कैडर रिव्यू में 4 साल की देरी से ओवरएज हुए पुलिस अधिकारी, ग्वालियर अजाक SP सहित एडिशनल पहुंचे CAT
Neel Tiwari | Apr 22, 2026, 17:25 IST
Photograph: (the sootr)
कैडर रिव्यू में चार साल की देरी ने कई पुलिस अधिकारियों के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन पर प्रतिकूल असर डाला। ग्वालियर के अजाक SP सहित अन्य अधिकारियों ने CAT में राहत की उम्मीद जताई है।
News in details
- कैडर रिव्यू में 4 साल की देरी से अधिकारी IPS चयन से वंचित
- 56 वर्ष की आयु सीमा पार होने के बावजूद विचार की मांग
- CAT जबलपुर खंडपीठ ने दी अंतरिम राहत
- चयन प्रक्रिया यथावत रखने के निर्देश
- केंद्र और राज्य सरकार से मांगा गया जवाब
Intro
ऐसा ही एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें कैडर रिव्यू में हुई देरी ने अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन से वंचित कर दिया। अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के हस्तक्षेप से इन अधिकारियों को राहत की उम्मीद जगी है और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
News in detail
कैडर रिव्यू में देरी बना मुख्य विवाद
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत इस मामले में आवेदकों की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने विस्तार से यह बताया कि कैडर रिव्यू एक नियमित और अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसे प्रत्येक 5 वर्ष में समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
लेकिन इस मामले में वर्ष 2018 में किया जाने वाला कैडर रिव्यू 2022 में जाकर पूरा हुआ, जिससे पूरे चार वर्षों की असामान्य देरी हुई। इस देरी के कारण कई अधिकारियों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, विशेष रूप से उन अधिकारियों पर, जो चयन की दहलीज पर खड़े थे और समय पर प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
उम्र सीमा पार होने से छूटा मौका
लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और देरी के चलते वे इस सीमा को पार कर गए, जिससे उनका वैधानिक अधिकार प्रभावित हुआ। यह केवल एक तकनीकी बाधा नहीं, बल्कि उनके पूरे करियर की दिशा को प्रभावित करने वाला कारक बन गया, क्योंकि उम्र सीमा पार होने के बाद उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर ही नहीं मिल सका।
लंबी सेवा के बावजूद नहीं मिला मौका
अधिवक्ताओं ने उठाए प्रशासनिक विफलता के मुद्दे
उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई प्रक्रिया नियमानुसार समय पर पूरी नहीं की जाती और उसके कारण किसी अधिकारी का अधिकार प्रभावित होता है, तो उस अधिकारी को दंडित करना न्यायसंगत नहीं है। अधिवक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा कर्मचारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए और उन्हें न्याय दिलाना आवश्यक है।
CAT का यथास्थिति आदेश, चयन प्रक्रिया पर क्या पड़ेगा असर
यह आदेश इस बात को सुनिश्चित करता है कि आवेदकों के अधिकार सुरक्षित रहें। अधिकरण ने केंद्र एवं राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब भी मांगा है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी।
अंतिम आदेश से मिल सकती है बड़ी राहत
यह खबरें भी पढ़ें..
जापान ने हथियार निर्यात प्रतिबंध हटाया, बदली शांतिवादी नीति, चीन नाराज, भारत को होगा फायदा
भारत में बीमारियां बदल रहीं पैटर्न, हर 15 दिन में कोई न कोई बीमारी करती है परेशान
रिटायर्ड अधिकारी की जमीन हड़पने का आरोप, रात में दीवार तोड़कर कब्जे की कोशिश
बाड़मेर जिले में स्कूल बस हादसा, ट्रक की टक्कर से एक बच्चे की मौत, 20 घायल
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari