प्रमोशन में आरक्षण: सरकार के डाटा पर सामान्य वर्ग खड़े करेगा सवाल
Neel Tiwari | Aug 06, 2026, 16:02 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही है। 'द सूत्र' को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी में सामने आया है कि सामान्य वर्ग सरकार के दावों पर बड़े सवाल उठाने की तैयारी में है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
- सरकार ने कोर्ट के निर्देश पर नया क्वांटिफिएबल डाटा पेश किया है।
- सामान्य वर्ग इस डाटा को गलत और अधूरा बता रहा है।
- विवाद का सबसे बड़ा केंद्र X और Y फैक्टर बने हुए हैं।
- हाईकोर्ट ने फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार करने को कहा है।
कोर्ट ने सरकार और सभी पक्षों से कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग करें। इसके बाद ही हाईकोर्ट में मामले पर आगे बहस होगी।
हालांकि अदालत में सुनवाई भले रुकी हो, लेकिन कानूनी तैयारी लगातार जारी है। द सूत्र को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी बताती है कि अगली सुनवाई में सरकार के डाटा पर बड़ा विवाद खड़ा होने वाला है।
सरकार के डाटा पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
सामान्य वर्ग का कहना है कि जब प्रतिनिधित्व पर्याप्त है, तब अतिरिक्त आरक्षण का आधार क्या है। यही सवाल अदालत के सामने रखा जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि कई विभागों के आंकड़ों को उदाहरण के रूप में पेश करने की तैयारी भी की गई है।
X और Y फैक्टर पर क्यों टिका है पूरा विवाद?
प्रमोशन के आरक्षण नियमों के अनुसार SC वर्ग के लिए आरक्षण का फार्मूला है:
आरक्षित पद = कुल पद × (16 × X) ÷ 100
ST वर्ग के लिए फार्मूला है:
आरक्षित पद = कुल पद × (20 × Y) ÷ 100
यदि X या Y का मान 1 रखा जाता है, तो पूरा आरक्षण लागू होता है। यदि मान कम होता है, तो आरक्षण का प्रतिशत भी घट जाता है।
सामान्य वर्ग का आरोप है कि कई विभागों में प्रतिनिधित्व अधिक होने के बावजूद X और Y को कम नहीं किया गया। यही कारण है कि अगली सुनवाई में सबसे ज्यादा बहस इसी मुद्दे पर होनी है।
promotion-reservation
सामान्य वर्ग की अगली रणनीति क्या होगी?
सामान्य वर्ग यह भी तर्क रखेगा कि यदि प्रतिनिधित्व का सही आकलन किया जाता, तो कई जगह आरक्षण का प्रतिशत कम होना चाहिए था। याचिकाकर्ता सामान्य पक्ष का मानना है कि इससे सामान्य वर्ग के लिए उपलब्ध पदों की संख्या प्रभावित हुई है।
प्रशासनिक दक्षता पर भी होगी बड़ी बहस
पांच साल तक एक ही फार्मूला लागू रखने पर आपत्ति
उनका कहना है कि प्रतिनिधित्व की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर लंबे समय तक निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता। यह मुद्दा भी अगली सुनवाई में अहम रह सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर
द सूत्र को मिली जानकारी बताती है कि अगली सुनवाई में सरकार के डाटा, X-Y फैक्टर और प्रशासनिक दक्षता के दावों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। यह मामला सिर्फ प्रमोशन का नहीं है। इसका असर हजारों सरकारी कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
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