एमपी में कैंसर मरीजों को मिलेगी राहत, 4 शहरों में लगेंगी लीनियर एक्सीलेरेटर मशीनें
News in Short
- मध्यप्रदेश सरकार ने 4 शहरों में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीनें लगाने का ऐलान किया।
- यह मशीन कैंसर इलाज में सटीकता बढ़ाएगी और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं होगा।
- मशीनें सरकारी अस्पतालों में सस्ती कीमत पर उपलब्ध होंगी।
- यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त होगी।
- यह सुविधा अगले साल मार्च तक शुरू हो जाएगी, जिससे मरीजों को राहत मिलेगी।
News in Detail
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीनें लगाने का ऐलान किया है। इन मशीनों से कैंसर इलाज में सटीकता बढ़ेगी। मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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लीनियर एक्सीलेटर मशीन क्या है?
लीनियर एक्सीलेरेटर (LINAC) एक अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी मशीन है। इसका उपयोग कैंसर के इलाज में किया जाता है। यह मशीन उच्च-ऊर्जा वाली एक्स-रे या इलेक्ट्रॉन किरणों का उपयोग करती है। यह ट्यूमर को सटीक रूप से नष्ट करती है। आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं होता। इसका उपयोग विभिन्न अंगों में पाए जाने वाले कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है।
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खरीदी जाएंगी मशीनें
पहले यह प्रस्ताव था कि लीनियर एक्सीलेरेटर मशीनें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड के तहत खरीदी जाएं। लेकिन इस मॉडल में कोई निवेशक नहीं आया। इसके बाद सरकार ने तय किया कि वह खुद इन मशीनों को खरीदेगी और स्थापित करेगी। इसके लिए शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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कैंसर इलाज में सस्ता विकल्प
इन मशीनों के लागू होने से सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों को सस्ता इलाज मिलेगा। निजी अस्पतालों में रेडियोथैरेपी का खर्च 1-1.5 लाख रुपए तक हो सकता है। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क होगी। अन्य मरीजों के लिए शुल्क 15-20% कम होगा। यह निजी अस्पतालों के मुकाबले बहुत सस्ता होगा।
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अगले वर्ष मार्च तक शुरू होगी सुविधा
लीनियर एक्सीलेरेटर मशीनों की जांच प्रक्रिया में करीब एक साल लगेगा। टेंडर प्रक्रिया के बाद मशीनें छह महीने में आएंगी। उसके बाद परीक्षण और स्थापना प्रक्रिया शुरू होगी। इसलिए यह सुविधा अगले वर्ष मार्च तक शुरू होगी।
इन मशीनों से प्रदेश के कैंसर मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा सस्ती और गुणवत्तापूर्ण होगी। इससे मध्यम और निम्न वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।