तीन साल नहीं अब एक साल वकालत से बनेंगे जज, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Jitendra Shrivastava | Aug 21, 2026, 23:37 IST
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Photograph: (THESOOTR)

NEW DELHI. सुप्रीम कोर्ट ने जज बनने के लिए जरूरी वकालत के अनुभव को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया है। यह फैसला समीक्षा याचिका पर 2-1 बहुमत से आया है। नया नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह लागू होगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • अब एक साल की वकालत से भी बन सकेंगे जज।
  • सुप्रीम कोर्ट ने वकालत अनुभव की शर्त घटाई।
  • तीन साल की जगह अब सिर्फ एक साल।
  • 2027 तक बिना अनुभव भी परीक्षा में मौका।
  • नया नियम अप्रैल 2027 से होगा पूरी तरह लागू।
सुप्रीम कोर्ट ने जज बनने की शर्तों में बड़ी राहत दी है। अब वकालत ( Legal Practice ) का अनुभव 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया गया है। यह फैसला 2-1 बहुमत से समीक्षा याचिका पर आया है। 2025 से 2027 के बीच बिना अनुभव के भी परीक्षा दी जा सकेगी। नया नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह लागू होगा।

निचली अदालतों में जज बनने की तैयारी कर रहे युवाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को अदालत ने अपने मई 2025 के फैसले में संशोधन किया। एंट्री लेवल न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए 3 साल की अनिवार्य वकालत की शर्त अब घटाकर 1 साल कर दी गई है।

सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने की। बेंच ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। इसी के साथ समीक्षा याचिका को खारिज भी कर दिया गया।

अब उम्मीदवारों के लिए क्या बदलेगा

अब उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने के लिए सिर्फ 1 साल का वकालत अनुभव चाहिए होगा। जिन परीक्षाओं का नोटिफिकेशन 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच आएगा, उनमें यह शर्त भी अनिवार्य नहीं रहेगी। यानी इस दौरान बिना अनुभव वाले उम्मीदवार भी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

हालांकि बिना अनुभव चुने गए उम्मीदवारों को सीधे जज नहीं बनाया जाएगा। उन्हें पहले 1 साल तक ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर के रूप में काम करना होगा। इसके साथ ही 1 साल की स्ट्रक्चर्ड क्लर्कशिप से भी गुजरना जरूरी होगा।

supreme court judge eligibility rule
supreme court judge eligibility rule


अप्रैल 2027 से पूरी तरह लागू होगा नया नियम

जिन परीक्षाओं का नोटिफिकेशन 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद आएगा, उन पर नया नियम पूरी तरह लागू होगा। यानी उस समय तक हर उम्मीदवार के लिए सिर्फ 1 साल का वकालत अनुभव ही जरूरी रह जाएगा। पुरानी 3 साल वाली शर्त पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

कोर्ट ने क्यों दी यह राहत

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मई 2025 में बिना किसी ट्रांजिशन पीरियड के 3 साल की शर्त लागू करना सही नहीं था। इससे नए लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों को भारी परेशानी हुई। कोर्ट ने कहा कि जज बनने के लिए वकालत का अनुभव जरूरी है, लेकिन युवाओं को अचानक असुविधा नहीं होनी चाहिए।

पिछले फैसलों में क्या हुआ था

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स के सीधे जज बनने पर रोक लगाई थी। उस समय कम से कम 3 साल की वकालत की शर्त अनिवार्य कर दी गई थी। इसके बाद जुलाई 2025 में इस फैसले के खिलाफ कई समीक्षा याचिकाएं दाखिल हुईं।

अदालत ने उस समय फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब उन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 3 साल की शर्त को घटाकर 1 साल कर दिया है। साथ ही बीच के समय के लिए भी खास राहत दी गई है।

आगे क्या होगा

अब न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा वकीलों के लिए रास्ता आसान हो गया है। राज्यों की न्यायिक सेवा परीक्षाओं के नोटिफिकेशन में भी यह बदलाव लागू होगा। आने वाले महीनों में अलग-अलग राज्यों की हाईकोर्ट इस फैसले के मुताबिक अपने नियम भी अपडेट करेंगी।

FAQ

  1. जज बनने के लिए अब कितने साल की वकालत जरूरी है?
    सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के बाद अब सिर्फ 1 साल की वकालत जरूरी है। पहले यह शर्त 3 साल की थी। यह बदलाव समीक्षा याचिका पर हुए फैसले के बाद आया है।
  2. नया नियम कब से पूरी तरह लागू होगा?
    नया नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह लागू होगा। इससे पहले 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच खास छूट रहेगी। इस दौरान बिना अनुभव वाले उम्मीदवार भी परीक्षा दे सकेंगे।
  3. बिना अनुभव चुने गए उम्मीदवार सीधे जज बनेंगे या नहीं?
    नहीं, बिना अनुभव चुने गए उम्मीदवारों को सीधे जज नहीं बनाया जाएगा। उन्हें पहले 1 साल ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर के रूप में काम करना होगा। साथ ही 1 साल की स्ट्रक्चर्ड क्लर्कशिप भी पूरी करनी होगी।
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