CWC रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, इस कारण एमपी में आ रही बाढ़
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की घटनाएं बढ़ रही है। एमपी भी इसके दुष्परिणामों से अछूता नहीं है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की Flood Forecasting and Warning Network Performance Appraisal Report 2025 की रिपोर्ट में ये दावा किया है। कि MP उन राज्यों की सूची में आ गया है। जहां पिछले 6 सालों में अत्यधिक बाढ़ की घटनाएं हुई है। पहले एमपी बाढ़-प्रभावित नहीं माना जाता था, लेकिन बदलते मौसम के कारण स्थिति बदल रही है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
- जलवायु परिवर्तन के कारण एमपी में बढ़ा बाढ़ का खतरा ।
- बीतें 6 वर्षों से बढ़ी बाढ़ की घटनाएं।
- सबसे संवेदनशील क्षेत्र में शामिल हुए मंडला और नर्मदापुरम आएं।
- राज्य में CWC के 14 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशन सक्रिय।
- भोपाल में फ्लड मॉडलिंग सेंटर रियल-टाइम डेटा पर बाढ़ का पूर्वानुमान होता है तैयार ।
नर्मदा किनारे होती सबसे अधिक निगरानी
रिपोर्ट की मानें तो मंडला और नर्मदापुरम नर्मदा नदी पर स्थित राज्य के दो प्रमुख लेवल फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशन हैं। हाल के वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में बाढ़ का पैटर्न एक जैसा रहा है और यहीं से नदी के जलस्तर की निगरानी की जाती है।
मध्य प्रदेश में CWC के 14 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशन
- राज्य में केंद्रीय जल आयोग के कुल 14 फ्लड फोरकास्टिंग स्टेशन संचालित हैं।
- 2 लेवल फोरकास्टिंग स्टेशन – मंडला और नर्मदापुरम
- 12 रिजर्वायर इनफ्लो फोरकास्टिंग स्टेशन – प्रमुख बांधों के लिए
भोपाल में बना है फ्लड मॉडलिंग सेंटर
भोपाल में केंद्रीय जल आयोग के 27 फ्लड मॉडलिंग सेंटरों में से एक स्थापित है। जो केंद्र रियल-टाइम हाइड्रोलॉजिकल और मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर बाढ़ की भविष्यवाणी करता है।
2025 में कहां आई सबसे बड़ी बाढ़?
वर्ष 2025 में सबसे गंभीर बाढ़ की घटनाएं असम, बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल में दर्ज की गईं। हालांकि, एमपी को उन राज्यों में शामिल किया गया है जहां अब अत्यधिक बाढ़ की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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