एमपी में परिसीमन अटका तो महिला आरक्षण भी अधर में! पुराने ढांचे पर चुनाव की तैयारी

Ramanand Tiwari | Mar 30, 2026, 22:27 IST
mp delimitation
BHOPAL: मध्यप्रदेश में महिला आरक्षण की स्थिति असमंजस में है। जनगणना और परिसीमन में देरी के कारण नई सीटों का निर्धारण नहीं हो पा रहा है। इससे महिला आरक्षण के लाभ में कमी आ सकती है।

मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव से पहले महिला आरक्षण पर असमंजस खड़ा हो गया है। जनगणना और परिसीमन में देरी के कारण नई सीमाएं तय नहीं हो पा रही हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कौन सी सीट महिला के लिए आरक्षित होगी। ऐसे में पुराने ढांचे पर चुनाव कराने की तैयारी, महिला आरक्षण के लाभ को प्रभावित कर सकती है।



महिला आरक्षण का गणित क्यों फंसा?

महिला आरक्षण सीधे तौर पर सीटों के परिसीमन से जुड़ा होता है। पहले यह तय होता है कि कौन सी सीट किस श्रेणी में आएगी, फिर आरक्षण लागू होता है। लेकिन जब सीमाएं तय नहीं होंगी तो आरक्षण का आधार कमजोर हो जाएगा।



इंदौर नगर निगम के MIC मेंबर ने ही अधिकारियों पर लगाए विज्ञापन घोटाले के आरोप



जेपी घनोपिया का सीधा सवाल

कांग्रेस नेता जेपी घनोपिया ने कहा कि बिना परिसीमन के महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण की बात तो कर रही है, लेकिन जमीनी तैयारी शून्य है। अगर सीटों का निर्धारण नहीं होगा तो 33% या 50% आरक्षण कैसे तय होगा? उनका तर्क था कि यह केवल राजनीतिक घोषणा बनकर रह सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि परिसीमन क्यों नहीं हो पा रहा है? प्रदेश में अप्रैल 2027 से जनगणना शुरू होगी, जो एक साल चलेगी। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया में कम से कम 6 महीने लगेंगे। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले यह पूरा होना लगभग असंभव है।



सीधे असर क्या होंगे?

  • महिला आरक्षण व्यवहार में लागू नहीं हो पाएगा।
  • सीटों का नया वर्गीकरण नहीं हो सकेगा।
  • पुरानी सीटों पर ही पुराने आरक्षण फार्मूले से चुनाव होंगे।
  • नई जनसंख्या के हिसाब से महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।
  • चुनाव तो होंगे, लेकिन आरक्षण का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

मध्य प्रदेश के सीमेंट उद्योग पर संकट के बादल, ईरान युद्ध के कारण कीमतों में हो सकता है इजाफा



पुरानी सीमाओं पर चुनाव, नया विवाद

चुनाव आयोग अब पुराने वार्ड और पंचायत सीमाओं पर ही चुनाव कराने की तैयारी में है। इसका मतलब यह हुआ कि नए क्षेत्र, नई आबादी और बदले सामाजिक समीकरण पूरी तरह नजरअंदाज हो जाएंगे। सबसे ज्यादा असर उन महिलाओं पर पड़ेगा, जो नए क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर रही थीं।



सनातन बचाने के लिए बनानी होगी ISIS-तालिबान जैसी सेना: यति नरसिंहानंद



मतदाता सूची भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं

SIR (एसआईआर) के आधार पर वोटर लिस्ट तो ली जाएगी, लेकिन राज्य स्तर पर फिर से संशोधन होगा। जल्दबाजी में तैयार होने वाली यह सूची भी विवाद का कारण बन सकती है। ऐसे में आरक्षण और प्रतिनिधित्व दोनों पर सवाल गहराएंगे।



नए जिलों में स्थिति और जटिल

मऊगंज, मैहर और पांडुर्णा जैसे नए जिलों में पहले यह तय करना होगा कि कौन सा क्षेत्र शहरी है और कौन सा ग्रामीण। जब यही स्पष्ट नहीं होगा तो आरक्षित सीटों का निर्धारण और भी मुश्किल हो जाएगा।



एमपी,छत्तीसगढ़ के आला अफसरों ने बनाई रेंटल प्रॉपर्टी, मकान,दुकान के किराए से हो रही लाखों की कमाई



आगे के चुनावों पर भी असर

अगर परिसीमन 2028 तक टलता है तो इसका असर सिर्फ स्थानीय चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा। आगे होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी आरक्षण और सीटों के बंटवारे पर असमंजस बना रह सकता है।



आरक्षण का वादा, जमीन पर अधूरा

मध्यप्रदेश में चुनाव समय पर हो सकते हैं, लेकिन महिला आरक्षण का पूरा लाभ मिलना मुश्किल दिख रहा है। जब तक परिसीमन नहीं होगा, तब तक आरक्षण सिर्फ कागजों में रहेगा और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा।





Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • चुनाव आयोग
  • वोटर लिस्ट
  • एसआईआर
  • नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव
  • महिला आरक्षण