MP में गहराया बिजली का संकट: 17 हजार मेगावाट पार डिमांड, किसानों के सामने आई सिंचाई की परेशानी
रबी सीजन सिंचाई पर बिजली की मार
अक्टूबर की शुरुआत में ही सरसों की बुवाई शुरू हो जाती है। यह बिजली संकट ऐसे समय आया है, जब खेतों को पानी की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली वितरण कंपनियां रबी सीजन में सिंचाई के लिए 10 घंटे लगातार बिजली नहीं दे पा रही हैं।
इससे किसानों में सरकार और बिजली कंपनियों के खिलाफ काफी नाराजगी है। जरा सोचिए, खेत तैयार हैं, फसल बोने का समय है, लेकिन सिंचाई के लिए बिजली ही नहीं मिल रही।
लेकिन इस पूरे मामले की असली तस्वीर रात के आंकड़ों में छिपी है।
रात में क्यों नहीं पूरी हो रही डिमांड?
दिन में बिजली बनाने वाले सभी सोलर पावर प्लांट रात में बिजली नहीं दे पाते। रिपोर्ट के मुताबिक, रात में सोलर और विंड प्लांट से बिजली का उत्पादन 300 से 400 मेगावाट तक घट जाता है। प्रदेश में सोलर प्लांट की अनुबंधित क्षमता पांच हजार 270 मेगावाट और विंड प्लांट की क्षमता दो हजार 778 मेगावाट है।
थर्मल प्लांट का रखरखाव, अनुमति किसने दी?
राज्य, केंद्र और निजी थर्मल पावर प्लांट की कई यूनिट सालाना मेंटेनेंस के चलते बंद हैं। इसके कारण करीब दो हजार 400 मेगावाट बिजली कम बन रही है, जबकि थर्मल प्लांट की कुल अनुबंधित क्षमता 10 हजार 213 मेगावाट है।
रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि इन प्लांट्स के मेंटेनेंस का शेड्यूल कौन तय करता है। जब रबी सीजन शुरू होने वाला है, तब भी मेंटेनेंस का काम जारी रहा। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि इसकी अनुमति किसने दी।
हाइडल प्लांट बंद, 400 मेगावाट की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, गांधीनगर, इंदिरा सागर, राजघाट और एक अन्य हाइडल प्लांट बंद होने से 400 मेगावाट बिजली की कमी हो गई है। पानी की कमी के चलते ओंकारेश्वर हाइडल प्लांट भी पहले ही बंद किया जा चुका है। इन हाइडल प्लांट्स की अनुबंधित क्षमता 3286 मेगावाट है।
बैंकिंग में दिए 500 मेगावाट नहीं लौटे
मध्य प्रदेश दूसरे राज्यों को 500 मेगावाट बिजली बैंकिंग (उधार देना) में दे रहा है। मांग बढ़ने पर यह बिजली वापस नहीं मिल पा रही। रिपोर्ट के मुताबिक शाम 5 के बाद बिजली कंपनियों के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
एनर्जी एक्सचेंज में 15 रुपए यूनिट
रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के असर से देशभर में बिजली संकट की स्थिति बनी हुई है। कम बारिश और जलस्तर घटने से हाइड्रो पावर यानी पानी से बनने वाली बिजली का उत्पादन कम हो गया। वहीं, गर्मी और उमस के कारण बिजली की मांग बढ़ गई। साल 2026 में भारत में सामान्य से करीब 13% कम बारिश हुई।
एनर्जी एक्सचेंज यानी बिजली खरीदने-बेचने के बाजार में खरीदारों की मांग 1 लाख मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि बेचने वालों के पास सिर्फ 10 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध है। ऐसे में 15 रुपए प्रति यूनिट की कीमत पर भी बिजली खरीदी जा रही है।
केंद्र की एडवाइजरी, फिर भी देरी
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने करीब 10 जुलाई को सभी राज्यों के ऊर्जा विभागों और बिजली कंपनियों को एक सलाह पत्र भेजा था। इसमें अक्टूबर में बिजली की मांग काफी बढ़ने का अनुमान जताया गया था। साथ ही, सिंचाई के लिए पहले से तैयारी करने की बात भी कही गई थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य के ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के अधिकारियों ने इस सलाह को गंभीरता से नहीं लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, अब इसका खामियाजा मोहन सरकार को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, इस दावे पर विभाग का पक्ष रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
बैटरी बैकअप बन सकता है विकल्प
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य के ऊर्जा विभाग और कंपनियों के अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका खामियाजा अब मोहन सरकार को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, इस मामले में विभाग का पक्ष रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
प्रयास जारी, बोले ऊर्जा मंत्री तोमर
ऊर्जा मंत्री Pradyuman Singh Tomar के बयान में 11874 से 17124 मेगावाट का आंकड़ा है। Madhya Pradesh electricity demand एक साल में करीब 5000 मेगावाट बढ़ी है। अब देखना यह है कि रात की कमी कैसे पूरी होती है।
अगले सात दिन में बढ़ सकता है संकट
आने वाले दिनों में बिजली की परेशानी और बढ़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले सात दिनों में रोजाना बिजली की मांग 18 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है।
इसके मुकाबले करीब 15 हजार 800 मेगावाट बिजली उपलब्ध होने का अनुमान है।
ऐसे में मांग और उपलब्धता के बीच दो हजार 200 मेगावाट का अंतर रह सकता है।
इस वजह से फिलहाल बिजली कटौती पूरी तरह बंद होने की उम्मीद कम है।
बिजली संकट पर सरकार की अगली चुनौती
प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ने से सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा परेशानी सामने आ रही है।
सरकार दूसरे राज्यों से बिजली लेकर सप्लाई सुधारने की कोशिश कर रही है। लेकिन आने वाले दिनों में मांग 18 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
ऐसे में किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।