सुगम परिवहन को कैबिनेट से मंजूरी, 25 सितंबर से सड़कों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें

Jitendra Shrivastava | Sept 15, 2026, 16:51 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने उज्जैन, चंदेरी और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शिक्षा, परिवहन और उद्यानिकी के लिए 37.55 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। जानें कैबिनेट के सभी बड़े फैसले।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • एमपी कैबिनेट ने सिंचाई परियोजनाओं को दी बड़ी मंजूरी।
  • उज्जैन-सिंगरौली में खेतों तक पहुंचेगा अब सीधा पानी।
  • शिक्षा-परिवहन पर सरकार ने खोला बजट का पिटारा।
  • किसानों के लिए कैबिनेट का बड़ा और राहत भरा फैसला।
  • मऊगंज-मैहर में खनिज कार्यालय को मिलेंगे नए पद।

भोपाल में मध्यप्रदेश कैबिनेट की बैठक हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक की अध्यक्षता की। कैबिनेट ने उज्जैन, चंदेरी और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी।



शिक्षा, परिवहन और उद्यानिकी के लिए 37.55 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत हुए। तीन नए जिलों में खनिज कार्यालय के लिए भी नए पद मंजूर किए गए।



सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी

भोपाल स्थित मंत्रालय में कैबिनेट बैठक हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसकी अध्यक्षता की। बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पाटिल ने जानकारी दी।



मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन, चंदेरी और सिंगरौली के लिए सिंचाई परियोजना मंजूर हुई है। इसके साथ शिक्षा, परिवहन और उद्यानिकी योजनाओं के लिए 37.55 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।



तीन परियोजनाओं पर 13 हजार करोड़

मंत्री पाटिल ने बताया कि तीन सिंचाई परियोजनाओं पर 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। इनमें उज्जैन की चिंतावत वृहद सिंचाई परियोजना शामिल है। सिंगरौली की गौण वृहद सिंचाई परियोजना भी इसमें है।



चंदेरी की माइक्रो सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं से हजारों किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। खेतों तक पानी पहुंचना आसान होगा। इससे फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।



42 हजार करोड़ की मंजूरी

प्रदेश के विकास के लिए 42 हजार 490 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। यह राशि अलग-अलग विभागों की योजनाओं के लिए है। समग्र शिक्षा विभाग की योजनाओं के लिए 36 हजार करोड़ से ज्यादा मंजूर हुए हैं।



यह राशि योजनाओं की निरंतरता के लिए दी गई है। इससे स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। परिवहन विभाग की 11 योजनाओं के लिए 1066 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। उद्यानिकी विभाग की आठ योजनाओं के लिए 491 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इससे किसानों और बागवानी क्षेत्र को फायदा मिलेगा।



  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़े कई फैसले लिए गए। सरकार ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए करीब 42 हजार 490 करोड़ रुपए मंजूर किए।
  • मुख्यमंत्री की हालिया दुबई यात्रा के दौरान प्रदेश को 53 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले। इन प्रस्तावों से मध्यप्रदेश में उद्योग और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
  • बैठक में छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत जोबट-टांडा रोड रेलखंड का लोकार्पण किया गया है। इससे धार का गुजरात से सीधा रेल संपर्क बन गया है। मंत्रिपरिषद ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
  • मंत्रिपरिषद ने भारतीय खिलाड़ियों और टीमों को भी बधाई दी। क्रिकेट और हॉकी समेत कई खेलों में भारतीय टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। इन टीमों में शामिल मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने भी राज्य का गौरव बढ़ाया है।
  • केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को मध्यप्रदेश में तेजी से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में योजना के काम को आगे बढ़ाया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को इंदौर से नई योजना शुरू होगी। इसका नाम ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना’ रखा गया है। योजना के जरिए लोगों को संपत्ति से जुड़े अधिकारों का रिकॉर्ड मिलेगा।
  • प्रदेश में 25 सितंबर 2026 से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू होगी। इसके तहत करीब 150 सिटी रूट विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा 450 इंटरसिटी रूट भी बनाए जाएंगे। राज्य को दूसरे प्रदेशों से जोड़ने के लिए 436 अंतरराज्यीय रूट तैयार होंगे।

नए जिलों में नए पद

मंत्री पाटिल ने बताया कि तीन नए जिलों में खनिज कार्यालय के लिए नए पद मंजूर हुए हैं। ये जिले हैं मऊगंज (Mauganj), मैहर (Maihar) और पांढुर्णा (Pandhurna)। इन जिलों में अब खनिज कार्यालय का काम आसान होगा।



इसके अलावा कैबिनेट ने एक और फैसला लिया। साख सीमा विपणन 2024-25 को ब्याज मुक्त करने का फैसला हुआ है। इससे किसानों को कर्ज पर राहत मिलेगी।



किसानों को क्या फायदा होगा

सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। उज्जैन, चंदेरी और सिंगरौली के खेतों में पानी पहुंचेगा। इससे खेती की पैदावार बढ़ सकती है।



साख सीमा को ब्याज मुक्त करने से भी किसानों को राहत मिलेगी। वे बिना ब्याज के कर्ज ले सकेंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।



शिक्षा-परिवहन पर जोर

सरकार ने शिक्षा पर सबसे ज्यादा राशि खर्च करने का फैसला किया है। 36 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा सिर्फ समग्र शिक्षा के लिए हैं। इससे स्कूलों की सुविधाएं बेहतर होंगी।



परिवहन विभाग को भी 1066 करोड़ रुपए मिले हैं। इससे सड़क और परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा। उद्यानिकी विभाग को 491 करोड़ रुपए मिले हैं, जिससे बागवानी को बढ़ावा मिलेगा।



क्यों अहम है यह फैसला

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर है। सिंचाई की सुविधा बढ़ने से खेती को सीधा फायदा मिलता है। सरकार का यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।



बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च होना भी अहम संकेत है। इससे साफ है कि सरकार स्कूली शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। परिवहन और उद्यानिकी पर भी ध्यान दिया गया है।



आगे क्या होगा

अब इन परियोजनाओं पर काम शुरू होगा। सिंचाई परियोजनाओं को पूरा होने में समय लग सकता है। संबंधित विभाग जल्द काम शुरू करेंगे।



नए जिलों में खनिज कार्यालय भी जल्द काम शुरू करेंगे। इससे स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में और फैसले भी लिए जा सकते हैं।



मुख्य आंकड़ों पर एक नजर

इस कैबिनेट बैठक में कुल मिलाकर 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि पर फैसले हुए। सिंचाई परियोजनाओं पर अकेले 13 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। समग्र शिक्षा को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जो 36 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है।



परिवहन और उद्यानिकी विभागों को भी अलग-अलग राशि दी गई है। परिवहन की 11 योजनाओं के लिए 1066 करोड़ रुपए तय हुए हैं। उद्यानिकी की आठ योजनाओं के लिए 491 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं।



प्रशासनिक फैसलों का असर

नवगठित जिलों में प्रशासनिक ढांचा मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता रही है। मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा पहले बड़े जिलों का हिस्सा थे। अब यहां अलग से खनिज कार्यालय होने से स्थानीय कामकाज आसान होगा।



खनिज संसाधनों से जुड़े मामलों में अब कम समय लगेगा। स्थानीय लोगों को बार-बार दूसरे जिले नहीं जाना पड़ेगा। इससे प्रशासनिक दूरी भी कम होगी।



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