एमपी सरकार का बड़ा फैसला: गांवों में संपत्ति की रजिस्ट्री पर बड़ी छूट, जानें कब से

Manya Jain | Jun 24, 2026, 13:42 IST
Share
MP government registry stamp duty discount
MP government registry stamp duty discount

मध्यप्रदेश में पंचायत राज कानून में संशोधन कर सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्ति रजिस्ट्री पर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क माफ करने का अधिकार मिला। 10 जून 2026 से लागू हो गया है, पर अभी सीधी छूट नहीं।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • मध्यप्रदेश सरकार ने अपने पंचायत राज कानून एवं ग्राम स्वराज कानून में बड़ा बदलाव किया है।
    • यह नया नियम 10 जून 2026 से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।
    • अब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री पर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क माफ कर सकेगी।
    • इस छूट को सीधे लागू करने के लिए सरकार जल्द ही अलग से अधिसूचना जारी करेगी।
    • भविष्य में गांवों में जमीन या मकान खरीदना पहले से काफी सस्ता हो जाएगा।

    क्या है यह नया कानून

    मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 में संशोधन किया गया है। इसे अध्यादेश के जरिए लागू किया गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत यह अध्यादेश जारी हुआ। विधि और विधायी कार्य विभाग ने इसे 10 जून 2026 से प्रभावी कर दिया।

    इस संशोधन में धारा 75 में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है। अब सरकार के पास यह कानूनी अधिकार आ गया है कि वह ग्राम पंचायत क्षेत्रों में होने वाली संपत्ति रजिस्ट्री पर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क माफ कर सके।

    किसे मिल सकता है फायदा

    यह संशोधन मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए है। जो लोग गांव में जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराना चाहते हैं, उन्हें फायदा हो सकता है। खासकर छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    पंचायत क्षेत्रों में संपत्ति रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क का बोझ बड़ा होता है। यह कानून उस बोझ को कम करने की दिशा में एक कदम है। नए प्रावधान के अनुसार 75 अंश तक अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क माफ किया जा सकता है।

    अभी सीधी छूट नहीं मिली है

    यहां एक जरूरी बात समझनी होगी। कानून बन गया है, लेकिन इसका फायदा अभी किसी को नहीं मिला है। छूट तभी मिलेगी जब सरकार अलग से अधिसूचना जारी करेगी। फिलहाल ऐसी कोई अधिसूचना नहीं आई है।

    यह व्यवस्था एक तरह से सरकार के हाथ में एक नया औजार है। जब सरकार चाहे, तब वह इस अधिकार का उपयोग कर सकती है। तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में रजिस्ट्री की पुरानी दरें ही लागू रहेंगी।

    स्टाम्प शुल्क का ढांचा समझें

    अभी ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन रजिस्ट्री पर स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) के साथ अतिरिक्त शुल्क भी लगता है। यह अतिरिक्त शुल्क 10 हजार रुपए तक हो सकता है। यही वह रकम है जिसे माफ करने का अधिकार अब सरकार के पास आया है।

    रजिस्ट्री की कुल लागत में यह शुल्क एक बड़ा हिस्सा होता है। खासकर जब छोटे मूल्य की संपत्तियां रजिस्टर होती हैं। इसलिए इस छूट का असर आम ग्रामीण पर सबसे ज्यादा पड़ेगा।

    यह संशोधन क्यों अहम है

    ग्रामीण भारत में संपत्ति के कागजात बनवाना अब भी बड़ी चुनौती है। लागत, दूरी और प्रक्रिया की जटिलता — तीनों मिलकर लोगों को रजिस्ट्री से दूर रखते हैं। इस संशोधन से कम से कम लागत का एक हिस्सा कम हो सकता है।

    सरकार के इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि ग्रामीण संपत्ति के कानूनी दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है। जब रजिस्ट्री सस्ती होगी, तो लोग कागजात बनवाने से कतराएंगे नहीं। इससे विवाद भी कम होंगे।

    आगे क्या होगा

    अब नजरें सरकार की उस अधिसूचना पर टिकी हैं जो यह तय करेगी कि किसे, कितनी और कब छूट मिलेगी। जब तक वह अधिसूचना नहीं आती, यह कानून केवल एक अधिकार के रूप में सरकार के पास रहेगा।

    ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह एक उम्मीद की शुरुआत है। असली राहत तब मिलेगी जब सरकार इस अधिकार को व्यवहार में लाएगी। तब तक इंतजार जारी है।

    ये भी पढ़ें...

    1 जुलाई से शुरू होगी पचपदरा रिफाइनरी, PM मोदी कर सकते है लोकार्पण

    चोर समझकर दो युवकों को बंधक बनाया, फिर किया अधमरा, आए थे ससुराल

    रीनीट में बायोमेट्रिक सत्यापन में घिरी ब्लैकलिस्ट कंपनी, ESB व MPPSC में अभी भी काम जारी

    गाड़ियों-कपड़ों से ज्यादा घूमने पर खर्च कर रहे भारतीय, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    Tags:
    • मध्यप्रदेश सरकार
    • ग्राम पंचायत
    • संपत्ति
    • रजिस्ट्री
    • स्टाम्प ड्यूटी
    • मध्यप्रदेश पंचायत राज
    • पंचायत राज कानून
    गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
    20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

    By Neel Tiwari

    20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
    छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

    By Arun Tiwari

    छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
    मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

    By Sandeep Kumar

    मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
    IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

    By VINAY VERMA

    IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
    राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

    By Ashish Bhardwaj

    राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
    पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

    By Arun Tiwari

    पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
    भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

    By Jitendra Shrivastava

    भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच