MP में कुपोषण का डरावना चेहरा: एक गिलास दूध 12 रुपए का और बच्चे का पोषण 8 रुपए में?

Anjali Dwivedi | May 09, 2026, 18:47 IST
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मध्यप्रदेश में सरकार बच्चों के पोषण पर मात्र 8 रुपए खर्च कर रही है। 2017 से अटकी दरों के कारण इंदौर और भोपाल समेत चार संभागों में 5 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं और मौतें भी बढ़ रही हैं।

एमपी में कुपोषण के खिलाफ चल रही जंग पर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में एक बच्चे के पोषण के लिए सरकार मात्र 8 रुपए प्रतिदिन खर्च कर रही है। आज के दौर में जब एक गिलास दूध की कीमत 12 रुपए है, वहां 8 रुपए पर्याप्त नहीं हैं। यह दर साल 2017 में तय की गई थी। इसमें तब से अब कोई बदलाव नहीं हुआ है।



चार संभागों में 5 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित

जमीनी आंकड़े सरकार के कुपोषण मुक्त मध्य प्रदेश के दावों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर संभाग में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक और डरावनी बनी हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, इन चार बड़े क्षेत्रों में 5.10 लाख कुपोषित बच्चे पाए गए हैं। इनमें से करीब 1.05 लाख बच्चे तो अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में शामिल हैं।



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5 साल में 4600 बच्चों की मौत का अनुमान

कुपोषण का सबसे दर्दनाक पहलू मासूम बच्चों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला बना हुआ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन चार संभागों में पिछले पांच सालों में 3 हजार 500 से 4 हजार 600 मौतें हुई हैं। ये मौतें सीधे कुपोषण या उससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण समय से पहले हुई हैं। वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि मौतों का कारण अक्सर कुपोषण नहीं लिखा जाता है।



4 संभागों में कुपोषण संकट का पूरा हाल

संभागकुपोषित बच्चेगंभीर कुपोषितअनुमानित मौतें (5 साल)
इंदौर1.10 लाख22 हजार800 से 1000
भोपाल1.35 लाख28 हजार900 से 1200
जबलपुर1.20 लाख25 हजार850 से 1100
ग्वालियर1.45 लाख30 हजार1000 से 1300
कुल5.10 लाख1.05 लाख3500 से 4600

भोजन की कमी और दूषित पानी

कुपोषण अब केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि एक डबल क्राइसिस का रूप ले चुका है। शहरों में दूषित पानी और खराब स्वास्थ्य सुविधाएं इस समस्या को और अधिक बढ़ा रही हैं। इंदौर-भोपाल जैसे शहरों में गंदा पानी, डायरिया और संक्रमण बच्चों को तेजी से बीमार कर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई अनियमित है और टेक-होम राशन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।





बच्चे के पोषण खर्च में MP सबसे पीछे

कुपोषण खत्म करने के बजट के मामले में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों से काफी पीछे है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य एक बच्चे के पोषण पर 20 से 30 खर्च कर रहे हैं। वहां बच्चों के आहार में अंडा और दूध जैसी पौष्टिक चीजें भी शामिल की गई हैं। मध्य प्रदेश में बजट 8 से 10 के बीच सिमटा हुआ है, जो बेहद सीमित है।



मानक बनाम हकीकत

मानक (जरूरी)जमीनी हकीकत (असर)
प्रोटीन: 15-25 ग्राम/दिनप्रोटीन: 8 से 10 ग्राम मात्र
कैलोरी: 1000 से 1500कैलोरी: 400 से 800 मात्र

एक्सपर्ट्स का कहना है कि न्यूनतम संतुलित आहार के लिए 25-40 प्रतिदिन बहुत जरूरी हैं। सरकारी खर्च और वास्तविक जरूरत के बीच वर्तमान में 5 गुना तक का बड़ा अंतर है। यदि समय रहते बजट और नीति में सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट और गहराएगा।



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