एमपी में नगर निगम के पार्षद और सरपंचों का वेतन मजदूर व दैनिक वेतन भोगियों से भी कम

Sanjay Gupta | Apr 02, 2026, 12:07 IST
mp councillor sarpanch low salary issue
मध्य प्रदेश में मजदूरों और दैनिक वेतन भोगियों का वेतन बढ़ा है। वहीं पार्षद और सरपंचों का मानदेय इससे भी कम है। इस अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या जनसेवकों की आजीविका जितना न्यूनतम वेतन नहीं होना चाहिए?

News In Short

  • मध्यप्रदेश में मजदूरों का वेतन 01 अप्रैल से बढ़ा है।
  • पार्षद और सरपंच का मानदेय काफी कम है।
  • कई जगह यह मजदूरों से भी कम है।
  • इस अंतर को लेकर बहस तेज हो गई है।
  • जनसेवा और आजीविका पर सवाल उठ रहे हैं।

News In Detail

एमपी में वेतन तुलना क्यों चर्चा में है?

मध्य प्रदेश में नया वेतन लागू हुआ है। मजदूरों और दैनिक वेतन भोगियों को फायदा मिला है। वहीं, जनप्रतिनिधियों का मानदेय कम है। इससे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।



मजदूरों का नया न्यूनतम वेतन कितना है?

नई दरें 01 अप्रैल से लागू हुई हैं। श्रम विभाग ने यह आदेश जारी किया है। अकुशल मजदूर को 12 हजार 425 रुपए मिलेंगे। अर्धकुशल को 13 हजार 421 रुपए तय हुए हैं। कुशल मजदूर को 15 हजार 144 रुपए मिलेंगे और उच्च कुशल को 16 हजार 769 रुपए तय हैं।



पार्षद और महापौर को कितना मिलता है?

सरकार ने 2024 में मानदेय बढ़ाया था। इसमें 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई थी।



  • महापौर को अब 26 हजार 400 रुपए मिलते हैं।
  • नगर निगम पार्षद को 14 हजार 400 रुपए मिलते हैं।
  • नगर पालिका पार्षद को चार हजार 320 रुपए मिलते हैं।
  • नगर परिषद पार्षद को तीन हजार 360 रुपए मिलते हैं।

सरपंच और पंच की स्थिति क्यों कमजोर है?

सरपंच का मानदेय चार हजार 250 रुपए प्रति माह है। यह बढ़ोतरी 2022 में की गई थी।



  • पंच को एक बैठक के लिए 300 रुपए मिलते हैं।
  • साल में अधिकतम 1800 रुपए मिलते हैं।
  • कई बार यह भुगतान समय पर नहीं होता और महीनों तक राशि अटक जाती है।

क्या जनसेवा से चल सकता है घर खर्च?

मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि यह जनसेवा का काम है। इसे रोजगार का साधन नहीं माना गया है। वहीं, जमीनी हालात अलग नजर आते हैं। कम आय में खर्च चलाना मुश्किल होता है।



विधानसभा में क्या उठा था सवाल?

कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने सवाल उठाया था। उन्होंने मानदेय बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि राशि बहुत कम है, इससे जीवन चलाना कठिन है।



पंचायत मंत्री यह बोल चुके हैं

सरपंच के कम वेतन को लेकर कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने सवाल लगाया था। इस पर पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा था कि सरपंच और पंच का पद आजीविका (रोजगार) का साधन नहीं, बल्कि समाजसेवा और जनसेवा के लिए है।



मल्होत्रा का सवाल था कि सरकार द्वारा सरपंच को प्रति माह 4250 रुपए एवं वार्ड पंच को 300 रुपए प्रति माह मानदेय दिया जाता है, क्या इतने कम मानदेय में सरपंच एवं वार्ड पंच अपनी आजीविका चला सकते हैं? क्या सरकार सरपंच का मानदेय 25 हजार रुपए एवं वार्ड पंच का मानदेय 15 हजार प्रति माह करने का प्रस्ताव लाएगी?



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