तबादलों में देरी से भड़के सीएम मोहन यादव, बोले- रात 8 बजे तक आदेश जारी हों
समझें क्या है पूरा मामला...
- रात 8 बजे तक जारी करो तबादला आदेश, CM का अल्टीमेटम।
- मोहन यादव सख्त, विभागों को दी आखिरी चेतावनी।
- A+ मॉनिटर मामलों में देरी पर CM की नाराजगी।
- तीन दिन में मांगा घोषणाओं का पूरा रोडमैप।
- समय सीमा तय, अब नहीं चलेगी कोई ढिलाई।
सीएम मोहन यादव ने CM A+ मॉनिटर प्रकरणों की समीक्षा बैठक की। इसमें तबादला आदेशों में हो रही देरी पर उन्होंने नाराजगी जताई।
सीएम ने विभागों को रात 8 बजे तक आदेश जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही तीन दिन में सभी घोषणाओं का रोडमैप मांगा। मई में तय समय सीमा के बावजूद कई विभागों ने कार्रवाई नहीं की थी।
तबादला नीति में हुई थी देरी
20 मई को सरकार ने तबादला नीति जारी की थी। उसी समय कैबिनेट ने एक अहम फैसला लिया था। तय हुआ था कि A+ मॉनिटर में लंबित सभी तबादला मामले 31 मई तक निपटाए जाएं। इसके बाद 1 जून से आदेश जारी होने थे। लेकिन कई विभागों ने अब तक इस पर अमल नहीं किया।
CM ने जताई नाराजगी
शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने इस देरी को गंभीरता से लिया। उन्होंने साफ कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। इसीलिए उन्होंने समय सीमा तय कर दी। सभी संबंधित विभागों को आज रात 8 बजे तक आदेश जारी करने को कहा गया है।
A+ नोटशीट के मामलों पर फोकस
मुख्यमंत्री ने खासतौर पर उन तबादला मामलों का जिक्र किया जो CM की A+ नोटशीट में दर्ज हैं। इन मामलों की सिफारिश पहले ही की जा चुकी थी। बावजूद इसके आदेश जारी होने में देरी हो रही थी। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासनिक ढिलाई माना और तुरंत सुधार के निर्देश दिए।
तीन दिन में मांगा रोडमैप
बैठक में मुख्यमंत्री ने एक और अहम निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिलों में की गई सभी घोषणाओं की समय सीमा और कार्ययोजना तय हो। यह पूरी जानकारी तीन दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए। इससे यह साफ होगा कि कौन सी घोषणा कब तक पूरी होगी।
आगे नहीं चलेगी देरी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि A+ मॉनिटरिंग से जुड़े किसी भी मामले में अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी। उनका कहना था कि जब मामलों की सिफारिश हो चुकी है, तो आदेश जारी करने में समय क्यों लगे। इस सख्ती के बाद विभागों में हलचल तेज हो गई है।
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश सरकार के प्रशासनिक कामकाज से जुड़ा है। मुख्यमंत्री की इस सख्ती के बाद अब सभी विभागों पर दबाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि आदेश समय पर जारी होते हैं या नहीं।
बता दें कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इन दिनों सरकारी विभागों के कामकाज की गहन समीक्षा कर रहे हैं। इससे पहले पिछले माह 15 जून से हर विभाग के अधिकारी से उसके विभाग का प्रजेंटेशन लिया था। और 17 जून से हर मंत्री से वन-टू-वन मिलकर उनके विभागों की जानकारी ली थी।
क्या होता है A+ मॉनिटर सिस्टम
A+ मॉनिटर सरकारी फाइलों की सबसे ऊंची कैटेगरी है। इसमें मुख्यमंत्री की घोषणाओं और बड़े फैसलों से जुड़े मामले आते हैं। इन्हें सीएम कार्यालय से सीधे ट्रैक किया जाता है। देरी होने पर अफसरों को सीधे फटकार लगती है। समय सीमा में काम न होने पर सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।
A+ का मतलब क्या है
A+ का मतलब है सबसे ऊंची प्राथमिकता। जब कोई सरकारी फाइल इस कैटेगरी में आती है तो सरकार उस पर तुरंत एक्शन चाहती है। यह आम फाइलों से अलग तरीके से हैंडल होती है। इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
किस तरह के मामले आते हैं इसमें
A+ मॉनिटर में वही मामले रखे जाते हैं जो बेहद अहम माने जाते हैं। इनमें मुख्यमंत्री की खुद की घोषणाएं शामिल होती हैं। जनता की बड़ी शिकायतें भी इसी में आती हैं। तबादले और बड़ी विकास परियोजनाओं से जुड़े फैसले भी इसी कैटेगरी में रखे जाते हैं।
सीधे सीएम कार्यालय से निगरानी
इन मामलों की खास बात यह है कि इन्हें राज्य के सबसे ऊपरी स्तर से देखा जाता है। यानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से इनकी ट्रैकिंग होती है। कोई भी देरी सीएम तक तुरंत पहुंच जाती है। इसी वजह से अफसरों पर दबाव ज्यादा रहता है।
देरी पर क्या होता है
अगर कोई मामला A+ मॉनिटर में लंबित रह जाए तो इसे गंभीरता से लिया जाता है। मुख्यमंत्री खुद संबंधित अफसरों को फटकार लगा सकते हैं। कई बार सख्त अल्टीमेटम भी दिया जाता है। लापरवाही करने वाले विभागों पर प्रशासनिक कार्रवाई तक हो सकती है।
जवाबदेही तय करने वाला सिस्टम
A+ मॉनिटर सिस्टम का मकसद साफ है। सरकार चाहती है कि जरूरी फाइलें समय पर निपटें। इसलिए हर मामले की एक तय समय सीमा होती है। इस समय सीमा के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य होता है।
क्यों जरूरी है यह सिस्टम
इस तरह की व्यवस्था से सरकारी कामकाज में तेजी आती है। जनता से जुड़े मामले लंबे समय तक अटके नहीं रहते। अफसरों की जवाबदेही भी तय होती है। यही वजह है कि A+ मॉनिटर को सबसे अहम सरकारी सिस्टम माना जाता है।
कुल मिलाकर A+ मॉनिटर सरकारी कामकाज को तेज करने वाला एक जरूरी टूल है। इससे बड़े फैसले समय पर लागू होते हैं। साथ ही अफसरों की जिम्मेदारी भी साफ तौर पर तय हो जाती है।
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