एमपी बार काउंसिल चुनाव में बवाल: फाइनल लिस्ट जारी, लेकिन पूरी प्रक्रिया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
Neel Tiwari | Apr 22, 2026, 20:27 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. एमपी बार काउंसिल चुनाव में विवाद: महिला आरक्षण, मतदाता सूची और नियमों के उल्लंघन पर सवाल। हाईकोर्ट बार अध्यक्ष ने चुनाव रद्द करने की मांग की।
News in Short
- एमपी स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए 121 उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी।
- सूची में केवल 19 महिला प्रत्याशी, जबकि 30% आरक्षण का प्रावधान।
- 52,000 से अधिक वकीलों के नाम वोटर लिस्ट से गायब होने का आरोप।
- चुनाव प्रक्रिया में इलेक्शन रूल्स 1968 के उल्लंघन का दावा।
- हाईकोर्ट बार अध्यक्ष धन्या कुमार जैन ने चुनाव रद्द करने की मांग उठाई।
News in detail
स्टेट बार चुनाव में उठे पारदर्शिता पर सवाल
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध बताया है। उनका कहना है कि चुनाव नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
नए नियम बने विवाद की जड़
एक पक्ष का मानना है कि चुनाव जीतने के बाद पद छोड़ा जा सकता है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि चुनाव में भाग लेने से पहले ही पद छोड़ना अनिवार्य है। इसी व्याख्या के अंतर ने पूरे चुनाव को विवादों में ला खड़ा किया है।
महिला आरक्षण पर भी उठे सवाल
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिला प्रतिनिधित्व के नियमों का पालन किया गया है या नहीं। यह मुद्दा भी चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि नियमों के अनुसार महिलाओं के पदों को चुनाव के बाद भी समिति द्वारा भरा जा सकता है।
आरोप: 52 हजार वकीलों के नाम गायब
यानी करीब 52,158 वकीलों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया गया। इसे लेकर आरोप है कि यह एक सुनियोजित तरीके से किया गया कदम है, जिससे चुनाव के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
चुनाव नियमों के उल्लंघन का दावा
इतना ही नहीं, जिन अधिवक्ताओं का सत्यापन नहीं हुआ, उन्हें नियम 13 के तहत 60 दिन का नोटिस देना जरूरी था, जो नहीं दिया गया। इससे पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जेल भेज दो, लेकिन नहीं झुकूंगा: बार अध्यक्ष
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी सदस्यता रद्द करने की धमकी दी गई है। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वे नियमों के खिलाफ हैं तो सिर्फ सदस्यता रद्द न की जाए, बल्कि उन्हें जेल भेज दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज नहीं दबाएंगे।
साख पर सवाल, अब निगाहें अगले फैसले पर
अब यह देखना बेहद अहम होगा कि न्यायालय और संबंधित प्राधिकरण इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या चुनाव प्रक्रिया को जारी रखा जाएगा या फिर इसे रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे।
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