मध्य प्रदेश में 7 अगस्त से बसें बंद, नई नीति के विरोध में बस ऑनर्स करेंगे हड़ताल
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में 7 अगस्त से बसों का पहिया थमेगा।
- नई परिवहन नीति के विरोध में बस संचालकों की हड़ताल।
- जबलपुर में 500 से ज्यादा बसें रहेंगी बंद।
- रात 12 बजे से शुरू होगी अनिश्चितकालीन बस हड़ताल।
- नई नीति वापस लेने की मांग पर अड़े ऑपरेटर।
7 अगस्त की रात से एमपी में बसें बंद रहेंगी। यह हड़ताल नई स्टेज कैरिज परिवहन नीति के विरोध में है। बस ओनर्स एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। जबलपुर सहित प्रदेश की 500 से अधिक बसें प्रभावित होंगी। इससे कई जिलों के यात्रियों को परेशानी होगी।
रात 12 बजे से शुरू होगी हड़ताल
मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने प्रदेशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल शुक्रवार रात 12 बजे से शुरू होगी। बस संचालक नई परिवहन नीति का विरोध कर रहे हैं।
आपरेटर्स ने पहले ही शासन को इस बारे में सूचना दे दी थी। उन्होंने कहा था कि मांगें न मानी गईं तो बसें पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।
संचालकों का क्या है कहना
बस संचालकों का कहना है कि नई नीति निजी बस व्यवसाय को खत्म कर देगी। उनके अनुसार इससे हजारों लोगों का रोजगार खतरे में पड़ जाएगा। संचालकों ने कई बार शासन के सामने अपनी बात रखी थी।
हालांकि, अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इसी वजह से मजबूरी में हड़ताल का फैसला लिया गया है। संचालकों ने कहा है कि यात्रियों की परेशानी की जिम्मेदारी शासन की होगी।
जबलपुर और महाकौशल में बड़ा असर
जबलपुर से हर दिन 500 से अधिक बसें चलती हैं। हड़ताल के कारण जबलपुर के साथ आसपास के जिले भी प्रभावित होंगे। इनमें मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, कटनी, दमोह, सिवनी, नरसिंहपुर और सागर शामिल हैं।
भोपाल, इंदौर और रीवा जैसे शहरों के लिए भी बस सेवाएं बाधित होंगी। बड़ी संख्या में यात्रियों को दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है।
बस ऑपरेटर एसोसिएशन के सचिव संजय शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह हड़ताल स्टेट कैरिज परिवहन नीति के खिलाफ हो रही है।
ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें...
बस संचालकों ने अपनी मांगों की सूची भी सामने रखी है। सबसे पहली मांग है कि 7 जुलाई 2026 को जारी नई परिवहन नीति तुरंत वापस ली जाए।
संचालकों का कहना है कि डीजल और स्पेयर पार्ट्स के दाम बढ़े हैं। इसलिए बस किराए में तुरंत बढ़ोतरी की जानी चाहिए। साथ ही 6 जुलाई 2026 को जारी टेंडर भी रद्द करने की मांग है।
संचालकों ने करीब 1200 नई बसों के पंजीयन का रास्ता साफ करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि पहले से पंजीकृत बसों पर हो रही कार्रवाई भी रोकी जाए।
एक और बड़ी मांग बसों की उम्र सीमा को लेकर है। संचालक चाहते हैं कि 15 साल की सीमा हटाकर फिटनेस के आधार पर परमिट दिए जाएं।
इसके अलावा परमिट नवीनीकरण और ट्रांसफर जैसे लंबित कामों को जल्द निपटाने की मांग भी की गई है। अंतरराज्यीय मार्गों के परमिट जल्द स्वीकृत करने की मांग भी शामिल है।
यात्रियों को होगी परेशानी
एमपी में बस हड़ताल शुरू होते ही प्रदेश के कई हिस्सों में यात्री परिवहन प्रभावित होगा। खासकर उन जिलों में असर ज्यादा दिखेगा जहां निजी बसों पर निर्भरता अधिक है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि हड़ताल कितने दिन चलेगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
प्रमोशन में आरक्षण: सरकार के डाटा पर सामान्य वर्ग खड़े करेगा सवाल
समग्र पोर्टल पर सेंधमारी का मामला विधानसभा पहुंचा, अब तीसरी वेबसाइट का खुलासा
कांग्रेस नेता अनवर कादरी गिरफ्तार, फर्जी बंदूक लाइसेंस समेत 27 मामलों में आरोपी
अवैध खनन पर कोर्ट का बड़ा एक्शन, कलेक्टर करेंगे निगरानी, ड्रोन से होगा सर्वे