एमपी सिविल जज भर्ती: अब बिना वकालत अनुभव के दे सकेंगे परीक्षा, जानिए कैसे
मध्यप्रदेश में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब लॉ ग्रेजुएट्स अभ्यर्थी बिना वकालत के अनुभव के भी सीधे परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। पहले अभ्यर्थियों के लिए एक साल तक वकालत का अनुभव अनिवार्य था, जिसे अब हटा दिया गया है।
इस बदलाव से करीब 90 प्रतिशत लॉ विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होने के योग्य हो जाएंगे। 2024, 2025 और 2026 के खाली पदों को मिलाकर कुल 405 पदों पर भर्ती की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक हाल में हुई मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती परीक्षा में कुल 192 पदों में से सिर्फ 47 अभ्यर्थी ही चुने जा सके थे। इस वजह से करीब 145 पद खाली रह गए थे।
पद खाली रहने की इसी समस्या को दूर करने के मकसद से वकालत अनुभव की अनिवार्यता वाले नियम में बदलाव किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा योग्य अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकें और खाली पदों को भरा जा सके।
क्यों हटाया गया वकालत अनुभव का नियम
पहले नियम के तहत सिविल जज परीक्षा में बैठने के लिए अभ्यर्थियों के पास कम से कम एक साल तक वकालत का अनुभव होना अनिवार्य था। इस शर्त की वजह से बड़ी संख्या में लॉ ग्रेजुएट परीक्षा में शामिल ही नहीं हो पाते थे।
रिपोर्ट के मुताबिक यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के आधार पर किया गया है। नए नियम के लागू होने से अब लॉ ग्रेजुएट डिग्री पूरी करते ही सीधे परीक्षा में बैठ सकेंगे, जिससे अभ्यर्थियों की संख्या में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
चयन के बाद मिलेगी दो साल की ट्रेनिंग
चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति के बाद करीब दो साल की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग अवधि के दौरान अभ्यर्थियों को स्टाइपेंड के तौर पर करीब 70 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे।
ट्रेनिंग पूरी होने और पद पक्का होने के बाद इन्हें पूरा वेतन मिलना शुरू होगा, जो करीब 1.40 लाख रुपए प्रतिमाह तय किया गया है।
405 पदों पर होगी भर्ती
इस भर्ती में 2024, 2025 और 2026 के दौरान खाली रहे पदों को मिलाकर कुल 405 पदों को भरा जाएगा। इससे पहले हुई परीक्षा में अपेक्षा के मुताबिक अभ्यर्थी न मिल पाने के कारण बड़ी संख्या में पद खाली रह गए थे, जिसकी भरपाई अब इस नई भर्ती प्रक्रिया के जरिए की जाएगी।
FAQ
- Q1. सिविल जज परीक्षा में अब किसे फायदा मिलेगा?
अब वे लॉ ग्रेजुएट भी परीक्षा में बैठ सकेंगे, जिनके पास वकालत का अनुभव नहीं है। पहले एक साल तक वकालत का अनुभव अनिवार्य था, जिसे अब हटा दिया गया है। इससे करीब 90 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा के योग्य बन जाएंगे। - इस भर्ती में कुल कितने पद हैं?
2024, 2025 और 2026 के खाली पदों को मिलाकर कुल 405 पदों पर भर्ती की जाएगी। पिछली परीक्षा में 192 पदों में से सिर्फ 47 अभ्यर्थी ही चुने जा सके थे, बाकी पद खाली रह गए थे। - चयन के बाद वेतन और ट्रेनिंग की क्या व्यवस्था होगी?
चयनित अभ्यर्थियों को करीब दो साल की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिस दौरान लगभग 70 हजार रुपए स्टाइपेंड मिलेगा। ट्रेनिंग पूरी होने और पद पक्का होने के बाद इन्हें करीब 1.40 लाख रुपए मासिक वेतन मिलेगा।
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