कॉलेज पॉलिटिक्स: ABVP और NSUI के गढ़ में सेंध लगाने मैदान में उतरेगा JAYS

Amresh Kushwaha | Aug 10, 2026, 13:15 IST
कॉलेज पॉलिटिक्स में जयस
मध्य प्रदेश में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव हो रहे हैं। इस बार जय आदिवासी युवा शक्ति यानी जयस भी पहली बार मैदान में उतरेगा। संगठन खासतौर पर आदिवासी विद्यार्थियों को उम्मीदवार बनाएगा। इससे एबीवीपी और एनएसयूआई के समीकरण बदल सकते हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में नौ साल बादछात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं।
  • इस बार जयस छात्रसंगठन भी मैदान में उतरेगा।
  • अब तकएबीवीपी और एनएसयूआई के बीच ही मुख्यमुकाबलारहता था।
  • जयस खासतौर पर आदिवासीविद्यार्थियों को उम्मीदवार बनाएगा।
  • इंदौर में हुए कार्यक्रम में संगठन ने इसकाऔपचारिक ऐलान किया है।

जयस छात्र संगठन मैदान में

मध्य प्रदेश की कॉलेज पॉलिटिक्स में अब तक सीधा मुकाबला दो संगठनों के बीच रहा है। भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी (Akhil Bhartiya Vidyarthi Parishad) और कांग्रेस के एनएसयूआई (National Students Union of India) आमने सामने रहते थे। वहीं, इस बार तस्वीर बदलने वाली है। जय आदिवासी युवा शक्ति यानी जयस भी पहली बार छात्रसंघ चुनाव में सीधे उतरने जा रहा है। संगठन ने प्रदेश के सभी कॉलेजों में उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है।



इंदौर में हुआ बड़ा ऐलान

जयस की छात्र राजनीति में एंट्री का ऐलान रविवार, 09 अगस्त को इंदौर में हुआ है। यह दिन आदिवासी दिवस के मौके पर तय किया गया था। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा ने कार्यक्रम में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि जयस अब कॉलेजों में भी विद्यार्थियों की आवाज बनेगा। उनके मुताबिक संगठन छात्रसंघ चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगा। यह ऐलान प्रदेश की छात्र राजनीति के लिए बड़ा मोड़ माना जा रहा है।



नौ साल बाद बहाल हुए चुनाव

मध्य प्रदेश में 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा के मुताबिक नौ साल पहले भी जयस की बढ़ती सक्रियता के बीच ही चुनाव बंद कर दिए गए थे। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद चुनाव प्रक्रिया फिर बहाल हुई है। सितंबर में चुनाव कराए जाने की तैयारी है। हालांकि सरकार ने अभी अंतिम तारीख घोषित नहीं की है।



आदिवासी विद्यार्थियों पर सबसे बड़ा फोकस

जयस की रणनीति का केंद्र आदिवासी विद्यार्थी हैं। प्रदेश के कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी में आदिवासी समाज के विद्यार्थी बड़ी संख्या में पढ़ते हैं। संगठन इन्हीं विद्यार्थियों के बीच अपना आधार मजबूत करना चाहता है। जयस छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल बघेल ने बताया कि संगठन पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों से संपर्क अभियान शुरू होगा।



मालवा-निमाड़ से होगी शुरुआत

जयस के पदाधिकारी सबसे पहले मालवा और निमाड़ क्षेत्र के कॉलेजों का दौरा करेंगे। इन इलाकों में आदिवासी छात्र की संख्या ज्यादा है। यहां विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर स्थानीय मुद्दों की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद अभियान प्रदेश के दूसरे जिलों तक बढ़ाया जाएगा। बाबूलाल बघेल ने कहा कि जहां भी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, वहां संगठन को जीत की उम्मीद है।



किन मुद्दों पर लड़ेगा जयस

जयस छात्र संगठन कई अहम मुद्दों को चुनावी एजेंडे में शामिल करेगा। इनमें छात्रवृत्ति, फीस, हॉस्टल और रोजगार जैसे विषय प्रमुख हैं। परीक्षा व्यवस्था और कैंपस की मूलभूत सुविधाओं को भी मुद्दा बनाया जाएगा। छात्र राजनीति में उतरने से पहले भी जयस युवाओं के मुद्दों पर सक्रिय रहा है।



संगठन बैकलॉग पदों की भर्ती की मांग लंबे समय से उठा रहा है। पटवारी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग भी शामिल है। इंदौर, भोपाल समेत कई जिलों में संगठन इन मुद्दों पर प्रदर्शन कर चुका है।



एबीवीपी और एनएसयूआई पर क्या असर

मध्य प्रदेश की कॉलेज राजनीति में लंबे समय से एबीवीपी और एनएसयूआई का दबदबा रहा है। दोनों संगठन छात्रसंघ चुनाव को अपने राजनीतिक कैडर तैयार करने का जरिया मानते रहे हैं। अब जयस की एंट्री से पहली बार मुकाबले में तीसरा प्रमुख छात्र संगठन खड़ा होगा। आदिवासी बहुल इलाकों के कॉलेजों में इसका असर सबसे ज्यादा दिखने की उम्मीद है। जिन कॉलेजों में आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या बड़ी है, वहां समीकरण बदल सकते हैं।



एक्सपर्ट का वर्जन

जय आदिवासी युवा शक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा ने कहा कि इस बार जयस छात्र संगठन पूरी जिम्मेदारी और ताकत के साथ मैदान में उतरेगा। उनके मुताबिक संगठन का लक्ष्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं बल्कि छात्रों की आवाज मजबूत करना है।



उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक छात्र नेतृत्व को आगे बढ़ाना ही असली मकसद है। उनका दावा है कि इस बार जयस छात्र संगठन जीत दर्ज करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय बाद चुनाव होने से युवाओं को लोकतांत्रिक भागीदारी का मौका मिलेगा।



संगठन की पृष्ठभूमि

जय आदिवासी युवा शक्ति यानी जयस का गठन साल 2013 में हुआ था। यह संगठन शुरू से आदिवासी समाज और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहा है। छात्र राजनीति के लिए जयस ने अलग विंग तैयार किया है। इसका नाम जयस छात्र संगठन यानी जेसीएस (JAYS Chatra Sangathan) है। इस विंग का गठन करीब दो साल पहले हुआ था। अब यही विंग पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतर रहा है।



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