खत्म होगा सालों का इंतजार! एक साल में पूरी होगी विभागीय जांच, समय पर मिलेगा प्रमोशन

Amresh Kushwaha | Sept 15, 2026, 07:56 IST
समय पर मिलेगा अफसरों-कर्मियों को प्रमोशन
मध्य प्रदेश में विभागीय जांच के दस हजार से ज्यादा मामले छह से दस साल से लंबित हैं। इससे कर्मचारियों के प्रमोशन अटके हैं। सरकार अब जांच और एसीआर साल भर में पूरी करने के लिए नई उच्चस्तरीय समिति बना रही है, जिससे जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में विभागीय जांच के दस हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।
  • इनमें से कई मामले छह से दस साल पुराने हैं।
  • जांच पूरी न होने से कर्मचारियों के प्रमोशन अटक रहे हैं।
  • सरकार अब विभागीय जांच साल भर में पूरी करने की तैयारी कर रही है।
  • इसके लिए सरकार ने एक नई उच्चस्तरीय समिति बनाई है।

मध्य प्रदेश सरकार के दफ्तरों में विभागीय जांच के मामले सालों से अटके हैं। मिली जानकारी के मुताबिक दस हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें से ज्यादातर मामले छह से दस साल पुराने हैं। जांच पूरी न होने का सीधा असर अफसरों और कर्मचारियों के प्रमोशन पर पड़ रहा है। अब सरकार ने इस समस्या को सुलझाने का फैसला किया है।



क्यों अटकते हैं प्रमोशन

सरकारी महकमों में जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण जांच में देरी होती है। बाबूशाही और कागजी कार्रवाई से मामले लंबे समय तक अटके रहते हैं। विभागीय जांच यानी डीई (Departmental Enquiry) के मामलों की संख्या दस हजार से ज्यादा है।



यह सभी मामले पिछले छह से दस सालों से लंबित हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, कर्मचारी का प्रमोशन रुका रहता है। इसी वजह से डीपीसी यानी DPC (Departmental Promotion Committee) में भी देरी होती है।



अब सरकार ने विभागीय जांच को साल भर में पूरा करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही एसीआर यानी ACR (Annual Confidential Report) भी उसी साल लिखी जाएगी। इससे प्रमोशन की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकेगी। यह कदम कर्मचारियों के हित में उठाया गया बताया जा रहा है।



मैदानी कर्मचारियों की दिक्कत

एसीआर को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी मैदानी कर्मचारियों को होती है। नियम कहता है कि ट्रांसफर होने पर उस साल की एसीआर समय पर लिखी जानी चाहिए। वहीं, मैदानी स्तर पर ऐसा अक्सर नहीं हो पाता। जब प्रमोशन के समय एसीआर की जरूरत पड़ती है, तो नई मुश्किल शुरू होती है।



कर्मचारी को अपने पुराने अधिकारी को ढूंढना पड़ता है। यह पता लगाना पड़ता है कि वह अधिकारी अब भी उसी दफ्तर में हैं या नहीं। यदि अधिकारी का भी ट्रांसफर हो चुका हो, तो मामला और उलझ जाता है। इस वजह से एसीआर के मामले लंबे समय तक लटके रहते हैं। इसका सीधा असर डीपीसी में प्रमोशन पर पड़ता है।



डिजिटल दौर में भी अड़चन

वर्तमान में ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद विभागों में तालमेल की कमी है। हर विभाग अपने तरीके से मानव संसाधन का काम कर रहा है। गोपनीय प्रतिवेदन यानी सीआर को लेकर भी कोई एक व्यवस्था नहीं है। पहले अलग से कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग हुआ करता था।



यह विभाग कार्यप्रणाली में सुधार और एकरूपता लाने का काम करता था। अब ऐसी केंद्रीकृत व्यवस्था न होने से कई मामले अटक रहे हैं। डिजिटल दौर में भी कामकाज ऑफलाइन तरीके से चल रहा है। यही वजह है कि तकनीक होने के बाद भी असली सुधार नहीं दिख रहा।



सालों क्यों लटकती जांच

सरकारी विभागों में जांच की समय सीमा सिर्फ कागजों तक सीमित है। आरोप पत्र जारी होने से लेकर अंतिम निर्णय तक लंबा समय लगता है। कई बार यह प्रक्रिया महीनों नहीं, बल्कि छह साल तक खिंच जाती है। तकनीकी और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण हजारों मामले लंबित पड़े हैं।



नियमों में स्पष्टता न होने से भी परेशानी बढ़ती है। इस वजह से कई मामले अदालत और ट्रिब्यूनल तक पहुंच जाते हैं। इससे सरकार पर भी कानूनी दबाव बढ़ता है। कर्मचारियों का भरोसा भी व्यवस्था से कम होता जा रहा है।



सुधार के लिए नई समिति

सरकार ने कामकाज को बेहतर और डिजिटल बनाने के लिए नई समिति बनाई है। यह उच्चस्तरीय समिति डीई पोर्टल के कामकाज की समीक्षा करेगी। समिति इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मंजूरी भी देगी। इसके अलावा यह समिति कर्मचारी प्रबंधन से जुड़े सुझाव भी देगी। सालाना रिपोर्ट यानी सीआर और विभागीय जांच के नियमों में बदलाव पर भी समिति काम करेगी।



सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। नई समिति के गठन से कर्मचारियों में उम्मीद बढ़ी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में विभागीय जांच के मामले साल भर में निपटेंगे। इससे एसीआर और प्रमोशन से जुड़ी अड़चनें भी दूर होंगी।



नई समयसीमा तय

सरकार ने डीई के मामलों के लिए नई समयसीमा तय की है। अब 45 दिन के भीतर आरोप पत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद छह महीने में जांच प्रतिवेदन पूरा करना होगा। अगले तीन महीने में जांच प्रतिवेदन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।



इस तरह पूरी प्रक्रिया करीब एक साल में पूरी हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को समय पर प्रमोशन मिलने की उम्मीद बढ़ी है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कर्मचारी संगठन भी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। आने वाले महीनों में इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सरकारी कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों से जुड़ी है। समय पर प्रमोशन न मिलना कर्मचारी के करियर और सम्मान पर असर डालता है। संविधान समानता और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार देता है। लंबित जांच से यह अधिकार प्रभावित होता है। पारदर्शी और तय समय सीमा वाली व्यवस्था प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाती है।



इससे भ्रष्टाचार और मनमानी की गुंजाइश भी कम होती है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से कामकाज आसान और साफ होगा। आम जनता को भी बेहतर प्रशासनिक सेवा मिलेगी। इसलिए यह सुधार कर्मचारियों के साथ पूरे सिस्टम के लिए जरूरी है।



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