MP में कैंसर का कहर: हर दिन 133 की मौत, 80 हजार से ज्यादा मिले नए मरीज
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में कैंसर के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
- 2025 में 88,297 नए कैंसर मामले सामने आए हैं।
- इसी साल कैंसर से 48,694 मौतें हुई हैं।
- नए मरीजों में एमपी देश के टॉप 10 राज्यों में है।
- मौतों के मामले में एमपी देश में 7वें नंबर पर है।
पांच साल का बढ़ता आंकड़ा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोकसभा में कैंसर से जुड़े आंकड़े पेश किए हैं। इनके मुताबिक मध्य प्रदेश में 2021 में कैंसर के अनुमानित 79 हजार 871 मामले थे। यह संख्या 2025 में बढ़कर 88 हजार 297 हो गई है। यानी पांच साल में करीब आठ हजार 400 नए मामले बढ़े हैं।
इसी दौरान मौतों का आंकड़ा भी लगातार ऊपर गया है। 2021 में प्रदेश में 44 हजार 056 मौतें दर्ज हुई थीं। 2025 में यह संख्या बढ़कर 48 हजार 694 हो गई है। यानी पांच साल में करीब चार हजार 600 मौतें ज्यादा हुई हैं। मामलों और मौतों दोनों में करीब 10.5% की बढ़ोतरी देखी गई है।
रोज कितनी मौतें
यदि 2025 के आंकड़े को दिनों में बांटा जाए तो तस्वीर और साफ हो जाती है। साल भर में हुई 48 हजार 694 मौतों का मतलब है कि हर दिन औसतन 133 लोगों की जान गई। यह आंकड़ा दिखाता है कि कैंसर अब प्रदेश में कितनी बड़ी सेहत चुनौती बन चुका है। हर दिन इतनी बड़ी संख्या में मौतें होना गंभीर चिंता का विषय है। यही वजह है कि विशेषज्ञ जल्द जांच और समय पर इलाज पर जोर दे रहे हैं।
दूसरे राज्यों से तुलना
नए मरीजों के मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति भी चिंताजनक है। 2025 में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दो लाख 26 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु का नंबर आता है। मध्य प्रदेश में 88 हजार 297 मामले दर्ज हुए हैं। यह संख्या राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश से भी ज्यादा है। सिर्फ कुल मामलों की संख्या देखें तो एमपी देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है। मौतों के मामले में भी एमपी की स्थिति ठीक नहीं है। 2025 में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा एक लाख 25 हजार 184 मौतें दर्ज हुईं। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और कर्नाटक का नंबर आता है। मध्य प्रदेश इस सूची में 7वें नंबर पर है। यहां मौतों का आंकड़ा राजस्थान और गुजरात से भी ज्यादा है।
कौन से कैंसर सबसे खतरनाक
दुनियाभर में कुछ कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा माने जाते हैं। WHO (World Health Organisation) के मुताबिक लंग कैंसर से दुनिया में हर साल 18 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में इससे हर साल करीब 70 हजार मौतें होती हैं। ब्रेस्ट कैंसर से दुनिया में हर साल छह लाख 70 हजार मौतें होती हैं।
भारत में यह आंकड़ा करीब 90 हजार सालाना है। पैंक्रियाटिक कैंसर से दुनिया में चार लाख 60 हजार और भारत में 13 हजार मौतें होती हैं। लिवर कैंसर से दुनिया में आठ लाख 30 हजार और भारत में 34 हजार मौतें दर्ज होती हैं। कोलोन कैंसर से दुनिया में हर साल नौ लाख और भारत में करीब 35 हजार मौतें होती हैं।
स्क्रीनिंग पर सरकार का जोर
प्रदेश में समय पर पहचान के लिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। 2025 में मध्य प्रदेश में करीब 87 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इसमें ओरल कैंसर की जांच सबसे ज्यादा 51 लाख लोगों की हुई। स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग 25 लाख लोगों की की गई। सर्वाइकल कैंसर की जांच वीआईए (Visual Inspection with Acetic acid) तकनीक से 11 लाख लोगों की हुई। इस स्क्रीनिंग में 30 से 65 साल की उम्र के लोगों को शामिल किया गया।
इलाज के लिए कहां जाएं
प्रदेश में कैंसर के इलाज के लिए बड़े सरकारी अस्पताल कुछ ही शहरों में हैं। भोपाल में एम्स यानी AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) में सर्जिकल, मेडिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की अलग सुविधाएं हैं। इसके अलावा गांधी मेडिकल कॉलेज के हमीदिया अस्पताल में भी कैंसर मरीजों के लिए विशेष ओपीडी और कीमोथेरेपी की व्यवस्था है। इंदौर में शासकीय कैंसर अस्पताल एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाय अस्पताल से जुड़ा हुआ है।
यहां रियायती दरों पर कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी मिलती है। ग्वालियर में कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट को भारत सरकार से रीजनल कैंसर सेंटर की मान्यता मिली है। यहां बोन मैरो और पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी जैसी सुविधाएं भी हैं।
जबलपुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज महाकौशल क्षेत्र के मरीजों के लिए प्रमुख केंद्र है। रीवा में श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के संजय गांधी अस्पताल में भी कैंसर केयर यूनिट है। इससे विंध्य क्षेत्र के मरीजों को मुंबई या नागपुर नहीं जाना पड़ता।
समय पर जांच क्यों जरूरी
कैंसर का इलाज बीमारी के प्रकार और उसकी स्टेज पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज में बीमारी पकड़ में आने पर कई तरह के कैंसर का इलाज ज्यादा असरदार होता है। इसलिए शरीर में लंबे समय से दिख रहे असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर डॉक्टर के पास जांच कराना जान बचा सकता है। बढ़ते आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं। इनके पीछे हजारों परिवार हैं, जिन पर बीमारी का आर्थिक और मानसिक असर पड़ता है। इसलिए बेहतर स्क्रीनिंग और इलाज सुविधाओं को हर इलाके तक पहुंचाना सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
यह खबर क्यों जरूरी है
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बढ़ते आंकड़े सीधे इसी अधिकार से जुड़ते हैं। जनता को सही और सटीक स्वास्थ्य आंकड़े जानने का पूरा हक है। सरकारी आंकड़ों की जानकारी लोगों को समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित कर सकती है।
यह खबर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इलाज सुविधाओं की कमी को भी उजागर करती है। बेहतर सरकारी नीतियां और जागरूकता अभियान इस समस्या को कम कर सकते हैं। इसलिए यह खबर सिर्फ आंकड़ों की जानकारी नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में 2025 में कैंसर के कितने नए मामले सामने आए हैं?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में मध्य प्रदेश में कैंसर के 88,297 नए मामले सामने आए। यह संख्या 2021 के मुकाबले करीब 8,400 ज्यादा है। नए मरीजों के मामले में एमपी देश के टॉप 10 राज्यों में है। - मध्य प्रदेश में कैंसर से रोजाना कितनी मौतें होती हैं?
2025 में मध्य प्रदेश में कैंसर से कुल 48,694 मौतें हुईं। इस हिसाब से हर दिन औसतन करीब 133 लोगों की मौत कैंसर से होती है। मौतों के मामले में एमपी देश में 7वें नंबर पर है। - एमपी में कैंसर के इलाज के लिए कौन से बड़े सरकारी अस्पताल हैं?
भोपाल में एम्स और हमीदिया अस्पताल, इंदौर में शासकीय कैंसर अस्पताल, ग्वालियर में कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट प्रमुख केंद्र हैं। इसके अलावा जबलपुर के NSCB मेडिकल कॉलेज और रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भी कैंसर इलाज की सुविधा है।
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