अमानक बीज से बर्बाद फसल पर सिसक रहे किसान, चुप्पी साधे बैठी सरकार
BHOPAL. नकली खाद- बीज के चक्रव्यूह से मध्य प्रदेश के किसानों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। सरकार की बेरुखी और कृषि विभाग की सुस्ती उन्हें अमानक खाद और बीज खरीदने मजबूर कर रही है।
मध्य प्रदेश में 3524 बीज उत्पादक समितियां रजिस्टर्ड हैं। अमानक बीजों के जरिए किसानों से लूट का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला है। सहकारिता विभाग के पास इतना अमला भी नहीं है कि वे बीज उत्पादकों के रजिस्ट्रेशन के बाद निगरानी कर सकें। यही वजह है कि मामले सामने आने पर भी अमानक बीज की बिक्री पर अंकुश नहीं लग रहा है।
News in Short
- मध्य प्रदेश में 3524 समितियां रजिस्टर्ड हैं।
- निगरानी के लिए सरकारी अमला नहीं है।
- किसानों को बाजार में डेढ़ से दो गुना मंहगा है बीज।
- बीज के नाम पर ग्रेडिंग कर थमा दी जाती है जिंस।
- सैंपलिंग तक सिमटी है अमानक बीज पर कार्रवाई।
News in Detail
मध्य प्रदेश में अमानक बीज बेचने का नेटवर्क लगातार फैल रहा है। हर साल किसान इस नेटवर्क की गिरफ्त में आ रहे हैं। हाल ही में मालवा क्षेत्र के किसान सबस्टैंडर्ड बीजों की ठगी का शिकार हुए हैं।
मामला मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने हैदराबाद की बीज निर्माता कंपनी नुन्हेम्स इंडिया पर केस दर्ज कराया है। यह पहला मौका नहीं है जब घटिया बीज बेंचने वाली कंपनी के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
एक साल पहले 2025 में विदिशा, रायसेन और सीहोर जिलों में सैंकड़ों किसान अमानक सोयाबीन बीज की वजह से संकट में घिर गए थे। लाखों रुपए का बीज खरीदकर बोवनी करने के बाद भी अंकुरण नहीं हुआ और उनकी मेहनत बर्बाद हो गई थी। तब भी प्रशासन ने अमानक बीज बेंचने वाली फर्मों से सैंपल लेकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
किसानों को ठग रहा अमानक बीज नेटवर्क
अमानक बीज बेचकर किसानों से ठगी का नेटवर्क छोटे- छोटे गांवों तक फैल चुका है। सर्टिफाइड और फाउंडेशन बीज के नाम पर किसानों को सबस्टैंडर्ड बीज थमा दिए जाते हैं। अमानक बीज के नेटवर्क में किसान कम कीमत के झांसे की वजह से फंसते हैं।
सीजन के दौरान बीजों के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं। सामान्य किसान बीज की इतनी ज्यादा कीमत चुकाने में सक्षम नहीं होता। इसका फायदा उठाकर अमानक बीज उन्हें थमा दिए जाते हैं। किसान भी बोवनी का सीजन सिर पर होने की वजह से झांसे में फंसकर ठगी का शिकार बन जाते हैं।
बीज निर्माता वसूल रहे डेढ़-दो गुना कीमत
किसान केवल अमानक बीज विक्रेता नेटवर्क से ही नहीं जूझ रहा, बीज की भारी भरकम कीमत भी उसकी परेशानी है। 2025 में प्रदेश में सोयाबीन के सर्टिफाइड बीज 7000 से लेकर 12 हजार रुपए प्रति क्विटंल तक रहे थे। जबकि किसानों को सोयाबीन की उपज के दाम 4400 से 5600 रुपए के औसत से ही मिले।
गर्मी में मूंग की फसल के लिए ब्रांडेड कंपनियों के बीज 14 हजार से 22 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। जबकि मंडी में मूंग की कीमत 8 से 9 हजार रुपए क्विटंल ही है।
बीज की कीमत पर नहीं सरकारी कंट्रोल
सीजन पर बोवनी की भागदौड़ में किसानों को खाद के साथ ही बीज के संकट से भी जूझना पड़ता है। सहकारी बीज उत्पादक समितियां मांग के अनुरूप बीज उपलब्ध कराने से पीछे हट जाती हैं।
इस वजह से किसान बीज के लिए बीज विक्रेता फर्म पर निर्भर रह जाते हैं। बीज की किल्लत से जूझते किसानों की मजबूरी का फायदा व्यापारी उठाते हैं। कृषि विभाग, प्रशासन का कोई नियंत्रण दुकानों पर बिक रहे बीज की कीमत पर नहीं होता।
प्रशासनिक कार्रवाई भी केवल दिखावा
पिछले माह ही मालवा के धार और खरगोन जिलों में सब्जी उत्पादक किसान करेले के अमानक बीज खरीदकर ठगे गए हैं। मामला उछलने के बाद प्रशासन ने केस दर्ज कराया है।
इससे पहले 2025 में रायसेन, विदिशा, सीहोर जिलों में सोयाबीन के अमानक बीज की वजह से किसानों को लाखों का नुकसान हुआ था। प्रशासन ने तब कार्रवाई का भरोसा दिलाकर सैंपलिंग कराई थी। एक- दो मामलों को छोड़ दें तो अन्य पर कोई कार्रवाई हुई न किसान को नुकसान की भरपाई की गई।
ग्रेडिंग के बाद जिंस को बना रहे बीज
प्रदेश में सबस्टैंडर्ड बीज किसानों के जी का जंजाल बन गया है। इसके बावजूद कृषि और सहकारिता जैसे विभागों के पास इसकी जांच और निगरानी की व्यवस्था नहीं है।
सीजन से पहले बीज बिक्री को लेकर विभाग कोई जांच पड़ताल नहीं करता। किसानों को जो बीज उपलब्ध कराया जा रहा है उसमें से ज्यादातर मंडी से खरीदी गई जिंस का हिस्सा होता है। इसे ग्रेडिंग के बाद बीज के टैग के साथ पैकिंग कर बेचा जाता है।
कृषि अधिकारियों की बेरुखी
किसानों से अच्छी गुणवत्ता के बीज के नाम पर हो रहे छलावे पर कृषि अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। बाजार में खुली बीज विक्रेता फर्मों पर बिक्री के दौरान सैंपलिंग न होने के कारण किसान घटिया बीज खरीदकर नुकसान का शिकार बन रहे हैं।
अधिकारियों के पास बीज उत्पादक समिति और फर्मों द्वारा बेंचे जाने वाले बीज उसकी वैराइटी और कीमतों का कोई ब्यौरा तक नहीं होता। इसी वजह से जब कोई मामला सामने आता है तो कार्रवाई सैंपलिंग तक सिमट कर रह जाती है।
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