अफवाह के चक्कर में चुरा ले गए सदियों पुरानी तोप, तीन महीने पहले खोदी गई थी गहरी सुरंग
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के शिवपुरी में नरवर किले से एक टन वजनी तोप चोरी हुई।
- तीन महीने पहले इसी किले में 20 फीट गहरी सुरंग खोदी गई थी।
- पुलिस को शक है दोनों घटनाओं की वजह सोने की तलाश है।
- जांचकर्ता मान रहे हैं कि यह चोरी आम चोरों का काम नहीं है।
- अब तक पुलिस को गिरोह की पहचान में कोई सफलता नहीं मिली है।
नरवर किले से तोप गायब
मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में हैरान करने वाली घटना सामने आई थी। यहां के ऐतिहासिक नरवर किले से एक टन वजनी तोप चोरी हो गई। यह किला राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में आता है। तोप का वजन इतना ज्यादा है कि इसे आम चोर नहीं उठा सकते। इसी वजह से जांचकर्ता अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि चोरों का मकसद सिर्फ तोप नहीं, बल्कि उसमें छिपा कीमती धातु हो सकता है।
तीन महीने पहले खोदी गई थी सुरंग
इस चोरी से तीन महीने पहले भी किले में एक अजीब घटना हुई थी। कुछ अज्ञात खजाना खोजने वालों ने चुपचाप एक सुरंग खोदी थी। यह सुरंग करीब 20 फीट गहरी थी। बताया जा रहा है कि यह सुरंग मध्यकालीन शाही खजाने की तलाश में खोदी गई थी।
स्थानीय लोक कथाओं में इस किले से जुड़े छिपे खजाने की कहानियां मशहूर हैं। पुलिस अब मान रही है कि तोप चोरी और सुरंग वाली घटना में गहरा संबंध हो सकता है। दोनों ही घटनाएं एक जैसी सोच से प्रेरित लग रही हैं।
अष्टधातु पर टिका शक
जांच में जुटी टीम की सबसे मजबूत थ्योरी अष्टधातु से जुड़ी है। अष्टधातु का मतलब संस्कृत में आठ धातुओं से बना मिश्रण होता है। पुरानी मान्यता है कि इस मिश्र धातु में सोना और अन्य कीमती धातुएं भी मिलाई जाती थीं। जांचकर्ताओं को शक है कि गिरोह ने यही सोचकर तोप चुराई होगी। उनका मानना है कि गिरोह को लगा कि तोप में सोना छिपा हो सकता है। इसी लालच में उन्होंने इतनी बड़ी और भारी तोप चुराने का साहस किया।
आम चोरों का काम नहीं
जांचकर्ताओं का कहना है कि एक टन वजनी तोप चुराना आसान काम नहीं था। इसके लिए पहले से पूरी रेकी करनी पड़ी होगी। भारी उठाने के उपकरण भी साथ लाने पड़े होंगे। तोप को ले जाने के लिए बड़े वाहन का इस्तेमाल भी जरूरी था।
इसके अलावा गिरोह को किले के कमजोर प्रवेश और निकास रास्तों की भी अच्छी जानकारी रही होगी। इतनी सारी तैयारियां बताती हैं कि यह किसी संगठित गिरोह की करतूत है। जांचकर्ता अब इसी एंगल से आगे की जांच कर रहे हैं।
CCTV न होना बनी बड़ी दिक्कत
जांच में एक बड़ी अड़चन भी सामने आई है। किले के आसपास कहीं भी CCTV (Closed Circuit Television) कैमरे नहीं लगे हैं। इससे पुलिस के पास कोई सीधा सुराग नहीं मिल पाया। इसके अलावा किले तक पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग सड़कें हैं। ये तीनों रास्ते अलग-अलग दिशाओं से किले तक जाते हैं। इतने रास्तों के होने से जांच और मुश्किल हो गई है। पुलिस के लिए यह पता लगाना कठिन हो गया है कि गिरोह किस रास्ते से आया और किस रास्ते से भागा।
पुलिस का बयान
शिवपुरी के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने इस मामले में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि हम गिरोह की पहचान करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक अभी तक कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा है।
उन्होंने यह भी बताया कि किले के चौकीदार के बयान की भी जांच की जा रही है। पुलिस टीम चौकीदार के बयान को दूसरे सबूतों से मिलाकर सच्चाई परखने में जुटी है।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। सुरंग खोदने वाले लोग भी अब तक पकड़ में नहीं आए हैं। तोप चोरी करने वाला गिरोह भी अभी तक अनजान बना हुआ है। पुरातत्व विभाग और पुलिस दोनों इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। अगर गिरोह पकड़ा जाता है तो कई और राज खुल सकते हैं।
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