उपभोक्ताओं पर दोहरी मार: मध्यप्रदेश में बिजली हुई महंगी, 8 घंटे होगी कटौती
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में बिजली अचानक महंगी हो गई है।
- गांवों में अब रोजाना 8 घंटे बिजली कटौती हो रही है।
- पनबिजली उत्पादन में 74 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
- बिजली कंपनियों ने एफसीपीपीए सरचार्ज बढ़ाकर बिल महंगा कर दिया है।
- कम बारिश से बांधों में पानी घटा, जिससे संकट बढ़ा है।
बिजली हुई महंगी, गांवों में बत्ती गुल
मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ बिजली के दाम बढ़ गए हैं। दूसरी तरफ गांवों में कटौती भी शुरू हो गई है। भोपाल जैसे शहर के आसपास के गांव भी इससे अछूते नहीं हैं। इसकी दो बड़ी वजह सामने आई हैं। पहली वजह पनबिजली उत्पादन में भारी गिरावट है। दूसरी वजह बिजली कंपनियों का सरचार्ज बढ़ाना है।
गांवों में 8 घंटे कटौती
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब रोजाना 8 घंटे बिजली गुल रहती है। भोपाल के गांवों में भी रुक रुक कर कटौती हो रही है। बिजली कंपनियां शहरों को सप्लाई बनाए रखना चाहती हैं। इसलिए ग्रामीण फीडरों पर लोड मैनेजमेंट किया जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए समय पर बिजली नहीं मिल पा रही है।
बिल में कितनी बढ़ोतरी
बिजली कंपनियों ने एफसीपीपीए (Fuel Cost and Power Purchase Agreement) सरचार्ज बढ़ा दिया है। यह सरचार्ज 1.11 प्रतिशत से बढ़कर 3.77 प्रतिशत हो गया है। यानी पिछले महीने की तुलना में 2.66 प्रतिशत अतिरिक्त भार जुड़ेगा। यह बढ़ोतरी विद्युत विनियामक आयोग की मंजूरी के बाद लागू हुई है।
इसका असर प्रदेश के करीब दो करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। भोपाल में करीब 1.25 लाख घरेलू उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे। जिन घरों में 200 से 300 यूनिट बिजली खर्च होती है, उनका बिल बढ़ेगा। बिल में 35 से 87 रुपए तक अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है। यानी 200 से 500 यूनिट खर्च करने वाले परिवारों का बिल सीधे बढ़ जाएगा।
पनबिजली उत्पादन में गिरावट
प्रदेश में जल विद्युत उत्पादन में भारी कमी आई है। पिछले साल 27 जुलाई तक बांधों से 4.95 करोड़ यूनिट बिजली बनी थी। इस साल यह घटकर सिर्फ 1.27 करोड़ यूनिट रह गई। यानी करीब 74 प्रतिशत उत्पादन घट गया है। यह गिरावट पिछले कई सालों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है।
बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसे प्रोजेक्ट में भी उत्पादन घटा है। बाणसागर में पिछले साल 67.1 यूनिट बिजली बनी थी। इस साल यह घटकर 34.7 यूनिट रह गई। बरगी में यह 90.4 से घटकर 17.7 यूनिट रह गया। इंदिरा सागर में उत्पादन 257 यूनिट से घटकर 33.7 यूनिट रह गया। ओंकारेश्वर में भी 125 यूनिट से घटकर 20.3 यूनिट रह गया। अन्य छोटी परियोजनाओं में उत्पादन 25.5 से घटकर 20.9 यूनिट रह गया।
बढ़ती मांग, घटता उत्पादन
एक तरफ बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। 27 जुलाई 2025 को प्रदेश में अधिकतम मांग 10 हजार 24 मेगावाट थी। इस साल 27 जुलाई को यह बढ़कर 13 हजार 757 मेगावाट पहुंच गई। यानी एक साल में मांग करीब 37 प्रतिशत बढ़ गई है। गर्मी और बढ़ती आबादी से बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है।
बिजली की सप्लाई भी बढ़ी है। यह 21.45 करोड़ यूनिट से बढ़कर 28.72 करोड़ यूनिट हो गई है। लेकिन उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। इसी वजह से बिजली कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। कंपनियों को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
कम बारिश का असर
ऊर्जा विभाग के मुताबिक प्रदेश के करीब 15 जिलों में कम बारिश हुई है। यहां सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, उमरिया, कटनी, मंडला, बालाघाट और सिवनी में पानी की कमी है। इन्हीं जिलों से बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांधों में पानी आता है। पानी की कम आवक से उत्पादन सीमित करना पड़ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है।
एक्सपर्ट का क्या कहना है
मध्य प्रदेश पावर जनरेशन कंपनी के एमडी (Managing Director) मंजीत सिंह ने बात रखी। उन्होंने पूरे मामले पर जानकारी दी। उनके अनुसार प्रदेश में बारिश सामान्य से कम हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।
उन्होंने बताया कि इसका असर पावर जनरेशन पर पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए लोड मैनेजमेंट करना पड़ रहा है। आने वाले रबी सीजन को देखते हुए मशीनों का मेंटेनेंस भी जरूरी है। इसलिए बिजली उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पिछले साल से इस बार पानी की कमी ज्यादा गंभीर है। बांधों में पानी कम होने से उत्पादन पर लगातार दबाव बना हुआ है। इस वजह से कंपनियों को दूसरे स्रोतों से बिजली जुटानी पड़ रही है। इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है। अंततः यह लागत उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। सिंचाई का समय निकल जाने से फसल पर भी असर पड़ सकता है। शहरी उपभोक्ताओं को भी बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ेगा। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति ही तय करेगी कि हालात कब सुधरेंगे।
मध्य प्रदेश में बिजली संकट की वजह कम बारिश और बढ़ती मांग है। सरचार्ज बढ़ने से आम लोगों की जेब पर सीधा बोझ पड़ा है। आने वाले दिनों में स्थिति सुधरने की उम्मीद अच्छी बारिश पर टिकी है। तब तक उपभोक्ताओं को महंगी बिजली और कटौती दोनों झेलनी पड़ सकती हैं। सरकार और बिजली कंपनियों को जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ी है। बिजली बिल बढ़ना और गांवों में लंबी कटौती हर घर को प्रभावित करती है। पारदर्शी सूचना पाना नागरिकों का अधिकार है, जो सूचना के अधिकार की भावना से मेल खाता है। किसान, छात्र और छोटे व्यापारी बिजली पर निर्भर हैं, इसलिए यह मुद्दा सामाजिक और आर्थिक न्याय से जुड़ता है। सरकारी कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए ऐसी रिपोर्टिंग जरूरी है। यह जानकारी तथ्यों पर आधारित है, इसलिए संविधान में दी गई अभिव्यक्ति और सूचना की स्वतंत्रता का सम्मान करती है। पाठकों को सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।
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