भोजशाला विवाद पर 5 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष की चुनौती
हाई कोर्ट ने 15 मई 2026 को अपने फैसले में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना था। साथ ही हिंदू समाज को रोज पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर दोनों पक्षों की नजर रहेगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी सुनवाई की तारीख तय कर चुका है, लेकिन सुनवाई टल गई थी। अब देखना होगा कि गुरुवार को कोर्ट में क्या कार्यवाही होती है। आगे के लिए क्या निर्देश दिए जाते हैं।
हाई कोर्ट ने 15 मई को क्या फैसला दिया था?
भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने 15 मई 2026 को फैसला सुनाया था। जानकारी के मुताबिक, हाई कोर्ट ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर मानते हुए हिंदू समाज को प्रतिदिन पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया था।
इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से पांच याचिकाएं दाखिल की गईं। इन याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को क्या निर्देश दिए थे?
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को निर्देश दिए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार से नमाज की दूसरी जगह तय करने को कहा था। यह व्यवस्था मुस्लिम समाज के लिए शुक्रवार की जुमे की नमाज को लेकर थी।
इसके बाद प्रशासन ने दूसरी जगह तलाशने की प्रक्रिया शुरू की। कोर्ट चाहता था कि मुस्लिम समाज को नमाज पढ़ने की सुविधा मिलती रहे। साथ ही मामले की सुनवाई भी जारी रहे।
पहले चालीस पीर दरगाह के पास तय हुई थी जगह
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के बाद प्रशासन ने नमाज की जगह तय की है। पहले चालीस पीर दरगाह के पास खाली जमीन चुनी गई थी। लेकिन मुस्लिम पक्ष को यह जगह मंजूर नहीं थी। उनका कहना था कि यह जगह भोजशाला से काफी दूर है।
इसलिए उन्होंने वहां नमाज पढ़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने नमाज के लिए दूसरी जगह तय की है।
अब खसरा नंबर 612 पर पढ़ी जा रही नमाज
पहले चालीस पीर दरगाह के पास नमाज की जगह तय हुई थी। इस जगह को लेकर आपत्ति सामने आई थी। इसके बाद प्रशासन ने नमाज के लिए दूसरी जगह तय की है।
यह जगह भोजशाला के पीछे दाईं ओर है। राजस्व रिकॉर्ड में इस जमीन का खसरा नंबर 612 है। अब मुस्लिम समाज के लोग यहीं जुमे की नमाज पढ़ रहे हैं। हर शुक्रवार को यहां नमाज अदा की जाती है।
Bhojshala Namaz Arrangement के तहत प्रशासन यहां सुरक्षा के इंतजाम करता है। नमाज के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से निगरानी रखी जाती है। फिलहाल शुक्रवार की नमाज इसी जगह पर पढ़ी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में कई बार टल चुकी है सुनवाई
भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में पहले भी सुनवाई होनी थी। लेकिन कई बार सुनवाई टल गई थी। इस वजह से मामला आगे नहीं बढ़ सका है।
अब 29 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय बताई गई है। सुप्रीम कोर्ट में पांच याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इन याचिकाओं में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला लेता है। हाई कोर्ट के फैसले पर अदालत क्या निर्देश देती है। इस पर सभी की नजर रहेगी।
भोजशाला विवाद में अब आगे क्या होगा?
भोजशाला मामले में फिलहाल दो प्रमुख बातें सामने हैं। पहली, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के 15 मई 2026 के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
दूसरी, सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई के अंतरिम निर्देश के बाद प्रशासन ने मुस्लिम समाज के लिए जुमे की नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के तहत भोजशाला के पिछले हिस्से में स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन पर नमाज अदा की जा रही है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल 29 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई में अदालत की कार्यवाही और अगले निर्देशों का इंतजार है।
FAQ
- भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब है?
धार की भोजशाला से जुड़े विवाद में मुस्लिम पक्ष की पांच याचिकाओं पर 29 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। - मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में किस फैसले को चुनौती दी है?
मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी है, जिसने हिंदू समाज को भोजशाला में प्रतिदिन पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया था। - भोजशाला में अभी जुमे की नमाज कहां हो रही है?
मुस्लिम समाज के लोग भोजशाला के पीछे दाईं ओर स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन पर शुक्रवार की नमाज अदा कर रहे हैं। - भोजशाला में नमाज के लिए पहले कौन सी जगह तय की गई थी?
प्रशासन ने शुरुआत में चालीस पीर दरगाह के पास खाली जमीन तय की थी। मुस्लिम पक्ष ने भोजशाला से दूरी होने के कारण आपत्ति जताई। इसके बाद खसरा नंबर 612 पर व्यवस्था की गई।