21 करोड़ की ठगी का मामला: विधायक बनने की चाह में CA को बनाया था निशाना

Manya Jain | Aug 08, 2026, 16:40 IST
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ग्वालियर के CA से 21 करोड़ की साइबर ठगी में भाजपा नेता जगदीश मालवीय गिरफ्तार। पुलिस के मुताबिक वह ठगी के पैसों से विधायक-मंत्री बनना चाहता था। नेटवर्क कई राज्यों तक फैला था।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश में साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है।
  • ग्वालियर के सीए अशोक विजयवर्गीय से करीब 21 करोड़ रुपए की ठगी हुई थी।
  • इस मामले में भाजपा नेता जगदीश मालवीय गिरफ्तार हुए हैं।
  • वे ठगी की रकम से विधायक और फिर मंत्री बनना चाहते थे।
  • मामले में रतलाम निवासी अंकित वर्मा भी गिरफ्तार हुए हैं।

पुलिस के मुताबिक मालवीय के बैंक खाते में कुछ महीनों में करीब 2.93 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन हुए। इनमें से करीब 50 लाख रुपए CA से हुई ठगी की रकम से जुड़े बताए जा रहे हैं। बाकी करीब 2.43 करोड़ रुपए किन मामलों से जुड़े हैं, इसकी जांच जारी है।



कैसे शुरू हुई पूरी ठगी

5 दिसंबर 2025 को दिव्या नाम की एक युवती ने CA अशोक विजयवर्गीय से व्हाट्सएप पर चैट शुरू की। 15 दिसंबर को उसने दूसरे व्हाट्सएप नंबर से बातचीत आगे बढ़ाई। 20 दिसंबर को युवती ने एक लिंक भेजकर उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करा दिया।



25 दिसंबर को भरोसा जीतने के बाद CA ने पहला निवेश किया, जो 1.01 लाख रुपए का था। 29 दिसंबर को उन्होंने दोबारा इतनी ही रकम निवेश की। 7 जनवरी 2026 को जालसाजों ने भरोसा बढ़ाने के लिए खाते में 1.88 लाख रुपए का फर्जी मुनाफा दिखाया।



कैसे फंसाया गया CA को

पुलिस जांच के मुताबिक 'Tradecboeus' नाम से एक फर्जी वेब पोर्टल बनाया गया था। इस पोर्टल पर ट्रेडिंग का ग्राफ जानबूझकर बढ़ता-घटता दिखाया जाता था। इससे निवेशक को मुनाफे का भरोसा बना रहता था और वह लगातार रकम लगाता रहता था।



पुलिस के मुताबिक यह फर्जी प्लेटफॉर्म विदेशी IP (Internet Protocol) एड्रेस से संचालित हो रहा था। CA ने कुल 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपए इस प्लेटफॉर्म पर निवेश कर दिए थे।



76 खातों से होकर गुजरी रकम

पुलिस जांच में सामने आया कि CA ने अलग-अलग 76 बैंक खातों में 106 बार ट्रांजैक्शन किए। इसके बाद यह रकम करीब 15 अलग-अलग लेयर से गुजरकर 20 हजार से ज्यादा बैंक खातों तक पहुंची।



शुरुआती जांच के अनुसार ठगी की करीब 35 प्रतिशत रकम दक्षिण भारत के अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हुई। पुलिस अब इन खातों और रकम के अंतिम लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही है।



विधायक-मंत्री बनने का था सपना

इस मामले में भाजपा नेता और शाजापुर जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वे ठगी की रकम से विधायक और फिर मंत्री बनना चाहते थे। मामले में रतलाम निवासी अंकित वर्मा भी गिरफ्तार हुए हैं। जांच में नेटवर्क कई राज्यों तक फैला मिला है।



कौन हैं जगदीश फौजी

जगदीश मालवीय सेना में सूबेदार पद पर रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वे भाजपा से जुड़े और जिला पंचायत वार्ड क्रमांक 6 से चुनाव जीता। बाद में उन्हें निर्माण समिति का सभापति बनाया गया। वे मंत्री इंदरसिंह परमार के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। मंत्री से नजदीकी के चलते यह मामला और भी सुर्खियों में आ गया है।



मंत्री इंदर सिंह परमार के साथ आरोपी जगदीश मालवीय।


धीरे-धीरे बढ़ता गया निवेश

31 जनवरी 2026 को मुनाफे के लालच में CA ने 15 लाख रुपए का बड़ा निवेश कर दिया। इसके बाद अलग-अलग किस्तों में यह सिलसिला चलता रहा। 20 जून 2026 तक उनसे कुल 21.06 करोड़ रुपए का निवेश कराया जा चुका था।



21 जून को जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की, तो जालसाजों ने इनकम टैक्स के नाम पर 10 करोड़ रुपए और मांगे। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। 7 जुलाई को उन्होंने राज्य साइबर जोन ग्वालियर में शिकायत दर्ज कराई। 11 जुलाई को पुलिस ने FIR (First Information Report) दर्ज कर जांच शुरू की।



दो आरोपियों की गिरफ्तारी

जांच के बाद पुलिस ने 6 अगस्त 2026 को शाजापुर से जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय को गिरफ्तार किया। इसके अगले दिन यानी 7 अगस्त को रतलाम निवासी मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को सागर से गिरफ्तार किया गया।



पुलिस के मुताबिक मालवीय ने अपना बैंक खाता अंकित वर्मा को इस्तेमाल करने के लिए दिया था। इसके बदले उसे हर ट्रांजैक्शन पर 2 प्रतिशत कमीशन मिलता था। जांच में उसका खाता देश के छह अलग-अलग राज्यों से जुड़ी ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल पाया गया है।



बड़ा गैराज खोलना चाहता था दूसरा आरोपी

अंकित वर्मा मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई (Bachelor of Engineering) कर चुका है और रतलाम में कार गैराज चलाता है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा कार गैराज खोलना चाहता था।



आरोप है कि वह साइबर ठगों को म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता था। पुलिस के अनुसार उसने ठगी की रकम से गैराज बड़ा करने की बात भी स्वीकार की है।



मालवा से दक्षिण भारत तक फैला नेटवर्क

पुलिस पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह नेटवर्क मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के अलावा बिहार, झारखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक तक फैला मिला है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं।



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पुलिस के मुताबिक आरोपी बिहार और मध्यप्रदेश में जाकर मोबाइल में APK (Android Package Kit) फाइल एक्टिवेट करते थे। इसके बाद बैंक से आने वाला OTP (One Time Password) अपने आप फॉरवर्ड होकर मुख्य हैंडलर तक पहुंच जाता था। पुलिस अब इस पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।



एक्सपर्ट कोट्स

संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, राज्य साइबर जोन उन्होंने बताया कि मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके मुताबिक पूछताछ में सामने आई जानकारी के आधार पर साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।



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