एमपी में बढ़ रहे बाल विवाह के मामले, 2020 से 2025 तक दोगुने हुए केस, क्या है वजह
Child marriage case in MP: मध्यप्रदेश से एक बहुत ही चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां पिछले 5 सालों में बाल विवाह के मामले घटने के बजाय दोगुने हो गए हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 में 366 मामले दर्ज हुए थे। साल 2025 तक यह संख्या बढ़कर 538 तक पहुंच गई है। इसका सीधा मतलब है कि एमपी में हर दिन औसतन दो मासूमों का बचपन छीना जा रहा है।
अक्षय तृतीया के मौके पर होने वाली सामूहिक शादियों में ये खतरा और बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि अब हर दिन दो बाल विवाह हो रहे हैं। ये स्थिति बच्चों के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक है। आइए इस गंभीर मुद्दे को डिटेल से समझते हैं।
एमपी में बाल विवाह का मामला
अक्षय तृतीया पर विशेष सतर्कता
20 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का त्योहार है। इस दिन राज्य में बहुत सी सामूहिक शादियां आयोजित होती हैं। अक्सर इन आयोजनों की आड़ में बाल विवाह भी कर दिए जाते हैं। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने 6 अप्रैल को सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए। प्रशासन को इस दिन कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा गया है।
सरकार और प्रशासन की क्या है तैयारी
बता दें कि, बाल विवाह रोकने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान तेज किया गया है। हर जिले में बाल विवाह निषेध अधिकारी (Child Marriage Prohibition Officer) अप्पोइंट किए गए हैं।
प्रशासन अब गांवों में रैलियां और वर्कशॉप्स आयोजित कर रहा है। स्कूल और आंगनवाड़ी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेष टीमें और फ्लाइंग स्क्वाड हर ब्लॉक में तैनात किए गए हैं।
गांवों में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की लिस्ट बनेगी। उनके माता-पिता की काउंसलिंग की जाएगी और उन पर नजर रहेगी। सरकार ने कहा है कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
संविधान और कानून क्या कहता है
भारत में बाल विवाह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त सजा का प्रावधान है। लड़कियों के लिए शादी की उम्र 18 और लड़कों के लिए 21 साल है।
अगर कोई इस कानून को तोड़ता है, तो उसे जेल हो सकती है। बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता और पंडित को भी सजा मिलेगी। दोषी को 2 साल की जेल और 1 लाख तक जुर्माना हो सकता है। ये कानून बच्चों के फिजिकल और मेन्टल हेल्थ की रक्षा करता है।
बाल विवाह की शिकायत कहां करें
यदि आपको कहीं भी बाल विवाह होने की जानकारी मिलती है, तो तुरंत मदद लें। आप 181, 1098 (Childline) या 112 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा, Child Marriage Free India पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
शिक्षा ही बाल विवाह (child marriage prohibition act) को रोकने का सबसे मजबूत हथियार है। लड़कियों को शिक्षित करने से वे अपने हक (child marriage law) के लिए लड़ सकेंगी। समाज को मिलकर इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करना होगा।
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