एमपी में देशी शराब की बोतलों में 21% तक कम मिला अल्कोहल, डिस्टिलरियों के खेल पर विभाग खामोश

Aman Vaishnav | Oct 18, 2026, 09:32 IST
मध्य प्रदेश में देशी शराब के नमूनों में कम मिला अल्कोहल, तीन डिस्टिलरी की जांच रिपोर्ट में खुलासा
मध्य प्रदेश की देशी शराब में सरकारी नियमों के मुकाबले 21 प्रतिशत तक कम अल्कोहल मिला है। सबसे ज्यादा कमी सागर की डीसीआर डिस्टिलरी की प्लेन शराब में मिली। अब सवाल उठ रहा है कि शराब बनाने में जितनी स्पिरिट बचाई गई, उसका इस्तेमाल आखिर कहां किया गया? आइए इस मामले को विस्तार से जानते हैं...

एमपी में देशी शराब घोटाला

दरअसल, जून 2026 में भोपाल की सीईएस एनालिटिकल एंड रिसर्च सर्विसेज लैब में शराब के नमूनों की जांच हुई थी। इसमें प्रदेश की तीन अलग-अलग डिस्टिलरियों के पांच नमूने फेल हो गए। सभी नमूनों में सरकारी नियमों के मुकाबले अल्कोहल की मात्रा काफी कम मिली।



गंभीर बात यह है कि जांच रिपोर्ट जून में ही आ गई थी। इसके बावजूद आबकारी विभाग के अफसरों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। न कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही सरकार ने आगे इसकी जांच कराई।



किस डिस्टिलरी के नमूने में कितनी पाई गई कमी?

जांच रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा खेल सागर स्थित डीसीआर डिस्टिलरी के प्लेन शराब के नमूने में हुआ है। यहां अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से 20.74 प्रतिशत कम पाई गई। अलग-अलग फैक्ट्रियों के नमूनों की स्थिति इस प्रकार रही...



  • डीसीआर डिस्टिलरी, सागर (प्लेन शराब): तय मानक 28.55 प्रतिशत है। इसमें 20.74 प्रतिशत कम अल्कोहल मिला।
  • जगपिन डिस्टिलरी (मसाला शराब): तय मानक 42.80 प्रतिशत है। इसमें 15.04 प्रतिशत कम अल्कोहल मिला।
  • अग्रवाल डिस्टिलरी (प्लेन शराब): तय मानक 28.55 प्रतिशत है। इसमें 13.42 प्रतिशत कम अल्कोहल मिला।
  • अग्रवाल डिस्टिलरी (मसाला शराब): तय मानक 42.80 प्रतिशत है। इसमें 3.18 प्रतिशत कम अल्कोहल मिला।
  • डीसीआर डिस्टिलरी, सागर (मसाला शराब): तय मानक 42.80 प्रतिशत है। इसमें 1.26 प्रतिशत कम अल्कोहल मिला।

कहां हुई गड़बड़ी?

मध्य प्रदेश देशी स्पिरिट नियम (MP Country Spirit Rules) के मुताबिक हर बोतल में एक निश्चित मात्रा में अल्कोहल होना अनिवार्य है।



  • मसाला शराब (Spiced Country Liquor): इसमें 42.80 प्रतिशत अल्कोहल होना जरूरी है।
  • प्लेन शराब (Plain Country Liquor): इसमें 28.55 प्रतिशत अल्कोहल होना तय किया गया है।

सवाल यह है कि यदि शराब में तय मात्रा से कम स्पिरिट मिलाई गई, तो बची हुई स्पिरिट कहां गई? बड़े पैमाने पर ऐसा करके डिस्टिलरी मालिक करोड़ों रुपए का मुनाफा कमा सकते हैं।



सरकारी लैब में दोबारा जांच होना क्यों जरूरी?

इस मामले में एक पेंच यह भी है कि जांच एक निजी लैब में हुई थी। ये नमूने भी शराब कारोबारियों द्वारा ही उपलब्ध कराए गए थे।



पूरी सच्चाई जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि इन बैचों की बोतलों में शराब भरते समय रिकॉर्ड में अल्कोहल की मात्रा कितनी दर्ज थी। सरकारी लैब में विभाग के सीलबंद नमूनों की दोबारा जांच होनी चाहिए। इसके बाद ही इस गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।



FAQ



1. मध्य प्रदेश में देशी शराब में अल्कोहल की कमी का मामला कब सामने आया?



यह मामला जून 2026 में सामने आया, जब भोपाल की सीईएस एनालिटिकल एंड रिसर्च सर्विसेज लैब में जांच के लिए भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट आई। इस रिपोर्ट में 3 डिस्टिलरियों के 5 नमूनों में तय मात्रा से कम अल्कोहल पाया गया था।



2. एमपी में शराब के किस नमूने में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली है?



सबसे ज्यादा गड़बड़ी सागर की डीसीआर डिस्टिलरी की प्लेन शराब के नमूने में मिली है। इसमें तय मानक 28.55 प्रतिशत के मुकाबले 20.74 प्रतिशत कम अल्कोहल पाया गया।

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