पर काम करने को कहा गया है।
सरकार की कोशिश है कि बस ऑपरेटरों की लागत भी पूरी हो और यात्रियों पर जरूरत से ज्यादा आर्थिक बोझ भी न पड़े।
1.25 रुपए से बढ़कर 2 रुपए प्रति किलोमीटर हुआ किराया
अगस्त के पहले सप्ताह में सामान्य यात्री बस का किराया 1.25 रुपए प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 2 रुपए प्रति किलोमीटर किया गया था। इसके साथ न्यूनतम किराया भी 7 रुपए से बढ़ाकर 10 रुपए किया गया। इसका असर छोटी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों पर भी पड़ा।
अलग-अलग श्रेणी की बसों के लिए अलग दरें तय की गई हैं। बिना एसी डीलक्स बस में सामान्य किराए से 25 फीसदी ज्यादा किराया रखा गया है। एसी डीलक्स में यह अंतर 50 फीसदी और सुपर लग्जरी एसी बसों में 75 फीसदी तक है।
रोज सफर करने वालों को मिल सकती है राहत
बस किराए (Madhya Pradesh Bus Fare) में किसी भी बदलाव का सबसे ज्यादा असर रोज यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ता है। इनमें विद्यार्थी, मजदूर, छोटे कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने-जाने वाले यात्री शामिल हैं।
ऐसे यात्रियों के लिए रोज कुछ रुपए का अतिरिक्त खर्च भी महीने के बजट पर बड़ा असर डाल सकता है। अब सरकार की समीक्षा में इस पहलू को भी ध्यान में रखे जाने की उम्मीद है। किराया कम होता है तो इसका सीधा फायदा रोज बस से सफर करने वाले यात्रियों को मिलेगा।
बस ऑपरेटरों की लागत भी देखेगी सरकार
किराया समीक्षा में केवल यात्रियों का पक्ष नहीं देखा जाएगा। निजी बस संचालकों की लागत को भी ध्यान में रखा जाएगा। ऑपरेटर लंबे समय से डीजल, बीमा, टोल टैक्स, स्पेयर पार्ट्स और बसों के रखरखाव का खर्च बढ़ने की बात कहते रहे हैं। इसी वजह से किराया बढ़ाने की मांग भी की गई थी।
अब परिवहन विभाग यात्रियों की सुविधा और ऑपरेटरों की वास्तविक लागत के बीच संतुलन तलाश सकता है। इसके लिए बस संचालकों और संबंधित संगठनों से भी जानकारी ली जा सकती है।
अभी तय नहीं हुआ नया किराया
फिलहाल सरकार ने कोई नई किराया (Bus Fare) दर तय नहीं की है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि बस किराया कितना कम होगा या कब से नई दर लागू होगी। अभी विभाग को मौजूदा किराया व्यवस्था की समीक्षा करनी है। परीक्षण के बाद ही साफ होगा कि किराए में बदलाव की जरूरत है या नहीं।
यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि बढ़े किराए पर सरकार ने दोबारा विचार शुरू कर दिया है।
सरकारी बस सेवाओं से भी बढ़ेंगे विकल्प
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भी काम हो रहा है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस जैसी योजनाओं से यात्रियों को आने वाले समय में और विकल्प मिल सकते हैं।
अगर कम किराए पर बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होता है तो यात्रियों की निजी बसों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे परिवहन सेवाओं में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
यात्रियों को बेहतर सेवा और उचित किराया मिले, सरकार की समीक्षा का फोकस इसी संतुलन पर रहने की उम्मीद है।