फार्मेसी काउंसलिंग विवाद: MP में 250 फार्मेसी कॉलेज, एडमिशन पोर्टल पर केवल 50
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- वेरिफिकेशन के बीच काउंसलिंग शुरू करने से उलझा पेंच
- सत्यापन न होने के कारण विभाग के पोर्टल से गायब 200 कॉलेज
- फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए छात्रों के सामने नहीं विकल्प
- पोर्टल पर न होने से कॉलेजों में सीट खाली रहने की आशंका
- तकनीकी शिक्षा विभाग की गलती से फार्मेसी कॉलेजों में नाराजी
मध्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा विभाग की फार्मेसी काउंसलिंग को लेकर विवाद (DTE Counselling Dispute) खड़ा हो गया है। इससे इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले हजारों छात्र भटक रहे हैं।
ज्यादातर फार्मेसी कॉलेजों में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया के बीच में ही ऑनलाइन च्वॉइस फिलिंग शुरू कर दी गई है। इससे 200 कॉलेज काउंसलिंग लिस्ट में नजर ही नहीं आ रहे। वहीं छात्रों को भी प्रवेश के लिए पोर्टल पर केवल 50 कॉलेज ही उपलब्ध हैं।
भोपाल के 46 कॉलेज सूची से गायब
भोपाल में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों की संख्या 50 है। जबकि पूरे प्रदेश में ऐसे 250 कॉलेज हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा अधूरे सत्यापन के बीच काउसिंग शुरू कर देने से 200 कॉलेजों को सूची में जगह नहीं मिल पाई है।
भोपाल के केवल 4 फार्मेसी कॉलेज ही काउंसलिंग सूची में दिख रहे हैं। इससे छात्रों में प्रवेश को लेकर उलझन है, वहीं कॉलेज प्रबंधन काउंसलिंग की आखिरी तारीख और सीट खाली रहने की आशंका से चिंतित हैं।
कॉलेज चयन के विकल्प सीमित
दरअसल फार्मेसी कॉलेजों में सत्यापन पूरा नहीं हुआ है। काउंसलिंग को लेकर उलझन खड़ी होने के बाद अब अधिकारी कॉलेजों को सूची में शामिल करने की सफाई दे रहे हैं।
हांलाकि, अब तक अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई है। फार्मेसी कॉलेज प्रबंधन काउंसलिंग प्रक्रिया को विभाग का उतावनापन बता रहे हैं। उनका कहना है सत्यापन से पहले काउंसलिंग गलत है। कॉलेज भी सूची में शामिल नहीं है तो छात्र कैसे उनका चयन कर सकेंगे।
छात्रों में एडमिशन की चिंता
फार्मेसी कॉलेज ( Pharmacy College ) में प्रवेश के लिए पसंदीदा कॉलेजों के विकल्प को लेकर छात्र चिंतित हैं। उनका कहना है अपने शहर या आसपास और बेहतर रिजल्ट और प्लेसमेंट वाले कई कॉलेज सूची में नहीं हैं।
काउंसलिंग की आखिरी तारीख भी 20 जुलाई रखी गई है। इस वजह से उन्हें काउंसलिंग में शामिल होकर पसंद न होने पर भी च्वाइस फिलिंग का विकल्प भरना पड़ रहा है। कई छात्र तो बेहतर कॉलेज का विकल्प न होने से भविष्य में अध्ययन की गुणवत्ता और प्लेसमेंट को लेकर परेशान हैं।
फार्मेसी कॉलेज प्रबंधनों की मांग
कॉलेज प्रबंधन असमय काउंसिंग कराने से नाराज हैं। उनके द्वारा तकनीकी शिक्षा विभाग को भी इस स्थिति से अवगत कराया गया है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है जब तक कॉलेजों में पाठ्यक्रम संचालन की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक काउंसलिंग नहीं करानी चाहिए।
प्रवेश के बाद किसी कॉलेजों को बाहर किया जाता है तो छात्रों का नुकसान होगा। वहीं सूची में न होने और काउंसलिंग की तारीख बीतने पर कॉलेजों में सीट नहीं भरी जा सकेंगी। कॉलेज प्रबंधन द्वारा सामूहिक रूप से विरोध जताया गया है।
FAQ
- DTE काउंसलिंग विवाद क्या है और क्यों हुआ?
DTE ने 1 जुलाई से चॉइस फिलिंग शुरू की। लेकिन भोपाल के 50 में से 4 फार्मेसी कॉलेज दिखे। राज्य के 250 में से 50 ही लिस्ट में हैं। विभाग ने कॉलेजों की मंजूरी से पहले काउंसलिंग शुरू की। नियमों के कारण अब नए कॉलेज नहीं जुड़ सकते। इससे छात्रों को सीमित विकल्प मिलेंगे। - क्या DTE चॉइस फिलिंग विंडो को टाल सकता है?
प्रभावित कॉलेजों ने विंडो टालने की मांग की है। जब तक सभी मंजूरी पूरी न हो जाएं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि शुरू होने पर बदलाव से केस होगा। लिस्टेड संस्थान चुनौती देंगे। DTE को नियमों के दायरे में रहकर फैसला लेना है। पोस्ट-कमेंसमेंट एडिशन पर रोक है। - फार्मेसी कॉलेज लिस्ट अधूरी होने से छात्रों पर क्या असर होगा?
छात्रों को कम विकल्प मिलेंगे। वे मजबूरी में कम पसंदीदा कॉलेज चुनेंगे। मेरिट के अनुसार एडमिशन नहीं मिलेगा। प्लेसमेंट में देरी भी हो सकती है। 80% कॉलेज पोर्टल पर नहीं दिख रहे। इससे हजारों छात्रों का करियर प्रभावित होगा। DTE काउंसलिंग विवाद से प्रवेश सत्र अव्यवस्थित हो सकता है।
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