DAP की गलत खुराक से बंजर हो रहे खेत, उर्वरक उपभोक्ता में दूसरे नंबर पर MP

Amresh Kushwaha | Jun 13, 2026, 15:42 IST
खेतों में रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार अधिक उर्वरक इस्तेमाल के मामले में एमपी देश में दूसरे नंबर पर है। किसानों को सही खुराक नहीं पता और अंधाधुंध DAP इस्तेमाल से खेत बंजर हो रहे हैं तथा कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • कृषि मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट 2025-26 में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
  • अधिक डीएपी इस्तेमाल में MP देश में दूसरे नंबर पर है।
  • देश के सर्वाधिक रासायनिक खाद इस्तेमाल वाले टॉप 100 जिलों में MP के 11 जिले हैं।
  • 91% किसानों को उर्वरक की सही मात्रा और खुराक नहीं पता।
  • खेत तेजी से बंजर हो रहे हैं और फसलों के जरिए रसायन थाली तक पहुंच रहे हैं।

खेतों में घुल रहा है DAP का जहर

मध्यप्रदेश के खेतों में रसायनों का जहर धीरे-धीरे घुल रहा है और खेत बंजर होते जा रहे हैं। यह चेतावनी केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट 2025-26 में दी गई है।



रिपोर्ट के मुताबिक सर्वाधिक डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) की खपत वाले देश के शीर्ष 100 जिलों में मध्यप्रदेश के 11 जिले शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के बाद MP रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल में देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है।



नर्मदा बेल्ट के जिले सबसे आगे

MP में DAP और यूरिया की खपत सबसे ज्यादा नर्मदा बेल्ट के जिलों में है। नर्मदापुर यानी होशंगाबाद जिला 48 हजार 527 मीट्रिक टन की खपत के साथ राज्य में पहले और देश में 11वें नंबर पर है।



सीहोर दूसरे नंबर पर 45 हजार 249 मीट्रिक टन के साथ आता है। रायसेन, विदिशा, उज्जैन, देवास, राजगढ़, जबलपुर, ग्वालियर और धार भी इस सूची में शामिल हैं।



इन जिलों में ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन भी होता है जो तीन फसलें लेने की होड़ को बढ़ावा देता है।



91% किसान अनजान, 76% पद खाली

कैग की रिपोर्ट में इस संकट की असली जड़ उजागर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 91% किसानों को कृषि विभाग से उर्वरक संबंधी कोई प्रशिक्षण या सही सलाह नहीं मिली है। इसके अलावा 76% तक प्रवर्तन अधिकारियों के पद खाली हैं जो उर्वरकों की गुणवत्ता और मात्रा पर निगरानी रखते हैं। वर्ष 2017 से 2022 के बीच पांच हजार 837 सैंपल में से उर्वरकों के घटिया नमूने मिले थे। उर्वरक की जांच के लिए 18 लैब होनी चाहिए लेकिन सिर्फ छह ही हैं।



तीन फसलों की होड़ ने बढ़ाई समस्या

रायसेन, विदिशा, उज्जैन, देवास, राजगढ़, जबलपुर, ग्वालियर, धार और बैतूल भी इस केमिकल बेल्ट का हिस्सा हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन जिलों में साल में तीन फसलें यानी गेहूं, धान और मूंग लेने की होड़ ने उर्वरकों के अनियमित उपयोग को हवा दी है।



होशंगाबाद, सीहोर, हरदा और जबलपुर में मूंग की खेती के दौरान भारी मात्रा में रसायनों का डोज लिया जा रहा है। इंडाक्साकार्ब, थायोमेथोक्साम और एसीटामिप्रिड जैसे कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव हो रहा है।



खेत बंजर, थाली में जहर

पूर्व संयुक्त संचालक कृषि पीके विश्वकर्मा बताते हैं कि अत्यधिक DAP और यूरिया का मिट्टी की ऊपरी परत पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इससे मिट्टी में फास्फोरस का जमाव हो रहा है जो जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्वों की उपलब्धता को खत्म करता है।



मिट्टी की उर्वरा शक्ति और फसल की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। फसलों के माध्यम से यह रसायन इंसानों के आहार श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं जो कैंसर और किडनी से संबंधित बीमारियों का कारण बन सकते हैं।



कोराजन और डाइमेथेनामिड-बेंजोएट जैसे रसायनों का जमकर छिड़काव किया जा रहा है जो और भी खतरनाक हैं।



सरकार क्या कर रही है?

कृषि संचालनालय के डायरेक्टर उमाशंकर भार्गव का कहना है कि वे अभी रिपोर्ट देखेंगे लेकिन किसानों के बीच जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि DAP की जगह एनपीके (Nitrogen Phosphorus Potassium) कॉम्प्लेक्स और एसएसपी (Single Super Phosphate) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सभी उप संचालकों को जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।



FAQ

  1. कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के बारे में क्या खुलासा हुआ है?
    केंद्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार अधिक डीएपी उर्वरक इस्तेमाल के मामले में मध्यप्रदेश देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर है। देश के सर्वाधिक रासायनिक खाद उपयोग वाले शीर्ष 100 जिलों में MP के 11 जिले शामिल हैं। नर्मदापुर जिला 48,527 मीट्रिक टन DAP खपत के साथ राज्य में पहले और देश में 11वें स्थान पर है।
  2. DAP के अधिक इस्तेमाल से खेत और स्वास्थ्य पर क्या असर हो रहा है?
    अत्यधिक DAP और यूरिया के इस्तेमाल से मिट्टी में फास्फोरस का जमाव बढ़ रहा है जिससे जिंक और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व खत्म हो रहे हैं। खेत तेजी से बंजर हो रहे हैं और फसलों की गुणवत्ता घट रही है। इन रसायनों के आहार श्रृंखला में प्रवेश से कैंसर और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
  3. किसान अधिक DAP क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं?
    91% किसानों को कृषि विभाग से उर्वरक की सही खुराक और मात्रा के बारे में कोई प्रशिक्षण नहीं मिला है। साल में तीन फसलें लेने की होड़ और निगरानी के लिए 76% पद खाली होने के कारण अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ा है। उर्वरक जांच के लिए 18 लैब होनी चाहिए लेकिन सिर्फ 6 ही काम कर रही हैं।

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