MP में हजारों क्विंटल गेहूं बिना बोए बेचा, फर्जी किसानों को दे दिए 4.82 करोड़
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के तीन जिलों में सरकारी गेहूं खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
- फर्जी किसानों ने दूसरों की जमीन पर पंजीयन कराकर खुद को किसान बताया है।
- उत्तर प्रदेश से दो हजार रुपए प्रति क्विंटल में गेहूं खरीदा और एमपी में 2625 में बेचा है।
- एमपी के तीन जिलों में कुल 18 हजार 388 क्विंटल गेहूं सरकारी केंद्रों तक पहुंचाया गया।
- ईओडब्ल्यू जांच के दौरान भी चार करोड़ 82 हजार रुपए का भुगतान होता रहा है।
कैसे हुआ पूरा खेल
मध्य प्रदेश में गेहूं समर्थन मूल्य खरीदी का यह घोटाला एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है। भिंड, मुरैना और राजगढ़ में कुछ लोगों ने फर्जी पंजीयन के जरिए खुद को किसान बताया था। फिर दूसरे प्रदेशों, खासकर उत्तर प्रदेश से गेहूं खरीदकर मध्यप्रदेश के मंडियों और सरकारी खरीदी केंद्रों पर बेच दिया।
मीडिया रिपोर्ट में सामने आया कि करीब 2000 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा गया गेहूं 2625 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर बेचा गया। यानी बिना खेती किए भी प्रति क्विंटल करीब 625 रुपए का सीधा मुनाफा कमाया गया। भिंड के अमहां क्षेत्र में खरीदी शुरू होने से पहले ही यूपी का गेहूं पकड़ा गया था और एफआईआर भी दर्ज हुई थी।
इसी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने दूसरे केंद्रों पर भी यही खेल दोहराया। तीनों जिलों में कुल 18 हजार 388 क्विंटल गेहूं सरकारी खरीदी केंद्रों तक पहुंच गया।
EOW जांच के बीच भी भुगतान
आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने इस मामले में जांच शुरू की। वहीं, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच के दौरान भी फर्जी किसानों को भुगतान होता रहा। तीनों जिलों में कुल चार करोड़ 82 लाख 68 हजार 500 रुपए का भुगतान किया जा चुका है। संदिग्ध पंजीयन तुरंत ब्लॉक होने चाहिए थे, लेकिन जांच के बीच भी फर्जी किसानों को पैसा मिलता रहा।
मुरैना में सबसे बड़ा घोटाला
मुरैना जिले में 32 फर्जी किसानों ने 10 हजार 556 क्विंटल गेहूं बेचकर दो करोड़ 77 लाख नौ हजार 500 रुपए का भुगतान हासिल किया है। भैंसरोली के शिशुपाल यादव ने रात 11:40 बजे 10.53 हेक्टेयर का पंजीयन कराकर 400 क्विंटल गेहूं बेचा और 10 लाख 50 हजार रुपए लिए हैं। नूराबाद के राजेंद्र सिंह ने ग्रामीणों की 10.68 हेक्टेयर जमीन अपने नाम कराई और 410 क्विंटल गेहूं बेचकर 10 लाख 76 हजार रुपए हासिल किए हैं।
भिंड में 23 मामले, 1.83 करोड़ की ठगी
भिंड में 23 किसानों ने छह हजार 972 क्विंटल गेहूं बेचकर दो करोड़ 83 लाख एक हजार 500 रुपए का भुगतान लिया है। लहार के कैलाश नारायण पाठक ने 8.89 हेक्टेयर भूमि दिखाकर 306 क्विंटल गेहूं बेचा और आठ लाख तीन हजार रुपए लिए हैं। अमहां के अलमपुर के राजेश चौहान ने दूसरी जाति के किसान की 9.01 हेक्टेयर जमीन पर पंजीयन कराकर 364 क्विंटल गेहूं बेचा और नौ लाख 55 हजार रुपए हासिल किए।
मछंड की रजनी बघेल के नाम आधा हेक्टेयर जमीन थी, लेकिन पंजीयन 13.33 हेक्टेयर का कराया और 10 लाख 49 हजार रुपए का भुगतान लिया है।
राजगढ़ में सबसे चौंकाने वाला मामला
राजगढ़ में चार किसानों ने 860 क्विंटल गेहूं बेचकर 22 लाख 57 हजार 500 रुपए लिए है। बरखेड़ा के रामबाबू दांगी के पास असल में केवल सवा बीघा जमीन थी, लेकिन रिकॉर्ड में 9.77 हेक्टेयर रकबा दर्ज हो गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि तहसीलदार ने पंजीयन को असत्यापित करार दिया, इसके बावजूद गेहूं की तुलाई हुई और भुगतान भी जारी हो गया है।
कलेक्टरों ने दिए जांच के आदेश
भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि संबंधित तहसीलदार को नोटिस और दोषी पटवारी को निलंबित किया जाएगा। मुरैना के कलेक्टर लोकेश जांगिड़ और राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा ने भी जांच की बात कही है। अब देखना यह होगा कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं।
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