दिल्ली में जुटे कांग्रेस के ओबीसी नेता, पहली बैठक में आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दों पर मंथन

Neel Tiwari | Nov 02, 2026, 17:37 IST
मध्य प्रदेश में OBC वर्ग की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा के लिए दिल्ली में जुटे कांग्रेस समिति के सदस्य।
Members of the Congress committee gathered in Delhi to discuss a strategy for increasing the political representation of the OBC category in Madhya Pradesh.
मध्य प्रदेश कांग्रेस की OBC समिति की पहली बैठक सोमवार, 02 नवंबर को नई दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई है। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत समिति के कई सदस्य शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश में OBC वर्ग के अधिकारों और राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने इस समिति का गठन किया है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बैठक की जानकारी साझा की है। बैठक में OBC वर्ग से जुड़े मुद्दों और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई है।



OBC समाज के सामाजिक और राजनीतिक उत्थान पर जोर

उमंग सिंघार ने अपनी पोस्ट में कहा कि OBC समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के साथ उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि OBC समाज को राजनीति में उचित भागीदारी दिलाने और सामाजिक न्याय की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और क्या फैसले लिए गए, इसकी विस्तृत जानकारी उन्होंने पोस्ट में नहीं दी है।



हरीश चौधरी ने किया था प्रदेश स्तरीय समिति का गठन

गौरतलब है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने 24 अक्टूबर 2026 को प्रदेश स्तरीय OBC समिति बनाने का आदेश जारी किया था। इस समिति में अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल, हीना कांवरे, सिद्धार्थ कुशवाहा, दिनेश गुर्जर और राजकुमार पटेल को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश कांग्रेस OBC विभाग के प्रदेश अध्यक्ष को भी पदेन सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।



OBC अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर रहेगी समिति की नजर

मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच इस समिति का गठन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य OBC समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। साथ ही, समाज को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व और भागीदारी दिलाना भी समिति की जिम्मेदारी होगी।



दिल्ली में हुई पहली बैठक के साथ ही समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में समिति OBC आरक्षण, सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर क्या कदम उठाती है और अपनी आगे की रणनीति कैसे तैयार करती है।



हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने साल 2019 में ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को रद्द कर दिया था।



हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी रखने का फैसला दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने 13 फीसदी रोके गए पदों को तीन महीने के भीतर अनारक्षित श्रेणी से भरने का आदेश दिया था।



इस फैसले के बाद ओबीसी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। संगठनों की मांग है कि प्रदेश में 27 फीसदी आरक्षण लागू किया जाए।



सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई अपील

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उस पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही 13 फीसदी रोके गए पदों को लेकर भी राहत मांगी गई है।



हालांकि, सरकार की अपील में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन ने 22 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी थी। एसोसिएशन के मुताबिक सरकारी अपील में 10 तकनीकी आपत्तियां दर्ज हुई हैं। अब सवाल उठ रहा है कि सरकार इन कमियों को कब तक दूर करेगी।



यहां समझना जरूरी है कि तकनीकी आपत्तियां आने का मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी है। अपील पर आगे क्या होगा, यह कोर्ट की प्रक्रिया और आने वाले आदेशों से साफ होगा।

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