सालों से रुकी पदोन्नति की होगी भरपाई: अधिकारियों-कर्मचारियों को साल में दो बार मिलेगा प्रमोशन!

Amresh Kushwaha | Aug 29, 2026, 10:05 IST
MP के 54 विभागों में पदोन्नति की रफ्तार तेज
मध्य प्रदेश सरकार अधिकारियों-कर्मचारियों को साल में दो बार प्रमोशन देने की तैयारी में है। प्रोफार्मा प्रमोशन या 5 साल की अनिवार्यता में छूट देकर पिछले 10 साल की रुकी पदोन्नति भरी जाएगी। सितंबर में डीपीसी होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश सरकार कर्मचारियों को साल में दो बार प्रमोशन देने की तैयारी में है।
  • यह प्रमोशन डीपीसी के जरिए दिया जाएगा।
  • प्रोफार्मा प्रमोशन या 5 साल की अनिवार्यता में छूट पर विचार हो रहा है।
  • पिछले 10 साल से रुकी पदोन्नति की भरपाई की जाएगी।
  • अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भी टिका है।

मध्य प्रदेश सरकार अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की तैयारी कर रही है। अब साल में दो बार विभागीय पदोन्नति समिति डीपीसी (Departmental Promotion Committee) के जरिए प्रमोशन देने की योजना है। प्रदेश के सभी 54 विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। सितंबर के महीने में अगली डीपीसी आयोजित की जानी है।



10 साल से रुकी पदोन्नति

यह पूरी योजना तभी संभव हो पा रही है जब कर्मचारियों को कुछ खास सुविधा दी जाए। सरकार दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला विकल्प है प्रोफार्मा पदोन्नति यानी नो वर्क-नो पे के आधार पर सितंबर में दूसरा प्रमोशन देना।



दूसरा विकल्प है पांच साल की अनिवार्यता की शर्त में छूट देना। सरकार इन दोनों में से किसी एक विकल्प को लागू करने पर विचार कर रही है। इसके जरिए पिछले 10 सालों यानी 2016 से 2026 तक रुकी हुई पदोन्नति की भरपाई की जाएगी। हाल ही में जिन अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए हैं, उनकी पदोन्नति को अभी सिर्फ दो महीने ही हुए हैं।



क्या है प्रोफार्मा फॉर्मूला

सरकार मुख्य रूप से पांच साल में प्रोफार्मा पदोन्नति देने के फॉर्मूले पर विचार कर रही है। यह फॉर्मूला विभागों में वरिष्ठता और पदोन्नति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लाया जा रहा है। यदि किसी नियमित पदोन्नति में प्रशासनिक या कानूनी अड़चन आती है, तो कर्मचारी को कागजी यानी प्रोफार्मा पदोन्नति का लाभ मिलेगा।



इस फॉर्मूले से 10 साल की कुल सेवा अवधि में हर कर्मचारी को कम से कम दो पदोन्नतियां मिल सकेंगी। इसमें प्रोफार्मा पदोन्नति भी शामिल होंगी। इसका पूरा खाका फिलहाल तैयार किया जा रहा है।



एक लाख कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर

इस मामले का एक दुखद पहलू भी सामने आया है। पिछले 10 सालों यानी 2016 से 2026 के दौरान करीब 1 लाख अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी प्रमोशन के रिटायर हो चुके हैं। इन कर्मचारियों के बारे में फिलहाल कोई अलग से निर्णय नहीं लिया गया है।



सरकार का कहना है कि इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही संभव हो सकेगा। यानी इन एक लाख कर्मचारियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।



सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

सितंबर में होने वाली डीपीसी और जारी होने वाले प्रोफार्मा पदोन्नति आदेश भी अंतिम रूप से तय नहीं माने जा सकते। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका एसएलपी (Special Leave Petition) के अंतिम निर्णय के अधीन ही रहेगी।



दरअसल 30 अप्रैल 2016 को पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त कर दिया गया था। तभी से यह पूरा मामला अदालत में चल रहा है। सरकार का रुख साफ है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को मान्य करते हुए ही वर्तमान प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है।



अगले साल से नियमित डीपीसी

सरकार की मंशा सिर्फ मौजूदा दिक्कत सुलझाने तक सीमित नहीं है। सरकार चाहती है कि इस साल सितंबर में प्रोफार्मा पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद अगले साल से फिर नियमित डीपीसी आयोजित की जाए। इससे कई फायदे होने की उम्मीद है।



सबसे पहले वरिष्ठता सूची सुचारू रूप से चलेगी। साथ ही कैडर लॉक होने की पुरानी समस्या भी खत्म हो जाएगी। सरकार का कहना है कि आगे से पदोन्नति के आदेश बिना किसी पक्षपात के जारी किए जाएंगे। इसके लिए सिर्फ नियम-कायदों और वरिष्ठता सूची को आधार बनाया जाएगा।



कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला

यह पूरी कवायद लाखों सरकारी कर्मचारियों के करियर से जुड़ी है। बरसों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है। साल में दो बार प्रमोशन मिलने से उनकी वित्तीय स्थिति भी बेहतर होगी। साथ ही विभागों में लंबे समय से अटकी वरिष्ठता की उलझन भी सुलझ सकती है। हालांकि अंतिम तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही साफ होगी।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर लाखों सरकारी कर्मचारियों के सेवा अधिकार से सीधे जुड़ी है। भारतीय संविधान समान अवसर और निष्पक्ष सेवा शर्तों की गारंटी देता है। प्रमोशन जैसे मामलों में लंबी देरी कर्मचारियों के मौलिक हितों को प्रभावित करती है।



यह खबर बताती है कि सरकार वरिष्ठता और नियमों के आधार पर पारदर्शी व्यवस्था बनाना चाहती है। साथ ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान का भी उदाहरण है। नागरिकों और कर्मचारियों को प्रशासनिक फैसलों की सही जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और पारदर्शी शासन व्यवस्था को बढ़ावा मिले।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश सरकार साल में दो बार प्रमोशन क्यों देना चाहती है?
    पिछले 10 सालों से कई कर्मचारियों की पदोन्नति प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों के कारण अटकी हुई है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार प्रोफार्मा पदोन्नति या 5 साल की अनिवार्यता में छूट देकर साल में दो बार प्रमोशन देने पर विचार कर रही है।
  2. प्रोफार्मा पदोन्नति का क्या मतलब है?
    प्रोफार्मा पदोन्नति एक कागजी प्रमोशन होता है, जिसे नो वर्क-नो पे के आधार पर दिया जाता है। इसमें कर्मचारी को पद का दर्जा मिलता है, भले ही उसे उस पद पर व्यावहारिक रूप से काम करने या अतिरिक्त वेतन का तुरंत लाभ न मिले।

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