रजिस्ट्री ऑफिस के चक्करों से मुक्ति: अब तहसीलदार ही करेंगे मुफ्त रजिस्ट्री
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने रेवेन्यू अफसरों को सब रजिस्ट्रार पॉवर दिए हैं।
- 48 लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री मिलेगी।
- तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी अब रजिस्ट्री कर सकेंगे।
- स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ किया गया है।
- सरकार पर करीब 3800 करोड़ रुपए का भार आएगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने आबादी भूमि पर रहने वाले लाखों परिवारों को बड़ी राहत दी है। अब उन्हें प्रॉपर्टी का मालिकाना हक आसानी से मिल सकेगा। इसके लिए रेवेन्यू अफसरों को खास अधिकार दिए गए हैं।
48 लाख परिवारों को फायदा
प्रदेश में आबादी की जमीन पर काबिज 48 लाख से ज्यादा परिवार हैं। सरकार ने इन सभी को प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने का फैसला किया है। इसके लिए तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सब रजिस्ट्रार का पॉवर दिया गया है।
अब ये अधिकारी भी रजिस्ट्री कर सकेंगे। पहले सिर्फ सब रजिस्ट्रार ही यह काम करते थे। प्रदेश में फिलहाल 235 सब रजिस्ट्रार काम कर रहे हैं। अब राजस्व न्यायालय संभालने वाले अफसर भी रजिस्ट्री में मदद करेंगे। इससे ग्रामीणों को लंबी लाइन और भागदौड़ से राहत मिलेगी।
कैबिनेट का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने दो जून को कैबिनेट बैठक की थी। इसमें स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 को मंजूरी दी गई थी। इस योजना के तहत स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ किया गया है। इस फैसले से सरकार पर करीब 3800 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ेगा। सरकार ने यह बोझ उठाना मंजूर किया है ताकि गरीब परिवारों को राहत मिल सके।
इस फैसले को लागू करने के लिए दो विभागों ने अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए हैं। पंजीयन विभाग ने पंजीयन और मुद्रांक शुल्क माफ करने का आदेश दिया है। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत उपकर माफ करने का आदेश जारी किया है। अब यह उपकर की राशि सरकार खुद पंचायतों को देगी। इससे पंचायतों की आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
रजिस्ट्री होगी आसान
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों की आबादी भूमि की रजिस्ट्री मुफ्त में होगी। यह रजिस्ट्री उप पंजीयक कार्यालय में सब रजिस्ट्रार करेंगे। इसके साथ ही तहसीलदार, नायब तहसीलदार और प्रभारी तहसीलदार भी यह काम कर सकेंगे। इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। गांव के नजदीक ही यह सुविधा मिल सकेगी।
सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। एक साथ कई अधिकारी काम करेंगे तो रजिस्ट्री जल्दी पूरी होगी। इससे योजना का लाभ ज्यादा लोगों तक तेजी से पहुंचेगा।
अब मिलेगा आसानी से लोन भी
नौ जून को हुई एक और कैबिनेट बैठक में सरकार ने अहम फैसला लिया। तय हुआ कि स्वामित्व योजना में बने अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाएगा। इससे भू-खंडधारियों को बैंक से लोन लेना आसान हो जाएगा। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस से जुड़ी कमी भी पूरी की जाएगी।
इस सुविधा के बाद लोग अपनी जमीन पर घर बना सकेंगे। कुछ लोग व्यवसाय या खेती के लिए भी लोन ले सकेंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सरकार का मकसद है कि जमीन का मालिकाना हक सिर्फ कागजी न रहे। इसका असली फायदा लोगों की जिंदगी में दिखे।
निगरानी के लिए बनेगी कमेटी
इस पूरी योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। इसकी अध्यक्षता आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन करेंगे। समिति दिशा-निर्देश तय करेगी और समय-समय पर समीक्षा भी करेगी। इसमें कई बड़े विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर विषय विशेषज्ञों को भी बुलाया जा सकेगा।
योजना के प्रचार-प्रसार के लिए भी सरकार ने बजट रखा है। इसके लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। यह राशि छपाई और जनजागरूकता कार्यक्रमों पर खर्च होगी। राजस्व विभाग को योजना से जुड़े स्पष्टीकरण जारी करने का अधिकार भी दिया गया है।
अब तक इतने अभिलेख हुए तैयार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 68 लाख 11 हजार अधिकार अभिलेख बनाए जा चुके हैं। इनमें से 48 लाख 32 हजार निजी संपत्ति से जुड़े हैं। इनमें नागरिकों की निजी जमीन, मकान, प्लॉट और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। इन सभी अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से कोई स्टाम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
यह पूरी कवायद डिजिटलीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रशासन लगातार अधिकार अभिलेखों को डिजिटल रूप दे रहा है। इससे रिकॉर्ड रखना आसान होगा और गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी। सरकार का दावा है कि इससे नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रिया भी पहले से सरल होगी।
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