मध्य प्रदेश में नहीं थम रहा बाल विवाह, हर 5वीं बेटी की कम उम्र में हो रही शादी

Amresh Kushwaha | Aug 29, 2026, 10:55 IST
मध्य प्रदेश में बाल विवाह की खौफनाक तस्वीर
मध्य प्रदेश में बाल विवाह की गंभीर स्थिति बनी हुई है। NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार राज्य की हर 5वीं बेटी की शादी बालिग होने से पहले हो रही है। आगर मालवा में सबसे अधिक 49.4% बाल विवाह दर्ज किए गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में बाल विवाह की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।
  • एनएफएचएस-6 रिपोर्ट में जिलेवार आंकड़े सामने आए हैं।
  • आगर मालवा में हर दूसरी महिला की शादी 18 साल से पहले हुई।
  • प्रदेश में औसतन हर पांचवीं बेटी की शादी बालिग होने से पहले हुई।
  • कुछ जिलों में सुधार हुआ है, तो कुछ में हालात बिगड़े हैं।

मध्यप्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए सालों से प्रयास हो रहे हैं। इसके बावजूद कई जिलों में हालात अब भी चिंताजनक हैं। एनएफएचएस-6 यानी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा फैक्टशीट में यह तस्वीर सामने आई है। सबसे खराब हालत आगर मालवा जिले की है।



हर 5वीं बेटी की शादी जल्दी

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 20 से 24 साल की उम्र की महिलाओं में से 20 फीसदी की शादी 18 साल से पहले हो चुकी थी। यानी हर पांच में से एक महिला की शादी बालिग होने से पहले हुई। हालांकि पिछले सर्वे से तुलना करें तो थोड़ी राहत भी है। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 23.1 फीसदी था। अब यह घटकर 20 फीसदी रह गया है। यानी राज्य स्तर पर 3.1 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज हुई है।



मध्य प्रदेश में नहीं थम रहा बाल विवाह


आगर मालवा में सबसे बुरा हाल

सबसे चिंताजनक तस्वीर आगर मालवा जिले की है। यहां 20 से 24 साल की 49.4 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र से पहले हुई। यानी इस उम्र वर्ग की करीब आधी शादियां बालिग होने से पहले हुईं। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 35.6 फीसदी था। पांच साल में यह बढ़कर 49.4 फीसदी हो गया। यह 13.8 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी है। प्रदेश के सभी जिलों में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।



टॉप-5 बिगड़े जिले

आगर मालवा के अलावा चार और जिलों में भी बाल विवाह का आंकड़ा बढ़ा है। हरदा में यह अनुपात 10 फीसदी से बढ़कर 20.8 फीसदी हो गया। यानी यहां आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। खंडवा में यह आंकड़ा 10.8 से बढ़कर 16.9 फीसदी हुआ। सतना में 12.9 से बढ़कर 18.4 फीसदी दर्ज हुआ। बैतूल में यह 11.2 से बढ़कर 16.2 फीसदी हो गया। इन पांचों जिलों में पिछले पांच साल में स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है।



मध्य प्रदेश में नहीं थम रहा बाल विवाह


टॉप-5 सुधरे जिले

कुछ जिलों में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार भी हुआ है। राजगढ़ में सबसे बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। छतरपुर, श्योपुर, रीवा और इंदौर में भी अच्छी गिरावट देखी गई। इन जिलों में बाल विवाह के आंकड़ों में दस से तेईस प्रतिशत अंक तक की कमी आई है। यह दिखाता है कि सही प्रयासों से बदलाव संभव है।



राजगढ़ में सबसे बड़ा सुधार

राजगढ़ जिले में एनएफएचएस-5 के दौरान 46 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई थी। एनएफएचएस-6 में यह घटकर 23 फीसदी रह गई। यानी यहां 23 प्रतिशत अंक की सबसे बड़ी कमी दर्ज हुई। छतरपुर में भी बड़ा सुधार हुआ है। यहां आंकड़ा 39.2 फीसदी से घटकर 22.5 फीसदी हो गया। यह 16.7 प्रतिशत अंक की कमी है। श्योपुर में 39.5 से घटकर 25.3 फीसदी दर्ज हुआ, यानी 14.2 प्रतिशत अंक की गिरावट आई।



मध्य प्रदेश में नहीं थम रहा बाल विवाह


इंदौर और दतिया में भी राहत

बड़े शहरी जिलों में भी सुधार दिखा है। रीवा में 28.2 फीसदी से घटकर 14.9 फीसदी दर्ज हुआ। यह लगभग आधी कमी है। इंदौर में यह आंकड़ा 21.7 से घटकर 10.6 फीसदी हो गया। दतिया में भी 27.7 से घटकर 17 फीसदी दर्ज हुआ। इन जिलों में जागरूकता अभियानों का असर दिख रहा है।



गांव-शहर में बड़ा फर्क

प्रदेश में गांव और शहर के बीच भी साफ अंतर है। एनएफएचएस-6 के मुताबिक शहरी इलाकों में सिर्फ 9 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 23.4 फीसदी है। यानी गांवों में यह समस्या शहरों के मुकाबले करीब ढाई गुना ज्यादा है। यह अंतर बताता है कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।



आंकड़ों की सीमाएं भी जानें

रिपोर्ट में दिए गए जिलेवार आंकड़े 20 से 24 साल की महिलाओं की शादी की उम्र पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें किसी एक साल में दर्ज हुए बाल विवाह के मामलों की संख्या नहीं माना जा सकता। एनएफएचएस-6 की फैक्टशीट के नतीजे फिलहाल प्रोविजनल यानी अस्थायी हैं। रिपोर्ट ने खुद कहा है कि छोटे सैंपल वाले कुछ आंकड़ों की तुलना में सावधानी बरतनी चाहिए।



मध्य प्रदेश में नहीं थम रहा बाल विवाह


आगे क्या करना होगा

आंकड़े साफ बताते हैं कि प्रदेश में बाल विवाह के खिलाफ अभी और काम करने की जरूरत है। कुछ जिलों में मिली सफलता से सीख ली जा सकती है। खासकर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान तेज करने होंगे। परिवारों और समुदायों को बेटियों की शिक्षा और सही उम्र में शादी के फायदे बताने होंगे। तभी आने वाले सालों में यह आंकड़ा और नीचे लाया जा सकेगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर बेटियों के अधिकार और सुरक्षा से जुड़ी है। भारतीय संविधान हर बच्चे को गरिमा और सुरक्षित बचपन का अधिकार देता है। बाल विवाह कानून के तहत भी अपराध है और यह बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर सीधा असर डालता है।



यह रिपोर्ट सरकारी सर्वे के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है, इसलिए तथ्यात्मक रूप से भरोसेमंद है। खबर में किसी समुदाय या जिले को लेकर नकारात्मक टिप्पणी नहीं है, सिर्फ आंकड़े सामने रखे गए हैं। ऐसी जानकारी समाज, प्रशासन और परिवारों को जागरूक बनाने में मदद करती है, ताकि बेटियों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में बाल विवाह की मौजूदा स्थिति क्या है?
    एनएफएचएस-6 रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 20 से 24 साल की 20 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई है। यह एनएफएचएस-5 के 23.1 फीसदी से थोड़ा कम है, लेकिन अब भी हर पांचवीं बेटी की शादी बालिग होने से पहले हो रही है।
  2. मध्य प्रदेश में बाल विवाह में सबसे आगे कौन सा जिला है?
    आगर मालवा जिला इस मामले में सबसे आगे है। यहां 20 से 24 साल की 49.4 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई, जो पांच साल पहले के मुकाबले 13.8 प्रतिशत अंक ज्यादा है और प्रदेश में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
  3. मध्य प्रदेश के किस जिले में बाल विवाह में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है?
    राजगढ़ जिले में सबसे बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। यहां बाल विवाह का अनुपात 46 फीसदी से घटकर 23 फीसदी रह गया, यानी 23 प्रतिशत अंक की कमी आई, जो प्रदेश में सबसे बड़ी गिरावट है।

ये खबरें भी पढ़िए...



आधी पढ़ाई बीती पर नहीं मिली ड्रेस, अब 56 लाख छात्रों के खाते में आएगा यूनिफॉर्म का पैसा



मंत्री-पीएस के चलते फाइलों में उलझा 222 पदों का प्रमोशन, टैक्स विभाग में खाली पड़े पद



MP में कैंसर का कहर: हर दिन 133 की मौत, 80 हजार से ज्यादा मिले नए मरीज



ई-अटेंडेंस पर जल्द आएगा नया सर्कुलर, देरी पर संकुल प्राचार्यों को मिलेगा राहत देने का अधिकार



Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • राजगढ़
  • बाल विवाह
  • मध्यप्रदेश में बाल विवाह
  • आगर-मालवा
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण