CM हेल्पलाइन: शिकायत दर्ज होना आसान, समाधान होना बड़ी चुनौती। राजस्व विभाग सबसे आगे
मध्यप्रदेश में CM हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी बड़ी संख्या में लोगों को समाधान का इंतजार है। 1 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं। इनमें राजस्व विभाग से जुड़े मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है। एफआईआर, अवैध कब्जे, सीमांकन और जांच में देरी जैसी शिकायतें भी सिस्टम की रफ्तार पर सवाल खड़े कर रही हैं।
आंकड़े बता रहे हैं कहां अटकी शिकायतें-
लंबे समय से लंबित शिकायतों में कई विभाग जनता की शिकायतों के बोझ से घिरे हैं।
- राजस्व विभाग: 30,403 शिकायतें लंबित।
- गृह विभाग: 15,773 शिकायतें लंबित।
- नगरीय विकास विभाग: 3,366 शिकायतें लंबित।
- एफआईआर दर्ज नहीं होने के: 5,016 मामले।
अवैध कब्जे, सीमांकन और विवेचना में देरी से जुड़े मामले भी बड़ी संख्या में लंबित हैं।
जमीन के मामलों में सबसे ज्यादा इंतजार
लंबित शिकायतों में राजस्व विभाग सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। जमीन के सीमांकन, नामांतरण, बंटवारे और अवैध कब्जे जैसे मामलों में शिकायतकर्ताओं को लंबे समय तक संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
खास तौर पर सीमांकन से जुड़े मामलों पर मानसून का असर भी पड़ता है। बारिश के दौरान मैदानी स्तर पर सीमांकन का काम प्रभावित होने से ऐसे मामलों के निराकरण की गति धीमी हो जाती है।
एफआईआर से विवेचना तक सवाल
गृह विभाग से जुड़ी शिकायतों में एफआईआर दर्ज नहीं होने के 5,016 मामले लंबित हैं। इसके अलावा विवेचना में देरी और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी शिकायतें भी CM हेल्पलाइन पर पहुंच रही हैं।
यानी शिकायत दर्ज होने के बाद अगला सवाल यह है कि कार्रवाई कब होगी और उसका परिणाम शिकायतकर्ता तक कब पहुंचेगा।
सरकारी सिस्टम की असली परीक्षा
CM हेल्पलाइन को सरकार और जनता के बीच शिकायत समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिकायतों का लंबे समय तक लंबित रहना केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी और जवाबदेही की भी परीक्षा है।
शिकायतकर्ता के लिए मायने यह रखता है कि उसकी समस्या कब सुनी गई और कब उसका वास्तविक समाधान हुआ।
राजस्व विभाग का क्या कहना है?
प्रमुख सचिव राजस्व ई. रमेश कुमार ने द सूत्र को बताया कि पिछले महीने की तुलना में इस वर्ष CM हेल्पलाइन की शिकायतों का अधिक संख्या में निराकरण किया गया है।
उन्होंने कहा कि सीमांकन के मामलों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि मानसून के दौरान सीमांकन का काम प्रभावित रहता है। वहीं नामांतरण और बंटवारे से जुड़े मामलों का लगातार निराकरण किया जा रहा है।
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