ई-अटेंडेंस पर जल्द आएगा नया सर्कुलर, देरी पर संकुल प्राचार्यों को मिलेगा राहत देने का अधिकार

Amresh Kushwaha | Aug 26, 2026, 08:35 IST
ई-अटेंडेंस पर जल्द आएगा नया सर्कुलर
मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों के विरोध के बाद स्कूल शिक्षा विभाग जल्द नया सर्कुलर लाएगा। संकुल प्राचार्यों को शिक्षकों को राहत देने का अधिकार मिलेगा। जून महीने का रुका वेतन भी शिक्षकों को जारी किया जाएगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों ने विरोध जताया था।
  • अब स्कूल शिक्षा विभाग नया सर्कुलर लाने की तैयारी में है।
  • संकुल प्राचार्यों को शिक्षकों को राहत देने का अधिकार मिलेगा।
  • उचित कारण होने पर देरी पर छूट दी जा सकेगी।
  • जून महीने का रुका वेतन भी शिक्षकों को दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शिक्षकों के विरोध के बाद विभाग अब पॉवर डेलिगेट करने की तैयारी में है। जल्द ही जिलों के संकुल प्राचार्यों को खास अधिकार दिए जाएंगे। इससे शिक्षकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।



संकुल प्राचार्यों को अधिकार

संकुल प्राचार्य अपने क्षेत्र के स्कूलों की निगरानी करते हैं। अब उन्हें ई-अटेंडेंस में देरी पर राहत देने का अधिकार मिलेगा। यह अधिकार सिर्फ उचित कारण होने पर ही मिलेगा। विभाग जल्द ही इसका आदेश जारी करने वाला है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों में सर्कुलर जारी होगा। इस सर्कुलर में साफ नियम लिखे जाएंगे। संकुल प्राचार्य किन हालात में राहत दे सकेंगे, यह भी बताया जाएगा।



क्यों उठाया गया कदम

शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस सिस्टम को लेकर कई बार शिकायत की थी। कुछ शिक्षकों ने इसे मुश्किल और अव्यवहारिक बताया था। इसी विरोध के बाद विभाग ने नया रास्ता निकाला। आयुक्त सिंह ने बताया कि अब स्थिति सामान्य हो चुकी है। रोजाना करीब 97 से 98 प्रतिशत शिक्षक ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। यही आंकड़ा देखकर विभाग ने राहत देने का फैसला किया। अब जो शिक्षक बचे हैं, उनकी दिक्कतें अलग तरह की हैं। इसलिए संकुल प्राचार्यों को स्थानीय स्तर पर फैसला लेने का अधिकार दिया जाएगा।



मनमानी पर रहेगी नजर

नए मार्गदर्शी सिद्धांत में साफ शर्तें लिखी जाएंगी। इसमें बताया जाएगा कि किन कारणों को व्यवहारिक दिक्कत माना जाएगा। संकुल प्राचार्य मनमानी तरीके से राहत नहीं दे सकेंगे। हर फैसले का ठोस आधार होना जरूरी होगा। विभाग का मकसद सिस्टम को साफ और भरोसेमंद बनाना है। इससे ई-अटेंडेंस में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। आयुक्त सिंह ने कहा कि शिक्षकों को परेशान करना मकसद नहीं है। विभाग बस एक बेहतर व्यवस्था लागू करना चाहता है।



जून का वेतन होगा जारी

जिन शिक्षकों का जून महीने का वेतन रुका था, उन्हें राहत मिलेगी। ई-अटेंडेंस की वजह से जिनकी सैलरी कटी थी, वह अब जारी होगी। यह फायदा उन्हीं शिक्षकों को मिलेगा जिनका जुलाई और अगस्त का रिकॉर्ड सही है। यानी हाल के महीनों में नियमित हाजिरी जरूरी होगी। यह फैसला उन शिक्षकों के लिए राहत भरा है जो शुरुआती दिक्कतों से जूझ रहे थे। कई शिक्षकों को तकनीकी वजहों से समस्या हुई थी। अब उनका बकाया वेतन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।



आदतन लापरवाही पर सख्ती

हालांकि हर शिक्षक को यह छूट नहीं मिलेगी। जो शिक्षक आदतन देर से आते हैं, उनकी सैलरी कटती रहेगी। जो शिक्षक जानबूझकर ई-अटेंडेंस नहीं लगाते, उन पर भी कार्रवाई होगी। विभाग साफ कर चुका है कि दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं होगा। आयुक्त सिंह ने बताया कि शिक्षक साफ्टवेयर में भी कुछ खामियां हैं। इन्हें जल्द ठीक किया जाएगा।



हाल ही में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने शिक्षकों को हो रही दिक्कतों की जानकारी दी थी। विभाग अब उन सुझावों पर भी काम करेगा। शिक्षकों से कहा गया है कि वे अपनी दिक्कत सीधे संकुल प्राचार्य को बता सकते हैं। हर मामले की सुनवाई की जाएगी। इससे शिक्षकों और विभाग के बीच भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में इसका असर स्कूलों में दिखेगा।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर लाखों सरकारी शिक्षकों की रोजी रोटी और सम्मान से जुड़ी है। ई-अटेंडेंस जैसे डिजिटल सिस्टम में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन शिक्षकों की व्यवहारिक दिक्कतों को अनदेखा करना संविधान के श्रम अधिकार और गरिमा के सिद्धांत के खिलाफ होगा।



यह खबर बताती है कि सरकार डिजिटल निगरानी और मानवीय संवेदनशीलता में संतुलन बना रही है। शिक्षकों का वेतन रोकना सीधे उनके जीवन स्तर पर असर डालता है, इसलिए यह सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा है। साथ ही यह पारदर्शी शासन व्यवस्था और जवाबदेही का उदाहरण भी है, जो कानून सम्मत तरीके से लागू हो रहा है।



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