ओबीसी आरक्षण पर सियासी हलचल के बीच कांग्रेस का बड़ा कदम, प्रदेश स्तरीय कमेटी गठित
अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और हीना कांवरे को जिम्मेदारी
प्रदेश स्तरीय कमेटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल, सुश्री हीना कांवरे, सिद्धार्थ कुशवाहा, दिनेश गुर्जर और राजकुमार पटेल को शामिल किया गया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के OBC विभाग के प्रदेश अध्यक्ष को पदेन सदस्य बनाया गया है। कमेटी में शामिल नेताओं को OBC वर्ग से जुड़े मुद्दों पर काम करने और उनके हितों की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर रहेगा जोर
हरीश चौधरी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कमेटी के गठन का उद्देश्य OBC वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक उत्थान को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी सुनिश्चित करना भी कमेटी के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई आदेश की प्रतिलिपि
कमेटी के गठन संबंधी आदेश की प्रतिलिपि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को भेजी गई है। इसके अलावा AICC के OBC विभाग के अध्यक्ष अनिल जयहिंद, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मध्य प्रदेश कांग्रेस के सभी प्रभारी सचिवों को भी इसकी जानकारी दी गई है।
OBC मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति को लेकर बढ़ी चर्चा
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण और इस वर्ग के अधिकारों से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। ऐसे समय में कांग्रेस की प्रदेश स्तरीय कमेटी के गठन को OBC वर्ग के मुद्दों पर पार्टी की संगठनात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कमेटी की आगामी गतिविधियों, कार्ययोजना और वर्ग से जुड़े मुद्दों पर उसके प्रस्तावित कदमों को लेकर आदेश में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
हाईकोर्ट के फैसले से बढ़ा विवाद
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को 27 फीसदी OBC आरक्षण से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में OBC आरक्षण को 14 फीसदी तक सीमित रखने का आदेश दिया। साथ ही 27 फीसदी आरक्षण के प्रावधान को अमान्य कर दिया। फैसले के बाद OBC संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। संगठन 27 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।