न कंप्यूटर, न इंटरनेट और न ही ढंग की व्यवस्था, कैसे एआई सीखेंगे एमपी के छात्र?
Aman Vaishnav | Jul 14, 2026, 12:30 IST
एआई सीखेंगे एमपी के छात्र
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 8वीं से AI की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है, लेकिन डिजिटल सुविधाएं ही इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। यहां तक की शिक्षा मंत्री के गृह जिले नरसिंहपुर में भी हालात कुछ खास नहीं है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आठवीं कक्षा से एआइ पढ़ाई शुरू करने की योजना है।
- लेकिन ज्यादातर स्कूलों में इंटरनेट, कंप्यूटर और स्मार्ट क्लासरूम तक नहीं हैं।
- ताजा पीजीआइ रिपोर्ट में यह हकीकत सामने आई है।
- भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहर भी डिजिटल लर्निंग में सिर्फ औसत प्रदर्शन कर पाए।
- निवाड़ी, आलीराजपुर और झाबुआ की हालत सबसे कमजोर मिली है।
दूसरी ओर इस योजना के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी है। शिक्षा मंत्रालय की परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2025-26 रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों में बुनियादी डिजिटल सुविधाएं ही मौजूद नहीं हैं। यह रिपोर्ट यूडाइस प्लस के आंकड़ों पर आधारित है।
63 हजार स्कूलों में नेट नहीं
कुल 45 हजार से ज्यादा स्कूलों में मौजूद कंप्यूटर भी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल नहीं हो पा रहे। करीब आठ हजार स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। बिना बिजली के डिजिटल पढ़ाई की कल्पना करना मुश्किल है।
शहरों का हाल भी औसत
यानी प्रदेश के सबसे बड़े शहर भी आधे अंक तक नहीं पहुंच पाए। सबसे खराब हालत निवाड़ी जिले की रही, जिसे सिर्फ छह अंक मिले। आलीराजपुर और झाबुआ को आठ-आठ अंक मिले हैं।
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मंत्री के जिले की हालत भी कमजोर
वहीं लर्निंग आउटकम्स में नरसिंहपुर को 290 में से 159 अंक मिले हैं। कक्षा शिक्षण प्रक्रिया में 90 में से 51 अंक मिले। स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण में 35 में से सिर्फ 13 अंक मिले। शासन प्रक्रिया में 84 में से 46 अंक दर्ज हुए।
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किन आधारों पर हुआ आकलन
- क्या स्कूल में बच्चों के लिए इंटरनेट उपलब्ध है।
- क्या कंप्यूटर या लैपटॉप मौजूद हैं।
- क्या स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा है। प्रति कंप्यूटर कितने बच्चे हैं।
- क्या कंप्यूटर पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षक हैं।
जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में कंप्यूटर तो मौजूद हैं, लेकिन वे इस्तेमाल लायक हालत में नहीं हैं। कुछ जगह प्रशिक्षित शिक्षक न होने से कंप्यूटर बंद पड़े रहते हैं। यही वजह है कि सिर्फ उपकरण देने से समस्या हल नहीं होगी।
प्रदेश के आंकड़ों की पूरी तस्वीर
बिजली को लेकर भी हालात अच्छे नहीं हैं। करीब सात हजार सात सौ स्कूलों में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। वहीं करीब 11 हजार स्कूलों में कनेक्शन होने के बावजूद नियमित बिजली सुविधा नहीं मिलती। इन आंकड़ों से साफ है कि डिजिटल शिक्षा की नींव अभी काफी कमजोर है।
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एक्सपर्ट की राय
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि पीजीआइ रैंकिंग की समीक्षा चल रही है। उनके अनुसार जिलेवार समीक्षा कर हर मानक में सुधार का प्रयास किया जाएगा।
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