फ्री स्कूटी योजना पर डेडलाइन का ब्रेक: जल्द नहीं दिया हिसाब तो अटक जाएगा बजट
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में फ्री स्कूटी योजना परडेडलाइन का दबाव है।
- 31 जुलाई 2026 तकबजट सिस्टम में एंट्री जरूरी है।
- 16वेंवित्त आयोग से 11 हजार करोड़ रुपए मिलनेका अनुमान है।
- समय पर हिसाब न देने परबजट रुक सकता है।
- यह व्यवस्था पांच सालतक लागू रहेगी।
मध्य प्रदेश सरकार की फ्री स्कूटी योजना पर अब समय सीमा का दबाव बढ़ गया है। सरकार की कई बड़ी योजनाओं का भविष्य अब एक डेडलाइन पर टिका है। यदि तय समय पर हिसाब नहीं दिया गया तो बजट अटक सकता है।
किन योजनाओं पर असर
यह मामला तीन बड़ी योजनाओं से जुड़ा है। पहली फ्री स्कूटी योजना है। दूसरी नमो हरित परियोजना है। तीसरी 16वें वित्त आयोग की सिफारिश है। इसके तहत स्थानीय निकायों को अगले पांच साल में करीब 11 हजार करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। अगर विभाग समय पर हिसाब नहीं देते तो यह पूरी राशि खतरे में पड़ सकती है।
31 जुलाई की सख्त डेडलाइन
सभी योजनाओं को ठीक से चलाने के लिए एक नई शर्त जोड़ी गई है। संबंधित विभागों को 31 जुलाई 2026 तक बीईएमएस (Budget Estimation and Monitoring System) में जानकारी दर्ज करनी होगी। यह नई वित्तीय व्यवस्था 01 अप्रैल 2026 से लागू होगी। यह व्यवस्था 31 मार्च 2031 तक यानी पूरे पांच साल तक चलेगी।
एमपी वित्त विभाग ने इस मामले में सख्ती दिखाई है। सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों को निर्देश भेजे गए हैं। उनसे कहा गया है कि तय समय सीमा में जरूरी कार्रवाई पूरी करें। देरी होने पर योजनाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है।
अतिरिक्त बजट की जरूरत
राज्य सरकार को दो बड़ी योजनाएं लंबे समय तक चलानी हैं। इनमें फ्री स्कूटी योजना और नमो हरित योजना शामिल हैं। इन्हें अगले पांच साल तक जारी रखने के लिए 100 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट की जरूरत होगी। सरकार को यह इंतजाम पहले से करना होगा।
यह अतिरिक्त राशि इसलिए जरूरी है क्योंकि दोनों योजनाएं लगातार लोकप्रिय होती जा रही हैं। ज्यादा आवेदन आने से खर्च भी बढ़ रहा है। ऐसे में बजट का सही प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है।
16वें वित्त आयोग की ग्रांट
16वें वित्त आयोग ने भी बड़ी सिफारिश की है। इसके तहत स्थानीय निकायों को कुल ग्रांट में से हिस्सा मिलेगा। अनुमान है कि यह राशि लगभग 11 हजार करोड़ रुपए होगी। यह राशि पांच साल की अवधि में चरणों में जारी होगी।
इस ग्रांट के वितरण के लिए एक तय फॉर्मूला बनाया गया है। शहरी स्थानीय निकायों को कुल ग्रांट का 7.25 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायतों को 2.25 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। यह बंटवारा जनसंख्या और जरूरत के आधार पर तय हुआ है।
डिजिटल डेटा के बिना नहीं मिलेगा फंड
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पारदर्शिता जरूरी होगी। सभी स्वीकृत योजनाओं का पूरा ब्योरा बीईएमएस पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है। इसका मकसद सरकारी पैसे की बर्बादी रोकना है। साथ ही योजनाओं में पारदर्शिता लाना भी जरूरी माना गया है।
1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 के बीच एक सख्त नियम लागू रहेगा। जिस योजना का डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं होगा, उसे फंड जारी नहीं किया जाएगा। यह नियम किसी भी विभाग या योजना पर बराबर लागू होगा।
इस सख्त निर्देश के बाद हड़कंप मच गया है। राज्य सरकार के सभी विभाग अब सक्रिय हो गए हैं। वे 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले अपने प्रस्ताव पूरे करने में जुटे हैं। किसी भी विभाग के लिए यह समय सीमा चूकना भारी पड़ सकता है।
समय सीमा चूकने पर क्या होगा
इस पूरी व्यवस्था के लिए एक और जरूरी शर्त रखी गई है। संबंधित विभागों को कैबिनेट मेमोरेंडम पर वित्त विभाग की सहमति लेनी होगी। इसके लिए भी आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 ही तय की गई है।
अगर कोई विभाग इस समय सीमा का पालन नहीं करता तो नतीजा गंभीर हो सकता है। उस विभाग की योजनाओं की निरंतरता पर असर पड़ सकता है। आने वाले सालों के लिए उसका बजट भी रोका जा सकता है।
यही वजह है कि अब हर विभाग पर दोहरा दबाव है। एक तरफ योजनाओं को समय पर पूरा करना है। दूसरी तरफ डिजिटल पोर्टल पर सही डेटा भी अपडेट करना है। जो विभाग इसमें चूक करेगा, उसे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
फ्री स्कूटी योजना जैसी लोकप्रिय योजनाओं का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। अगर बजट अटकता है तो लाभार्थियों को समय पर फायदा नहीं मिल पाएगा। इसलिए यह डेडलाइन सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आम जनता के हित से भी जुड़ी है।
फ्री स्कूटी योजना क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री स्कूटी योजना चला रही है। इस योजना के तहत 12वीं कक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास होने वाले होनहार छात्र-छात्राओं को स्कूटी खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है।
सरकार पेट्रोल स्कूटी के लिए 90 हजार रुपए और इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए 1.20 लाख रुपए तक की राशि सीधे छात्रों के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है। इससे मेधावी छात्रों को पढ़ाई और आने-जाने में सुविधा मिलती है।
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