एमपी भर्ती नियमों में फेरबदल: 6 जिलों के लिए जारी हुआ नया आरक्षण रोस्टर
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश सरकार ने 6 जिलों के लिए नया आरक्षण रोस्टर जारी किया है।
- इसमें 3 पुनर्गठित और 3 नए जिले शामिल हैं।
- जिला स्तरीय सीधी भर्तियों पर यह रोस्टर लागू होगा।
- छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा 73 फीसदी आरक्षण तय किया गया है।
- जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से हर वर्ग का हिस्सा तय किया गया है।
मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए नया नियम बनाया है। अब जिला स्तर की सीधी भर्तियों में आरक्षण का नया रोस्टर लागू होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए एक खास सर्कुलर जारी किया है।
नए नियम में 100 बिंदुओं का एक रोस्टर तैयार किया गया है। अब हर जिले की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय होगा। सीधी भर्ती के पदों पर अधिकतम 73 प्रतिशत तक आरक्षण मिलेगा।
आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा 73 फीसदी आरक्षण लागू होगा। इस आरक्षण को कुल चार अलग-अलग कैटेगरीज में बांटा गया है। इसमें एसटी, एससी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को जगह मिली है। इन सभी वर्गों को उनकी आबादी के मुताबिक कोटा दिया जाएगा।
वहीं रीवा जिले के लिए 66 प्रतिशत आरक्षण तय हुआ है। इसके अलावा सतना जिले के लिए 68 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। यह नया नियम युवाओं के रोजगार पर बड़ा असर डालेगा।
किन जिलों में लागू होगा नया रोस्टर
इस बार 3 पुनर्गठित जिलों - छिंदवाड़ा, सतना और रीवा का संशोधित रोस्टर जारी हुआ है। इनके साथ 3 नए जिलों - मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा का पहली बार अलग रोस्टर बनाया गया है।
यह रोस्टर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की जिला स्तरीय सीधी भर्तियों पर लागू होगा। यानी स्थानीय सरकारी नौकरियों में अब इसी रोस्टर के अनुसार नियुक्ति होगी।
छिंदवाड़ा में 73 फीसदी आरक्षण, एसटी को सबसे ज्यादा हिस्सा
| वर्ग | आरक्षण प्रतिशत |
|---|---|
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 39% |
| ओबीसी आरक्षण (OBC) | 14% |
| अनुसूचित जाति (SC) | 11% |
| ईडब्ल्यूएस आरक्षण (EWS) | 9% |
| कुल आरक्षण | 73% |
सतना और रीवा में क्या बदला
| जिला | ओबीसी (OBC) | एससी (SC) | एसटी (ST) | ईडब्ल्यूएस (EWS) | कुल आरक्षण |
|---|---|---|---|---|---|
| छिंदवाड़ा | 14% | 11% | 39% | 9% | 73% |
| पांढुर्णा (नया) | 27% | 10% | 25% | 10% | 72% |
| मैहर (नया) | 27% | 19% | 15%* | 10% | 71% |
| मऊगंज (नया) | 27% | 18% | 14% | 10% | 69% |
| सतना | 27% | 19% | 12% | 10% | 68% |
| रीवा | 27% | 16% | 13% | 10% | 66% |
नए जिलों में पहली बार बना अपना रोस्टर
मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा मध्यप्रदेश के नए जिलेहैं। इन्हें पहले किसी पुराने जिले से काटकर बनाया गया था। पहले इनका अलग जिला रोस्टर नहीं था।
मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा का आरक्षण
| जिला | ओबीसी | एससी | एसटी | ईडब्ल्यूएस | कुल आरक्षण |
|---|---|---|---|---|---|
| मैहर | 27% | 19% | — | 10% | 71% |
| मऊगंज | 27% | 18% | 14% | 10% | 69% |
| पांढुर्णा | 27% | 25% (एसटी) | 10% (एससी) | 10% | 72% |
रोस्टर का आधार क्या है
जिला स्तरीय रोस्टर का मूल सिद्धांत यह है कि जिस वर्ग की जितनी आबादी हो, उसे सरकारी नौकरियों में उतना प्रतिनिधित्व मिले। यही कारण है कि हर जिले में आंकड़े अलग-अलग हैं।
जीएडी (GAD – General Administration Department) के आदेश में यह भी साफ किया गया है कि यह रोस्टर न्यायालय के आदेशों के अधीन रहेगा। यानी अगर कोई कोर्ट केस हो तो उसके अनुसार बदलाव हो सकते हैं।
भर्तियों पर क्या असर पड़ेगा
इन 6 जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थानीय सरकारी नौकरियों के लिए अब नए रोस्टर से भर्ती होगी। नए जिलों में पहले यह स्पष्ट नहीं था कि किस वर्ग को कितने पद मिलेंगे।
इस रोस्टर के आने से उन जिलों में अटकी हुई भर्तियां आगे बढ़ सकती हैं। स्थानीय उम्मीदवारों को अब पता चलेगा कि उनके जिले में उनके वर्ग के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं।
6 जिलों में क्यों बदला आरक्षण रोस्टर
मध्यप्रदेश में हाल के वर्षों में कुछ नए जिले बने हैं। इनके साथ कुछ पुराने जिलों की सीमाएं भी बदली हैं। जिलों की सीमाएं बदलने के बाद वहां की जनसंख्या का ढांचा भी बदल गया है।
पुराना आरक्षण रोस्टर इन नई सीमाओं पर लागू नहीं हो सकता था। इसलिए सामान्य प्रशासन विभाग ने नया रोस्टर तैयार किया है। यह रोस्टर मध्यप्रदेश लोक सेवा आरक्षण अधिनियम 1994 के तहत बनाया गया है।
नया रोस्टर सुप्रीम कोर्ट की 50 फीसदी सीमा से बाहर
मध्यप्रदेश सरकार का यह नया आरक्षण रोस्टर सुप्रीम कोर्ट की 50 फीसदी की सीमा से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंद्रा साहनी केस में यह सीमा तय की थी। GAD के इस रोस्टर में OBC को 27 फीसदी दिया गया है, जिससे छिंदवाड़ा में कुल आरक्षण 73 फीसदी और पांढुर्णा में 72 फीसदी तक पहुंच जाता है। यह विवाद नया नहीं है - 2019 में OBC कोटा 14 से 27 फीसदी होने के बाद से यह मामला अदालतों में है और 2020 में हाईकोर्ट ने 27 फीसदी लागू करने पर रोक भी लगाई थी।
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को MP हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ को वापस भेज दिया है, जो दो माह में फैसला सुनाएगी। यानी जून 2026 तक स्थिति बदल सकती है। GAD ने खुद अपने आदेश में लिखा है कि यह रोस्टर "न्यायालयीन आदेशों के अधीन रहेगा" - यही इस रोस्टर की सबसे बड़ी कानूनी कमजोरी है। इसलिए खबर में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भर्तियां इस रोस्टर से होंगी, लेकिन अंतिम वैधता अदालत तय करेगी।
FAQ
- आरक्षण रोस्टर क्या होता है?
आरक्षण रोस्टर एक सूची होती है जो बताती है कि सरकारी नौकरियों के पद किस वर्ग को मिलेंगे। जिला स्तर पर यह स्थानीय जनसंख्या के अनुपात के आधार पर बनाया जाता है। 100 बिंदुओं के रोस्टर में 100 पदों पर वर्गवार आवंटन तय रहता है। - छिंदवाड़ा में 73 फीसदी आरक्षण क्यों है?
छिंदवाड़ा में आदिवासी यानी एसटी आबादी बहुत अधिक है। जनसंख्या के अनुपात में एसटी को 39 फीसदी आरक्षण दिया गया है। बाकी वर्गों का हिस्सा मिलाकर कुल आरक्षण 73 फीसदी बनता है। - नए जिलों के लिए अलग रोस्टर की जरूरत क्यों पड़ी?
मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा पुराने जिलों से काटकर बनाए गए हैं। इनकी नई सीमाओं में जनसंख्या का ढांचा अलग है। पुराने रोस्टर से इन जिलों में भर्ती करना संभव नहीं था, इसलिए नया रोस्टर जरूरी था।
ये भी पढ़ें...
MPPSC के बाद ESB भर्ती नियम 2026 पर भी विवाद, आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
पंचायत चुनाव को लेकर आयोग एक्टिव, आरक्षण आंकड़ों की फिर मांग
90 दिन की सीमा पार, 831 रिजर्व फैसले सुनाए... फिर भी प्रमोशन में आरक्षण का फैसला क्यों नहीं?
महिला आरक्षण पद पर पुरुष भर्ती: MP हाईकोर्ट ने पलटा फैसला