महिला आरक्षण पद पर पुरुष भर्ती: MP हाईकोर्ट ने पलटा फैसला
Pawan Modiya | May 23, 2026, 23:19 IST
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MP हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 16 साल पुराने लीगल एड भर्ती विवाद में सुधा अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया। चयन के बाद 85 अंकों का कट-ऑफ लगाना अवैध माना। महिला पद पर पुरुष नियुक्ति को गलत बताया। नया पद बनाकर नियुक्ति और 50% बैक वेज का आदेश।
News In Short
- 1. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 16 साल पुराने लीगल एड सर्विसेज भर्ती विवाद में बड़ा फैसला सुनाया।
- 2. कोर्ट ने माना कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 85 अंकों का कट-ऑफ लगाना अवैध था।
- 3. महिला आरक्षण वाले पद पर पुरुष अभ्यर्थी की नियुक्ति को नियमों के विपरीत माना गया।
- 4. याचिकाकर्ता सुधा अग्रवाल को नियुक्ति देने और जरूरत पड़ने पर नया पद बनाने के निर्देश दिए गए।
- 5. कोर्ट ने 50% बैक वेज, वैचारिक वरिष्ठता और अन्य लाभ देने का भी आदेश दिया।
16 साल तक न्याय के इंतजार में बीती जिंदगी
न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अचानक कट-ऑफ लागू कर महिला अभ्यर्थी को बाहर करना पूरी तरह मनमाना और कानून के खिलाफ था।
भर्ती प्रक्रिया के बीच बदल दिए गए “खेल के नियम”
लेकिन चयन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अचानक 85 अंकों का कट-ऑफ लागू कर दिया गया। इसी आधार पर उन्हें चयन से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह एक पुरुष अभ्यर्थी को नियुक्ति दे दी गई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि भर्ती विज्ञापन और नियमों में कहीं भी ऐसे कट-ऑफ का जिक्र नहीं था।
हाईकोर्ट ने कहा- यह सीधे तौर पर अन्याय
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण वाले पद पर पुरुष उम्मीदवार की नियुक्ति करना आरक्षण की मूल भावना के खिलाफ था। अदालत ने माना कि एक योग्य महिला उम्मीदवार मौजूद होने के बावजूद उसे नियम बदलकर बाहर किया गया।
नौकरी नहीं मिली, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी
अदालत ने माना कि विभाग की अवैध प्रक्रिया के कारण उन्हें वर्षों तक नौकरी और उससे जुड़े अवसरों से वंचित रहना पड़ा। इसी कारण कोर्ट ने उन्हें 50 प्रतिशत बैक वेज और वैचारिक वरिष्ठता देने का आदेश भी दिया।
16 साल से नौकरी कर रहे अधिकारी को भी राहत
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चयन समिति की गलती का दंड उस कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता जिसने बिना किसी धोखाधड़ी के वर्षों तक काम किया हो।
अब सुधा अग्रवाल के लिए बनेगा नया पद
इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें वैचारिक वरिष्ठता, अन्य परिणामी लाभ और 50 प्रतिशत पिछला वेतन दिया जाए। अदालत ने आदेश के पालन के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की है।
महिला आरक्षण और भर्ती पारदर्शिता पर अहम फैसला
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