ऊर्जा संकट की आहट के बीच सरकार का नया प्लान: ग्रीन बिल्डिंग, पानी प्रबंधन और पारंपरिक तकनीक पर जोर
मध्यप्रदेश में बढ़ती गर्मी और बिजली खपत के बीच अब शहरों की प्लानिंग का मॉडल बदलने की तैयारी है। सरकार का फोकस सिर्फ आधुनिक तकनीक पर नहीं, बल्कि पारंपरिक तरीकों पर भी जा रहा है। संकेत साफ हैं,अगर अभी नहीं संभले, तो आने वाले समय में ऊर्जा और पानी दोनों बड़ा संकट बन सकते हैं।
AC कल्चर पर सरकार की चिंता
तेजी से बढ़ती एयर कंडीशनर की मांग को लेकर सरकार ने चिंता जताई है। इशारा साफ है, अगर गांव तक AC पहुंचा, तो बिजली की खपत बेकाबू हो सकती है। यानी आज की सुविधा, कल का संकट बन सकती है।
यह खबरें भी पढ़ें...
मध्य प्रदेश में फिर महंगी हुई बिजली: अप्रैल में बढ़ीं दरें, अब मई में 5.36% का नया सरचार्ज
एमपी की बेटी अलपा सूद ने दुनिया के 40 इनोवेटिव लीगल लीडर्स की लिस्ट में बनाई जगह
‘ग्रीन बिल्डिंग’ क्यों बन रही प्राथमिकता?
सरकार अब ऐसे निर्माण मॉडल पर जोर दे रही है जिसमें कम बिजली, ज्यादा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग हो। इसमें प्राकृतिक रोशनी, हवा और ऊर्जा बचत को प्राथमिकता दी जाएगी। लक्ष्य है, कम खर्च में ज्यादा टिकाऊ इन्फ्रास्ट्रक्चर।
पुराने तरीकों में नया समाधान
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने साफ कहा कि प्राचीन भारतीय तकनीकों में गर्मी से बचने के कई कारगर उपाय हैं। भोपाल में राजा भोज का जल प्रबंधन और मांडव की स्थापत्य शैली इसके उदाहरण बताए जा रहे हैं। यानी भविष्य की प्लानिंग में अतीत का ज्ञान जोड़ा जाएगा।
ग्लोबल वार्मिंग का सीधा असर
आंधी-तूफान और अनियमित बारिश से किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। फसलों का नुकसान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है। सरकार इस एंगल को भी अब प्लानिंग में शामिल करने की बात कर रही है।
पानी पर फोकस: रिचार्ज और हार्वेस्टिंग
ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए अलग से काम तेज किया जा रहा है। फ्लाईओवर और एलिवेटेड कॉरिडोर पर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य की जा रही है। ताकि बारिश का पानी बेकार न जाए।
भविष्य की बिल्डिंग कैसी होगी?
- ग्रीन सर्टिफाइड निर्माण
- प्राकृतिक वेंटिलेशन पर जोर
- वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम
- स्मार्ट टेक्नोलॉजी और 3D कंस्ट्रक्शन
- कम एनर्जी खपत, ज्यादा दक्षता
असल बदलाव क्या है?
अब सिर्फ कंक्रीट के ढांचे नहीं, बल्कि ‘सस्टेनेबल’ शहर बनाने की बात हो रही है। जहां विकास और पर्यावरण दोनों साथ चलें।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी के बरगी क्रूज हादसे का छत्तीसगढ़ में बड़ा असर, बिना लाइफ जैकेट और खराब मौसम में बोटिंग पर पाबंदी
एमपी के बीजेपी नेता देंगे परीक्षा, ट्रेनिंग हॉल में एंट्री से पहले मोबाइल भी करना होगा जमा
बड़ा सवाल
क्या लोग AC और आधुनिक सुविधाओं की आदत छोड़कर इस नए मॉडल को अपनाएंगे? या फिर प्लानिंग कागजों तक ही सीमित रह जाएगी? फिलहाल, सरकार ने दिशा तय कर दी है, अब देखना है, जमीन पर कितना बदलाव आता है।
ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट