जापान ने हथियार निर्यात प्रतिबंध हटाया, बदली शांतिवादी नीति, चीन नाराज, भारत को होगा फायदा
Sanjay Dhiman | Apr 22, 2026, 16:59 IST
Photograph: (the sootr)
जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से चली आ रही शांतिवादी नीति बदल दी है। अब वह घातक हथियार निर्यात कर सकेगा। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने नई गाइडलाइन मंजूर की। फाइटर जेट, मिसाइल और युद्धपोत अब भारत सहित 17 देशों को बेचे जा सकेंगे।
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- जापान ने घातक हथियार निर्यात पर लगा दशकों पुराना प्रतिबंध हटा लिया।
- प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की कैबिनेट ने नई हथियार निर्यात गाइडलाइन मंजूर की।
- अब जापान फाइटर जेट, मिसाइल, युद्धपोत और युद्धक ड्रोन निर्यात कर सकेगा।
- यह निर्यात सिर्फ भारत सहित उन 17 देशों तक सीमित होगा, जिनसे समझौते हैं।
- चीन ने इसे नए सैन्यवाद की ओर कदम बताकर कड़ा विरोध जताया।
जापान ने बदली 80 साल पुरानी नीति
जापान का संविधान द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बना था। उस वक्त देश को शांतिपूर्ण राष्ट्र के रूप में स्थापित किया गया था। दशकों तक ज्यादातर हथियार निर्यात पर रोक रही। 2014 में जापान ने कुछ गैर-घातक सैन्य सामग्री निर्यात करना शुरू किया था। लेकिन यह दायरा बेहद सीमित था।
पहले सिर्फ बचाव उपकरण, परिवहन, अलर्ट, निगरानी और माइनस्वीपिंग (minesweeping) से जुड़े उपकरण ही निर्यात हो सकते थे। युद्ध में काम आने वाले हथियार देना पूरी तरह वर्जित था। अब वह सीमा भी हट गई है।
क्या-क्या बदला नई नीति में
फिलहाल यह निर्यात सिर्फ उन 17 देशों को होगा, जिन्होंने जापान के साथ रक्षा उपकरण और तकनीक हस्तांतरण समझौते किए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Security Council) की मंजूरी भी जरूरी होगी। अधिकारियों ने कहा कि युद्धरत देशों को घातक हथियार नहीं दिए जाएंगे, हालांकि अपवाद की संभावना से इनकार नहीं किया।
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इसके अलावा 2023 में हुए एक संशोधन ने जापान को ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर छठी पीढ़ी का फाइटर जेट विकसित करने का रास्ता भी दिया। उसी संशोधन से जापान को अमेरिका निर्मित पैट्रियट (Patriot) मिसाइलें अमेरिका को वापस बेचने की भी अनुमति मिली थी। यह इसलिए अहम था क्योंकि अमेरिका ने यूक्रेन को अपने भंडार से मिसाइलें दी थीं।
सहयोगियों ने किया स्वागत
ऑस्ट्रेलिया समेत जापान के कई रक्षा साझेदार देशों ने भी इसका स्वागत किया। दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप से भी रुचि दिखाई गई है। जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची ने X पर कहा, "आज कोई भी देश अकेले शांति और सुरक्षा की रक्षा नहीं कर सकता। हमें एक-दूसरे की जरूरत है।"
चीन ने जताया कड़ा विरोध
सरकार का पक्ष क्या है
यह खबर क्यों जरूरी है
जापान की इस नई नीति से भारत को उन्नत रक्षा तकनीक मिलने का रास्ता खुल सकता है। यह "आत्मनिर्भर भारत" पहल के लिए भी एक अवसर है। संवैधानिक और नैतिक दृष्टि से यह खबर लोकतंत्र, राष्ट्रीय संप्रभुता और वैश्विक शांति के बीच के नाजुक संतुलन को समझने का मौका देती है। पाठकों को यह जानना जरूरी है कि दुनिया के देश बदलते सुरक्षा माहौल में अपनी नीतियां किस तरह बदल रहे हैं।
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