मध्य प्रदेश में 1.20 लाख सरकारी पद खत्म, नहीं होगी नई भर्ती
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में एक लाख 20 हजार सरकारी पद डाइंग कैडर घोषित किए गए हैं।
- इन पदों पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी।
- यह आधिकारिक आदेश मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है।
- कार्यभारित, आकस्मिकता निधि और कोटवार पद इस फैसले में शामिल हैं।
- नियम तोड़ने पर कलेक्टर और विभागाध्यक्ष पर कार्रवाई होगी।
MP में 1.20 लाख पद डाइंग कैडर घोषित
मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के एक लाख 20 हजार सरकारी पदों को डाइंग कैडर घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि इन पदों पर अब कोई नई भर्ती नहीं होगी। जैसे-जैसे ये पद खाली होते जाएंगे, वैसे-वैसे ये पद अपने आप खत्म हो जाएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इस फैसले को लागू करने के लिए आधिकारिक आदेश जारी किया है। यह फैसला पहले कैबिनेट बैठक में लिया गया था। अब उसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
किन पदों पर लगी रोक?
यह फैसला मुख्य रूप से चार तरह के पदों पर लागू होता है।
पहले हैं कार्यभारित पद, जो सड़क, सिंचाई और भवन निर्माण जैसी परियोजनाओं के लिए अस्थायी रूप से बनाए जाते थे।
दूसरे हैं आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) के पद, जिनके कर्मचारियों को अस्थायी खर्च के लिए तय फंड से वेतन दिया जाता था।
तीसरे और चौथे हैं संविदा और कोटवार पद। इन पर निश्चित अवधि के अनुबंध के आधार पर नियुक्तियां होती थीं। ये सभी पद अब खत्म किए जा रहे हैं।
कितने पद किस कैटेगरी में?
कार्यभारित श्रेणी के 16 हजार 810 पद समाप्त किए जा रहे हैं। आकस्मिकता निधि के 55 हजार 808 पद इस फैसले में शामिल हैं। संविदा और कोटवार श्रेणी के 34 हजार 497 पद भी खत्म होंगे। इस तरह कुल मिलाकर एक लाख 20 हजार से ज्यादा पद डाइंग कैडर में डाले गए हैं।
नई भर्ती सिर्फ इन पदों पर
अब सवाल उठता है कि भविष्य में भर्ती कहां होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने साफ किया है कि अब सिर्फ नियमित और संविदा पदों पर ही भर्ती की जाएगी। बाकी सभी तरह के पद धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे। इससे भर्ती प्रक्रिया ज्यादा साफ और व्यवस्थित होगी।
नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश में यह भी लिखा है कि यदि कोई अफसर इन खत्म किए गए पदों पर नियुक्ति करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें कलेक्टर, कमिश्नर और विभागाध्यक्ष सभी शामिल हैं। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि यह आदेश कागज पर नहीं, जमीन पर लागू होगा।
यह सख्ती इसलिए जरूरी है क्योंकि अतीत में ऐसे आदेशों को नजरअंदाज किया जाता रहा है। इस बार सीधे जिम्मेदारी तय की गई है।
आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी असर
इस फैसले का असर सिर्फ नई भर्तियों पर नहीं पड़ेगा। नियमित पदों पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को भी मार्च 2027 तक हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी जगह नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी सरकार धीरे-धीरे पूरे ढांचे को बदलना चाहती है।
सरकार का दावा: वित्तीय बोझ होगा कम
सरकार का कहना है कि यह फैसला राज्य पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए लिया गया है। इन अस्थायी और अनुबंध आधारित पदों को बनाए रखने में हर साल बड़ी रकम खर्च होती थी। पदों को खत्म करने से लंबे समय में सरकारी खजाने पर दबाव घटेगा। साथ ही प्रशासनिक जटिलता भी कम होगी।
FAQ
- डाइंग कैडर का मतलब क्या होता है?
डाइंग कैडर उन पदों को कहते हैं जिन पर भविष्य में कोई नई भर्ती नहीं होती। जो लोग अभी इन पदों पर काम कर रहे हैं, वे काम करते रहेंगे। लेकिन जैसे-जैसे ये लोग रिटायर होंगे या पद खाली होगा, वह पद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। यानी यह एक तरह से धीरे-धीरे पद को समाप्त करने की प्रक्रिया है।
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