MP में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 66% पद खाली, हर महीने होगी सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
Amresh Kushwaha | Aug 20, 2026, 07:58 IST
एमपी के सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5443 पदों में से 3571 यानी 66% पद खाली हैं। सरकार ने अब हर महीने एमपी ऑनलाइन से सीधी भर्ती की नई व्यवस्था लागू की है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के हजारों पद खाली हैं।
- कुल 5443 स्वीकृत पदों में से 3571 पद खाली हैं।
- यह कुल पदों का करीब 66% हिस्सा है।
- सरकार ने अब भर्ती का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
- अब हर महीने एमपी ऑनलाइन से आवेदन लेकर सीधी भर्ती होगी।
क्यों बदली भर्ती व्यवस्था
इसी वजह से सरकार ने भर्ती का तरीका बदलने का फैसला किया। पहले हर भर्ती के लिए मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC (Madhya Pradesh Public Service Commission) का इंतजार करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। कई बार पूरी भर्ती में महीनों निकल जाते थे। अब यह लंबा इंतजार खत्म हो गया है।
एमपी के सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
हर महीने होगी सीधी भर्ती
इसके बाद 15 तारीख तक डॉक्टर आवेदन कर सकेंगे। इससे भर्ती की प्रक्रिया काफी तेज होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस तरीके से खाली पद जल्दी भरेंगे। मरीजों को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
एमपी के सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
कैसे होगा चयन
इसके अलावा SC/ST (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) वर्ग से नामांकित सदस्य भी रहेंगे। यह समिति सभी आवेदनों की बारीकी से जांच करेगी। इसके बाद साक्षात्कार लिया जाएगा और मेरिट सूची बनाई जाएगी। साथ ही उम्मीदवारों के मूल दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा।
एमपी के सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
तीन साल तक तबादला नहीं
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के अस्पतालों को भी इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अक्सर देखा गया है कि दूर के अस्पतालों में डॉक्टर टिकते नहीं थे। इस नए नियम से यह समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।
पहले की भर्ती में क्या हुआ
एमपी के सरकारी अस्पतालों में सीधी भर्ती
आंकड़ों में गड़बड़ी क्यों
मानसिक रोग विभाग में भी यही अंतर दिखता है। यहां 39 पद स्वीकृत हैं और कोई भी डॉक्टर कार्यरत नहीं है। फिर भी आदेश में 50 पद खाली बताए गए हैं। चर्म रोग विभाग में भी समस्या नजर आती है। यहां 54 पद स्वीकृत हैं और 23 डॉक्टर पहले से काम कर रहे हैं। इस हिसाब से 31 पद खाली होने चाहिए। लेकिन आदेश में 68 रिक्तियां दिखाई गई हैं।
आदेश में यह भी साफ नहीं है कि डॉक्टरों का प्रोरेटा किस आधार पर तय होगा। इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि सभी विशेषज्ञताओं को जोड़ने पर कुल आंकड़ा सही निकलता है। कुल 3571 पद खाली होने की बात पूरी तरह सही पाई गई है। इससे साफ है कि विभाग स्तर के आंकड़ों में ही गड़बड़ी है।
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